शेयर बाजार में उतार-चढाव के बीच टाटा एसेट मैनेजमेंट ने निवेशकों के लिए नया न्यू फंड ऑफर (NFO) लॉन्च किया है. कंपनी ने 22 जून को टाटा मल्टी-सेक्टर पैसिव फंड ऑफ फंड (FoF) पेश किया है. यह एक ओपन-एंडेड स्कीम है, जिसमें निवेशक अपनी जरूरत के हिसाब से कभी भी निवेश कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर पैसा निकाल भी सकते हैं. इस NFO में निवेश करने की आखिरी तारीख 6 जुलाई 2026 है.
एक ही फंड से कई सेक्टर्स में निवेश का मौका
टाटा की यह नई स्कीम सीधे शेयरों में पैसा नहीं लगाएगी. इसके बजाय यह अलग-अलग सेक्टर से जुड़े इंडेक्स फंड और ETF में निवेश करेगी. इसका मतलब है कि निवेशकों को एक ही फंड के जरिए कई सेक्टर्स में पैसा लगाने का मौका मिलेगा. इससे किसी एक सेक्टर पर ज्यादा निर्भरता कम हो सकती है और निवेश को बेहतर तरीके से फैलाया जा सकता है.
5,000 रुपये से शुरू कर सकते हैं निवेश
इस NFO में निवेश की शुरुआत केवल 5,000 रुपये से की जा सकती है. इसके बाद 1 रुपये के मल्टीपल में कितनी भी रकम जोड़ी जा सकती है. स्कीम में कोई एंट्री लोड नहीं रखा गया है, यानी निवेश करते समय कोई एक्सट्रा चार्ज नहीं देना होगा.हालांकि अगर निवेशक यूनिट अलॉट होने के 30 दिनों के भीतर पैसा निकालते हैं तो 0.50 फीसदी का एग्जिट लोड देना होगा. वहीं 30 दिन पूरे होने के बाद पैसा निकालने पर कोई एग्जिट लोड नहीं लगेगा.
बाजार के हिसाब से बदलेगा निवेश का हिस्सा
इस फंड की खास बात इसकी डायनेमिक स्ट्रैटजी है. फंड मैनेजर बाजार के ट्रेंड और अलग-अलग सेक्टर्स की चाल पर नजर रखेंगे. जिस सेक्टर में बेहतर प्रदर्शन और मजबूत ग्रोथ दिखेगी, वहां निवेश का हिस्सा बढ़ाया जा सकता है. वहीं जहां रिस्क ज्यादा दिखेगा, वहां निवेश कम किया जा सकता है. इससे निवेशकों को बाजार के बदलते माहौल के हिसाब से फायदा मिलने की उम्मीद रहेगी.
गलत समय पर खरीदारी और बिकवाली की परेशानी होगी कम
टाटा एसेट मैनेजमेंट के चीफ बिजनेस ऑफिसर आनंद वरदराजन का कहना है कि भारत की ग्रोथ के साथ अलग-अलग समय पर अलग-अलग सेक्टर्स आगे निकलते हैं. आम निवेशक अक्सर सही समय पर किसी सेक्टर में एंट्री या एग्जिट नहीं कर पाते, जिससे कमाई पर असर पड़ता है. उनके मुताबिक यह स्कीम निवेशकों को एक व्यवस्थित तरीका देगी, जिससे उन्हें बार-बार यह तय नहीं करना पड़ेगा कि किस सेक्टर में पैसा लगाना है और किससे निकलना है.
टैक्स के मामले में भी मिल सकता है फायदा
इस फंड की एक और खासियत इसका टैक्स स्ट्रक्चर है. आमतौर पर जब कोई निवेशक एक सेक्टर से पैसा निकालकर दूसरे सेक्टर में लगाता है तो उस पर कैपिटल गेन टैक्स लग सकता है. लेकिन इस फंड के अंदर फंड मैनेजर जो बदलाव या रीबैलेंसिंग करेंगे, उसके लिए निवेशक को अलग से कोई टैक्स नहीं देना होगा. इससे फंड मैनेजमेंट आसान हो सकता है.
जोखिम कितना है? ये भी जान लीजिए
यह स्कीम पूरी तरह इक्विटी सेक्टर्स से जुड़ी हुई है, इसलिए इसे वेरी हाई रिस्क कैटेगरी में रखा गया है. इसका बेंचमार्क Nifty 500 Total Return Index (TRI) है. ऐसे में निवेशकों को निवेश से पहले अपने रिस्ल लेने की कैपेसिटी और इन्वेस्टमेंट पीरिएड को ध्यान में रखना चाहिए.
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