Petrol Diesel Price Expectation to US Iran Peace Deal: सोमवार सुबह ठीक 6 बजे खबर आई कि सरकारी तेल कंपनियों ने एक बार फिर पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ा दी हैं. पिछले 11 दिनों में ये चौथी बार है, जब पेट्रोल-डीजल के दाम (Petrol-Diesel Prices) बढ़े. खैर कुछ ही देर बाद ये खबर आई कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध और टकराव रोकने के लिए 'पीस डील' यानी शांति वार्ता की संभावना बनी है, जिस पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान का अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर सकरात्मक असर पड़ा है. बाजार खुलते ही कच्चे तेल की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में करीब 5% गिरकर 92 डॉलर के करीब पहुंच गई. शाम को कीमतें हल्की चढ़ने से पहले ये बड़ी गिरावट थी.
इसके साथ ही उम्मीद भी बढ़ी कि अमेरिका और ईरान के बीच टकराव ख़तम होने से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में अनिश्चितता खत्म होगी, और लंबे समय से बढ़ी हुई कीमतें और नीचे गिर सकती है. तो यहां सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या पेट्रोल-डीजल की महंगाई कम होगी, क्या पेट्रोल-डीजल के दाम घटेंगे, क्या फ्यूल सस्ता होगा? इस सवाल पर देश के जाने-माने तेल अर्थशास्त्री किरीट पारीख ने पूरी बात समझा दी.
किरीट पारेख ने आखिर क्या कहा?
योजना आयोग के पूर्व सदस्य रहे किरीट पारीख के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय तेल और गैस बाजार में कीमतों में ये उथल-पुथल लंबे समय तक जारी रह सकती है. पारीख ने एनडीटीवी से कहा, 'अगर आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध और टकराव रोकने के लिए कोई समझौता हो भी जाता है, तब भी पश्चिम एशिया से कच्चे तेल और गैस की सप्लाई सामान्य होने में 5 से 6 महीने लग सकते हैं.'
क्यों हालात सामान्य होने में लगेगा समय?
उन्होंने कहा, 'हाल के युद्ध के दौरान ईरान ने पश्चिमी एशिया के कई तेल और गैस उत्पादक देश के प्लांट्स पर मिसाइल और ड्रोन से कई हमले किए थे, और इन बड़े तेल और गैस प्लांट्स में प्रोडक्शन युद्ध के पहले वाले स्तर पर पहुचने में करीब 6 महीने तक का समय लग सकता है.'
सवाल पिछले करीब तीन महीनों के दौरान कच्चे तेल और गैस की बढ़ी हुई कीमतों और भारतीय तेल अर्थव्यवस्था पर इसके असर को लेकर भी उठ रहे हैं.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिये तेल और गैस टैंकरों की आवाजाही बाधित होने से यहां से भारत पहुंचने वाला 40% कच्चा तेल, करीब 50% LNG और 90% LPG का आयात बुरी तरह से प्रभावित हुआ है, और वैकल्पिक स्रोतों से इनका आयात करना काफी महंगा सौदा साबित हुआ है.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा- पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाने से भारत सरकार को करीब 1 लाख करोड़ के राजस्व का नुकसान हुआ है. जाहिर है, मध्यपूर्व एशिया में युद्ध का भारतीय अर्थव्यवस्था पर काफी बुरा असर पड़ा है.
मध्यपूर्व एशिया में पिछले करीब 87 दिनों से जारी संकट की वजह से भारत का तेल और गैस आयात पर खर्च काफी ज़्यादा बढ़ चुका है. पिछले 11 दिनों के दौरान पेट्रोल और डीजल की रिटेल कीमतों में चार बार बढ़ोत्तरी के बाद भी तेल कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, और उनकी अंडर-रिकवरीज बढ़ती जा रही है.
पेट्रोलियम मंत्रालय ने क्या?
सोमवार को पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव, सुजाता शर्मा ने कहा , 'पेट्रोल-डीजल की रिटेल कीमतों में बढ़ोतरी से पहले तेल कंपनियों को हर दिन 1000 करोड़ रुपये का घाटा हो रहा था. अब कीमतें बढ़ने के बाद भी हर दिन 600 करोड़ से कुछ कम का घाटा हो रहा है. इसमें पेट्रोल, डीजल और LPG के आयात पर खर्च शामिल है.'
जाहिर है, मध्यपूर्व एशिया में टकराव का भारत की तेल अर्थव्यवस्था पर बहुत गहरा असर पड़ा है. ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच अगले कुछ दिनों में टकराव रोकने को लेकर अगर समझौता फाइनल हो भी जाता है, तब भी इस संकट से उबरने में भारतीय तेल कंपनियों को कई महीने लग सकते हैं.
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