वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों के बीच मंगलवार को घरेलू शेयर बाजार में जोरदार बिकवाली देखने को मिली. मेटल, आईटी और पीएसयू बैंकिंग शेयरों में दबाव के कारण बाजार पूरे दिन कमजोर बना रहा. निवेशकों की सतर्कता और वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता का असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दिया.
सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट
सेंसेक्स 893.39 अंक यानी 1.16 प्रतिशत गिरकर 76,200.68 पर बंद हुआ. वहीं निफ्टी 278.80 अंक यानी 1.16 प्रतिशत टूटकर 23,824.10 के स्तर पर बंद हुआ. बाजार में शुरुआती कारोबार के दौरान कुछ मजबूती देखने को मिली थी, लेकिन बाद में बिकवाली बढ़ने से सभी प्रमुख इंडेक्स दबाव में आ गए. निफ्टी में इंफोसिस, जेएसडब्ल्यू स्टील और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) सबसे बड़े नुकसान वाले शेयरों में शामिल रहे. इन कंपनियों के शेयरों में पूरे सत्र के दौरान मजबूत बिकवाली देखने को मिली. विशेष रूप से आईटी और मेटल सेक्टर में निवेशकों ने मुनाफावसूली की, जिससे इन शेयरों पर ज्यादा दबाव बना रहा.
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी फिसले
गिरावट सिर्फ बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही. व्यापक बाजार में भी कमजोरी देखने को मिली.
- निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 1.05 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ.
- निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.48 प्रतिशत नीचे आया.
इससे साफ है कि निवेशकों ने कई सेक्टरों में मुनाफावसूली की.
मेटल और आईटी सेक्टर सबसे बड़े लूजर
सेक्टोरल आधार पर निफ्टी मेटल इंडेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई. यह इंडेक्स 3 प्रतिशत से ज्यादा टूट गया. वहीं निफ्टी आईटी और पीएसयू बैंक इंडेक्स भी कमजोर रहे. वैश्विक बाजारों में टेक्नोलॉजी शेयरों की बिकवाली का असर भारतीय आईटी कंपनियों पर भी देखने को मिला. आईटी इंडेक्स 2 प्रतिशत से ज्यादा गिरा और इसके सभी शेयर लाल निशान में बंद हुए. बाजार में भारी उतार-चढ़ाव के बीच फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया. निफ्टी फार्मा और निफ्टी हेल्थकेयर इंडेक्स में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही, जिससे इन सेक्टरों को समर्थन मिला.
निवेशक क्यों रहे सतर्क?
मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, वैश्विक बाजारों की कमजोरी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी अनिश्चितता ने निवेशकों के भरोसे को प्रभावित किया. हाल की तेजी के बाद हुई मुनाफावसूली ने भी बाजार पर दबाव बढ़ा दिया. हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता और भू-राजनीतिक तनाव में कुछ कमी से बाजार को थोड़ा सहारा मिला. इसके बावजूद निवेशक मॉनसून की प्रगति और भारत-अमेरिका ट्रेड बातचीत पर नजर बनाए हुए हैं.
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