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महंगाई नापने का तरीका बदलेगी सरकार! WPI की जगह आएगा नया PPI इंडेक्स, जानिए आप पर क्या होगा असर

Wholesale Price Index यानी WPI एक ऐसा सूचकांक है जो थोक बाजार में वस्तुओं की कीमतों में होने वाले बदलाव को मापता है.

महंगाई नापने का तरीका बदलेगी सरकार! WPI की जगह आएगा नया PPI इंडेक्स, जानिए आप पर क्या होगा असर
सरकार WPI का बेस ईयर बदलेगी और लाएगी नया PPI इंडेक्स

सरकार जल्द ही Wholesale Price Index (WPI) यानी थोक मूल्य सूचकांक का बेस ईयर बदलने की तैयारी कर रही है. मौजूदा समय में WPI का आधार वर्ष 2011-12 है, लेकिन अब इसे बदलकर 2022-23 किया जाएगा. इसके साथ ही सरकार Producer Price Index (PPI) नाम का एक नया सूचकांक भी शुरू करने की योजना बना रही है. 

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क्या होता है WPI और क्यों बदला जा रहा है इसका बेस ईयर?

Wholesale Price Index यानी WPI एक ऐसा सूचकांक है जो थोक बाजार में वस्तुओं की कीमतों में होने वाले बदलाव को मापता है. इसका उपयोग यह समझने के लिए किया जाता है कि उत्पादन और वितरण स्तर पर कीमतें किस तरह बदल रही हैं. वर्तमान में WPI की गणना 2011-12 को आधार मानकर की जाती है.

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PPI क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण होगा?

सरकार WPI के साथ-साथ Producer Price Index यानी PPI भी शुरू करने की योजना बना रही है. PPI एक ऐसा सूचकांक है जो उत्पादकों द्वारा खरीदी और बेची जाने वाली वस्तुओं तथा सेवाओं की कीमतों में बदलाव को मापता है.

सरल शब्दों में कहें तो PPI यह बताता है कि किसी वस्तु या सेवा के उत्पादन स्तर पर कीमतें किस तरह बदल रही हैं. इससे यह समझने में मदद मिलती है कि भविष्य में उपभोक्ता स्तर पर महंगाई किस दिशा में जा सकती है. दुनिया के कई विकसित देशों में PPI का उपयोग पहले से किया जा रहा है और अब भारत भी इस दिशा में आगे बढ़ रहा है.

तुरंत नहीं होगा WPI से PPI में बदलाव

सरकार ने साफ किया है कि नया PPI लॉन्च होने के बाद भी WPI को तुरंत बंद नहीं किया जाएगा. अधिकारियों के अनुसार, पहले नई प्रणाली की स्थिरता और विश्वसनीयता का अध्ययन किया जाएगा. जब यह सुनिश्चित हो जाएगा कि नया सूचकांक सही और भरोसेमंद तरीके से काम कर रहा है, तब इसका व्यापक उपयोग शुरू किया जाएगा.

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IIP और GDP में भी हो रहे हैं बदलाव

यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब भारत की सांख्यिकीय प्रणाली में कई बड़े बदलाव किए जा रहे हैं. हाल ही में सरकार ने Index of Industrial Production (IIP) का नया बेस ईयर 2022-23 घोषित किया है. इसके अलावा देश के GDP और Consumer Price Index (CPI) के आधार वर्ष में भी बदलाव की प्रक्रिया चल रही है.

सरकार के अनुसार, GDP का आधार वर्ष 2022-23 किया जा रहा है, जबकि CPI का नया आधार वर्ष 2024 होगा. इन सभी बदलावों का उद्देश्य देश के आर्थिक आंकड़ों को अधिक आधुनिक, सटीक और वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाना है.

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