Rupee vs Dollar: फॉरेन करेंसी एक्सचेंज मार्केट में लगातार गिरते रुपये को सहारा देने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने एक बड़ा फैसला लिया है. केंद्रीय बैंक ने तीन बड़ी सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (HPCL) और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) की दैनिक डॉलर जरूरतों को पूरा करने के लिए एक स्पेशल विंडो खोलने का ऐलान किया है.
यह स्पेशल विंडो 12 अक्टूबर 2026 से शुरू होगी और अगले आदेश तक लगातार चालू रहेगी. इसके जरिए रिजर्व बैंक ऑथराइज्ड और तय बैंकों के जरिए इन सरकारी तेल कंपनियों को सीधे डॉलर बेचेगा, ताकि खुले बाजार में डॉलर की अचानक मांग न बढ़े और रुपये पर पड़ रहा दबाव कम हो सके.
विदेशी करेंसी हेजिंग के नियमों पर कड़ाई
स्पेशल डॉलर विंडो खोलने के साथ-साथ RBI ने फॉरेन एक्सचेंज हेजिंग सुविधाओं के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए डॉक्यूमेंटेशन के नियमों को भी काफी सख्त कर दिया है.
कैंसल्ड कॉन्ट्रैक्ट्स की री-बुकिंग पर रोक
आरबीआई ने एक और बड़ा प्रतिबंध लगाया है. अब अगर कोई फॉरेन एक्सचेंज डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट चाहे डिलीवरेबल हो या नॉन-डिलीवरेबल एक बार कैंसिल कर दिया जाता है, तो अधिकृत डीलर यूजर्स को उसे दोबारा बुक करने की इजाजत बिल्कुल नहीं देंगे.
बिना एक्सपोजर ट्रांजैक्शन की सीमा घटकर 5 मिलियन डॉलर
बाजार में अनावश्यक सट्टेबाजी को सीमित करने के उद्देश्य से आरबीआई ने बिना अंडरलाइंग एक्सपोजर वाले फॉरेन एक्सचेंज डेरिवेटिव ट्रांजैक्शन की लिमिट को घटाकर 5 मिलियन डॉलर के बराबर कर दिया है.
20% का फॉरेन एक्सचेंज रिस्क रिजर्व
रिजर्व बैंक ने एक नया वित्तीय सुरक्षा कवच भी लागू किया है. 2 मिलियन डॉलर से अधिक की नोशनल वैल्यू वाले रुपये से जुड़े सभी डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए अधिकृत डीलरों को आरबीआई के पास 'फॉरेन एक्सचेंज रिस्क रिजर्व' रखना अनिवार्य कर दिया गया है. यह रिजर्व हर ट्रांजैक्शन की नोशनल वैल्यू का 20 प्रतिशत होगा, जिसे नकद (Cash) के रूप में बनाए रखना होगा.
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