- मई 2026 में देश में थोक महंगाई दर बढ़कर 9.68 प्रतिशत पहुंच गई, जो अप्रैल में 8.26 प्रतिशत थी.
- फ्यूल और बिजली की कीमतों में तेज वृद्धि से होलसेल प्राइस इंडेक्स की महंगाई दर में बड़ा उछाल आया है.
- खाने-पीने की वस्तुओं की महंगाई भी बढ़ी है, मई में फूड आर्टिकल्स की कीमतों में वृद्धि दर्ज हुई है.
WPI Inflation Data: देश में महंगाई को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है. मई 2026 में थोक महंगाई दर (WPI Inflation) बढ़कर 9.68 प्रतिशत पहुंच गई, जो अप्रैल में 8.26 प्रतिशत थी. यानी सिर्फ एक महीने में महंगाई में तेज उछाल देखने को मिला है. इसकी बड़ी वजह फ्यूल, बिजली से लेकर खाने पीने की चीजों और मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की कीमतों में बढ़ोतरी रही.आज यानी 15 जून,सोमवार को वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने होलसेल प्राइस इंडेक्स बेस्ड महंगाई के आंकड़े जारी किए.
इसी के साथ सरकार ने होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) की नई सीरीज भी लॉन्च की है, जिसका बेस ईयर अब 2022-23 होगा. इससे पहले 2011-12 बेस ईयर वाली सीरीज लागू थी.
आखिर WPI महंगाई इतनी क्यों बढ़ी?
मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, मई में सबसे ज्यादा दबाव फ्यूल और एनर्जी की कीमतों से आया.फ्यूल एंड पावर कैटेगरी में महंगाई अप्रैल के 24.89 प्रतिशत से बढ़कर मई में 30.33 प्रतिशत हो गई. वहीं कच्चे पेट्रोलियम (Crude Petroleum) में महंगाई 56.31 प्रतिशत से बढ़कर 61.51 प्रतिशत तक पहुंच गई.
एक्सपर्ट्स का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) पर असर की वजह से ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है. भारत अपने अधिकांश कच्चे तेल का आयात इसी रूट से करता है, जिसका असर घरेलू कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है.
खाने-पीने की चीजें भी हुईं महंगी
मई में फूड आइटम्स की महंगाई भी बढ़ी है. फूड आर्टिकल्स में महंगाई दर अप्रैल के 2.43 प्रतिशत से बढ़कर मई में 3.60 प्रतिशत हो गई. वहीं WPI फूड इंडेक्स के तहत फूड इंन्फ्लेशन रेट 4.49 प्रतिशत दर्ज की गई. इसका मतलब है कि खाने-पीने से जुड़ी कई जरूरी चीजों की कीमतें अभी भी आसमान छू रही हैं.
फैक्ट्री में बनने वाले सामान भी हुए महंगे
मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स यानी फैक्ट्रियों में बनने वाले उत्पादों की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इस कैटेगरी में महंगाई अप्रैल के 6.68 प्रतिशत से बढ़कर मई में 7.48 प्रतिशत हो गई. मंत्रालय के अनुसार, केमिकल एंड केमिकल प्रोडक्ट्स, बेसिक मेटल्स, खनिज तेल, कच्चा पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस कैटेगरी महंगाई बढ़ाने वाले प्रमुख फैक्टर्स में शामिल रहे.

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खुदरा महंगाई भी 16 महीने के उच्च स्तर पर
सिर्फ थोक महंगाई ही नहीं, बल्कि खुदरा महंगाई (CPI Inflation) भी बढ़ी है. मई में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई बढ़कर 3.93 प्रतिशत पहुंच गई, जबकि अप्रैल में यह 3.48 प्रतिशत थी. यह पिछले 16 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है.
RBI ने भी बढ़ाया महंगाई का अनुमान
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अपनी मौद्रिक नीति तय (MPC) करते समय मुख्य रूप से CPI महंगाई को ध्यान में रखता है. सरकार ने RBI को महंगाई 4 प्रतिशत के आसपास रखने की जिम्मेदारी दी है, जिसमें 2 प्रतिशत ऊपर या नीचे की सीमा तय है.इसी महीने RBI ने चालू वित्त वर्ष के लिए अपने महंगाई अनुमान को 4.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया है. केंद्रीय बैंक का मानना है कि ग्लोबल एनर्जी प्राइस में बढ़ोतरी और बढ़ती इनपुट कॉस्ट का असर आगे भी महंगाई पर दिखाई दे सकता है.
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भी आया उछाल
ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने का असर घरेलू बाजार पर भी पड़ा है.मई के दूसरे पखवाड़े में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 7.50 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई. इससे ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ने की आशंका है, जिसका असर अन्य वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है.
सरकार ने लॉन्च की नई WPI सीरीज, क्या बदला?
सरकार ने 2022-23 को आधार वर्ष मानते हुए संशोधित WPI सीरीज लॉन्च की है. यह 2011-12 बेस ईयर वाली पुरानी सीरीज की जगह लेगी.इसके साथ ही सरकार ने आउटपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (OPPI), ट्रायल इनपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (IPPI) और सात सेवाओं के लिए सर्विस प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) की नई सीरीज भी जारी की है.
सरकार का कहना है कि यह बदलाव अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की सिफारिशों और ग्लोबल स्टैंडर्ड के अनुरूप किया गया है. हालांकि उपयोगकर्ताओं को नई प्रणाली अपनाने का समय देने के लिए WPI सीरीज अगले पांच वर्षों तक जारी रहेगी.
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