एनडीटीवी वर्ल्ड समिट 2026 में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने देश की अर्थव्यवस्था को लेकर आम जनता को बड़ी राहत वाली खबर दी है. उन्होंने साफ किया कि भारतीय रुपया पूरी तरह मजबूत और सुरक्षित स्थिति में है और देश के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार यानी Forex Reserves का ऐसा सुरक्षा कवच है जो किसी भी बाहरी आर्थिक झटके से निपटने के लिए काफी है. इसके साथ ही उन्होंने ये भी भरोसा दिलाया है कि किया कि देश की विकास दर मजबूत है और आम जनता की जेब पर महंगाई का भारी बोझ नहीं बढ़ेगा. वहीं, वित्तीय बाजार को सुरक्षित रखने के लिए टाटा संस जैसी बड़ी होल्डिंग कंपनियों पर रिजर्व बैंक की कड़ी निगरानी की अहमियत को भी उन्होंने समझाया है.
डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत पर क्या बोले गवर्नर?
आम लोगों के मन में हमेशा यह सवाल रहता है कि डॉलर के मुकाबले रुपया गिरने से क्या हमारी जेब पर असर पड़ेगा? इस पर आरबीआई गवर्नर ने समझाया कि रिजर्व बैंक रुपये की किसी खास कीमत या लेवल को तय करने का लक्ष्य नहीं रखता है. रिजर्व बैंक का मुख्य काम केवल यह देखना है कि विदेशी मुद्रा बाजार में कोई घबराहट या अचानक बड़े उतार-चढ़ाव का असर देश पर न पड़े. अगर कोई सट्टेबाजी के जरिए रुपये को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेगा, तो रिजर्व बैंक सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा.
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हमारे पास है पर्याप्त विदेशी मुद्रा, बाहरी झटकों का डर नहीं
देश के विदेशी मुद्रा भंडार के सवाल पर गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बेहद पॉजिटिव तस्वीर पेश की. उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक स्थिति मजबूत है और हमारा सर्विस एक्सपोर्ट लगातार बेहतर हो रहा है. भारत के पास इतना पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है कि वह अपने सभी अंतरराष्ट्रीय वादों और विदेशी बैंक जमाके भुगतानों को बिना किसी परेशानी के पूरा कर सकता है. हालांकि इसके साथ ही उन्होंने ये भी जोड़ा कि यदि कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें और गिरती हैं, तो यह हमारी अर्थव्यवस्था के लिए सोने पर सुहागा जैसा होगा.
टाटा संस जैसी बड़ी होल्डिंग कंपनियों पर क्यों है RBI की नजर?
गवर्नर ने बाजार की सुरक्षा को लेकर एक और महत्वपूर्ण बात समझाई. उन्होंने बताया कि टाटा संस जैसी कोर इन्वेस्टमेंट कंपनियां बड़े कॉरपोरेट ग्रुप्स के सबसे ऊपर बैठकर उनके पैसों का प्रबंधन करती हैं. चूंकि ये कंपनियां बाजार से बॉन्ड्स और कमर्शियल पेपर्स के जरिए भारी मात्रा में पब्लिक फंड जुटाती हैं और उसे अपनी दूसरी कंपनियों में लगाती हैं, इसलिए पूरे वित्तीय सिस्टम को सुरक्षित रखने के लिए इन पर आरबीआई की कड़ी निगरानी जरूरी है. ऐसी कंपनियों को निगरानी से छूट तभी मिल सकती है जब वे पूरी तरह बिना किसी पब्लिक फंड के काम करें.
महंगाई रहेगी काबू में, विकास की रफ्तार है तेज
गवर्नर ने आम लोगों को भरोसा दिलाया कि खाने-पीने की चीजों और ईंधन की वजह से भले ही महंगाई में थोड़ा उतार-चढ़ाव होता है, लेकिन कुल मिलाकर महंगाई रिजर्व बैंक के तय दायरे में ही रहेगी. इस साल औसतन महंगाई दर 5.1% रहने का अनुमान है. देश की आर्थिक हालत बहुत मजबूत है. सीमेंट और स्टील की बिक्री, लोगों द्वारा लिए जा रहे लोन, टैक्स कलेक्शन और गाड़ियों की बिक्री जैसे सभी आंकड़े बता रहे हैं कि देश तरक्की कर रहा है.
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ब्याज दरें कम होंगी या नहीं? अगले फैसले का इंतजार
लोन की ईएमआई (EMI) सस्ती होगी या नहीं, इस सवाल पर भी गवर्नर ने अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि ब्याज दरों में बदलाव का फैसला रिजर्व बैंक की एक खास कमेटी करती है, जिसकी हर दो महीने में बैठक होती है. उन्होंने किसी भी कयास पर विराम लगाते हुए कहा कि आने वाली बैठक में देश की आर्थिक स्थितियों को देखकर ही सही फैसला लिया जाएगा. रिजर्व बैंक का पूरा ध्यान इस बात पर है कि देश में विकास भी होता रहे और महंगाई भी काबू में रहे.
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