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Fuel Price Hike: एक हफ्ते में दो बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, लेकिन दुनिया के मुकाबले भारत में राहत क्यों?

Petrol Diesel Price Hike India: एक हफ्ते में दो बार बढ़ोतरी के बावजूद भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों का असर दुनिया के कई बड़े देशों की तुलना में अभी भी सीमित नजर आ रहा है.

Fuel Price Hike: एक हफ्ते में दो बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, लेकिन दुनिया के मुकाबले भारत में राहत क्यों?
Petrol Diesel Price Hike: इंडियन ऑयल के एक अधिकारी ने बताया कि ईंधन की कीमतों में 3.91 रुपए की बढ़ोतरी से केवल आंशिक रूप से कच्चे तेल में आए उछाल की भरपाई हुई है.

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक हफ्ते के भीतर दो बार बढ़ोतरी ने आम लोगों की जेब पर असर जरूर डाला है, लेकिन ग्लोबल मार्केट की तुलना में भारत अब भी राहत की स्थिति में दिख रहा है. सरकार और सरकारी तेल कंपनियों ने बढ़ते कच्चे तेल के दबाव के बीच कीमतें बढ़ाईं, मगर यह इजाफा कई बड़े देशों के मुकाबले काफी सीमित रहा. ऐसे में सवाल है कि जब दुनिया भर में ईंधन महंगा हो रहा है, तो उसके मुकाबले भारत में बढ़ोतरी कम क्यों रही?

एक हफ्ते में दो बार बढ़े दाम

सरकार ने हाल के दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में दो चरणों में बढ़ोतरी की. पहले करीब ₹3 प्रति लीटर और फिर लगभग 90 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि की गई. यानी कुल मिलाकर एक हफ्ते में ईंधन कीमतों में लगभग ₹3.90 प्रति लीटर का इजाफा हुआ.

 भारत में बढ़ोतरी क्यों मानी जा रही कम?

ग्लोबल ट्रेंड्स के मुकाबले भारत में ईंधन कीमतों की बढ़ोतरी काफी नियंत्रित रही है. कई देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 10% से 50% तक उछाल देखा गया, जबकि भारत में यह बढ़ोतरी करीब 4% के आसपास रही. यही वजह है कि प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारत अपेक्षाकृत कम दबाव वाला बाजार बना हुआ है.

कच्चे तेल ने बढ़ाया दबाव

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल इसका सबसे बड़ा कारण बना. ईरान से जुड़े तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम तेल मार्गों पर सप्लाई बाधा की आशंका ने ग्लोबल क्रूड प्राइस को ऊपर धकेला. इसका असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर भी पड़ा.

तेल कंपनियों पर क्यों बढ़ा बोझ?

सरकारी तेल कंपनियां लंबे समय तक खुदरा कीमतें स्थिर रखकर बढ़ी हुई लागत का दबाव झेल रही थीं. इससे कंपनियों पर रोजाना भारी अंडर-रिकवरी का बोझ बढ़ा. कीमतों में हालिया बढ़ोतरी से नुकसान कुछ हद तक कम हुआ, लेकिन पूरी भरपाई अभी भी नहीं हो सकी है.

दुनिया के मुकाबले भारत कहां खड़ा है?

अमेरिका, यूरोप और एशिया के कई देशों में ईंधन कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखी गई. कई बाजारों में डीजल की कीमतों ने पेट्रोल से भी ज्यादा छलांग लगाई. इसके मुकाबले भारत ने चरणबद्ध और सीमित बढ़ोतरी का रास्ता चुना, ताकि उपभोक्ताओं पर महंगाई का असर अचानक न बढ़े.

आगे क्या और बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?

अब आगे की दिशा अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के दाम, भू-राजनीतिक हालात और सप्लाई चेन पर निर्भर करेगी. अगर क्रूड महंगा बना रहता है, तो ईंधन कीमतों पर दबाव जारी रह सकता है. फिलहाल भारत में पर्याप्त पेट्रोल-डीजल स्टॉक होने से सप्लाई को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है.

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