- दिल्ली के आली गांव में बुलडोजर कार्रवाई से सैकड़ों परिवारों के वर्षों की मेहनत से बने मकान जमींदोज हो गए हैं
- प्रभावित परिवारों को बुलडोजर कार्रवाई से पहले पांच दिन का नोटिस दिया गया और बिजली के कनेक्शन काटे गए थे
- कई मकान पॉवर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर खरीदी गई जमीन पर बनाए गए थे, जहां जमीन के दाम पहले बहुत कम थे
देश की राजधानी दिल्ली के आली गांव में सोमवार के दिन जो हुआ, उसने सैकड़ों परिवारों के सपनों को मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया. कभी जिन घरों में हंसी-खुशी गूंजती थी, वहां अब सिर्फ धूल और आंसू हैं. “भैया…अपना एक फ्लैट बेचा, गांव की जमीन बेची…फिर करीब एक करोड़ की जमीन खरीदी और 35-40 लाख लगाकर ये दो मंजिला मकान बनाया था. हम तो सड़क पर आ गए…अब मैं क्या करूं?” ये शब्द प्रेमलता मिश्रा के हैं, जिनका मकान बुलडोजर कार्रवाई की भेंट चढ़ चुका है.

घर मलबे में तब्दील, नहीं थम रहे महिलाओं के आंसू
प्रेमलता की आंखों से बहते आंसू उस दर्द की कहानी कह रहे हैं, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है. प्रेमलता के घर से दो मकान छोड़कर खड़ी चांदनी यादव भी रो रही हैं, वजह यही है कि इसी जगह पर उनका सौ गज का मकान भी खतरे में है. सोमवार को करीब आधा दर्जन मकान और दुकानें जमींदोज़ कर दी गईं. जिन घरों में लोग सालों की मेहनत से बसे थे, वहां अब सिर्फ मलबा है.
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बुलडोजर एक्शन के लिए मिला 5 दिन का वक्त
बुलडोजर एक्शन से पहले लोगों को पांच दिन का नोटिस मिला था, बिजली के कनेक्शन काट दिए गए. परिवार अपने घरों से सामान निकाल रहे हैं. राजेश यादव बताते हैं कि उन्होंने सालभर पहले ही अपना मकान बनाया था. हैरानी की बात यह है कि दो साल पहले यहां जमीन 80-90 हजार रुपये प्रति गज बिक रही थी. लोगों ने पॉवर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर जमीन खरीदी. जमीन बेचने वाला सुधीर चौधरी लोगों को भरोसा दिलाता रहा कि सबकी रजिस्ट्री एक साथ होगी.

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भूमाफिया और ठगी का शिकार लोग
प्रेमलता बताती हैं कि जमीन पहले मंगत राम की थी, फिर उनके पोतों को ट्रांसफर हुई. धीरे-धीरे लोग एक-दूसरे से पूछकर जमीन खरीदते गए, मकान बनते गए. लेकिन अब भू-माफिया और भ्रष्ट अधिकारियों की साठगांठ ने आम लोगों के करोड़ों रुपये डुबो दिए. आली गांव में कुछ मकान डीडीए और कुछ यूपी सिंचाई विभाग की जमीन पर बने थे. अब 300 से ज्यादा मकानों को नोटिस देकर खाली कराया जा रहा है.
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