ईरान के साथ चल रही इजरायल और अमेरिका की जंग के बीच कच्चे तेल की कीमतें बेतहाशा बढ़ी है. PPAC के अनुसार, युद्ध से पहले जो तेल भारत को 69.01 डॉलर/बैरल के भाव मिल रहा था, वो आज की तारीख में 121.15 डॉलर/बैरल के करीब पड़ रहा है. घरेलू गैस की बात करें तो वो भी युद्ध के पहले की तुलना में 44 फीसदी तक महंगी हो चुकी है. बावजूद इसके LPG के एक सिलेंडर के लिए आपको 913 रुपये देने पड़ रहे हैं. ये बाकी देशों की तुलना में बहुत कम है.
रिपोर्ट्स की मानें तो आज की तारीख में आपको पेट्रोल कम से कम 118 रुपये/लीटर मिल रहा होता, जो कि करीब 95 रुपये/लीटर मिल रहा है. वहीं डीजल के लिए आपको 192 रुपये तक ज्यादा खर्च करना पड़ सकता था, जो कि आप महज 87-88 रुपये प्रति लीटर खरीद रहे हैं. पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, आपको पेट्रोल पर 24 रुपये/लीटर कम देने पड़ रहे हैं, जबकि डीजल पर तो प्रति लीटर करीब 105 रुपये तक की राहत मिल रही है.
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में भारी उछाल के बाद भी घरेलू स्तर पर आम आदमी की जेब पर इसका बोझ नहीं पड़ने दिया गया है.
कच्चे तेल में आग, पर भारत में राहत की ढाल
फरवरी 2026 में युद्ध शुरू होने से पहले भारतीय बास्केट के कच्चे तेल की औसत कीमत लगभग $69.01 प्रति बैरल थी. 1 अप्रैल 2026 के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, यह बढ़कर $121.15 प्रति बैरल तक पहुंच गई है. यानी कच्चे तेल की कीमतों में करीब 75% का उछाल आया है. इसके साथ ही भारतीय रुपया भी रिकॉर्ड निचले स्तर ₹95 प्रति डॉलर तक गिर गया है, जिससे तेल का आयात और भी महंगा हो गया है.
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के भाषण से पहले तेल की कीमतें गिर रही थीं, लेकिन गुरुवार को जंग पर उनके सख्त तेवर का असर मार्केट पर दिखा. बेंट क्रूड (Brent Crude) $99 के स्तर से अचानक करीब 4.7% उछलकर $105.95 पर पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड भी 3% से ज्यादा बढ़कर $103.19 पर ट्रेड कर रहा है. यानी भारतीय बास्केट का बोझ और ज्यादा बढ़ सकता है.

LPG का गणित- 380 रुपये सस्ता मिल रहा सिलेंडर
घरेलू रसोई गैस की कीमतों को लेकर भी सरकार ने स्थिति साफ की है. सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस में 44% की वृद्धि (मार्च में $542/MT से अप्रैल में $780/MT) के बावजूद 14.2 किलोग्राम के घरेलू सिलेंडर की कीमत ₹913 पर स्थिर रखी गई है. वहीं, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थियों को यह मात्र ₹613 में मिल रहा है.
सरकार ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों के मुकाबले तेल कंपनियां हर सिलेंडर पर 380 रुपये का नुकसान उठा रही हैं. मई के अंत तक यह कम्युलेटिव घाटा 40,484 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है. पड़ोसी देशों की तुलना करें तो भारत में 14.2 किलो वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतें सबसे कम हैं-
- भारत: 913 रुपये प्रति सिलेंडर
- पाकिस्तान: 1,046 रुपये प्रति सिलेंडर
- श्रीलंका: 1,242 रुपये प्रति सिलेंडर
- नेपाल: 1,208 रुपये प्रति सिलेंडर
(नोट: दूसरे देशों में सिलेंडर की जो मौजूदा दरें हैं, उन्हें रुपये/14.2 किलो में कन्वर्ट किया गया है और अनुमानित दरें दी गई हैं. )

हॉर्मुज संकट और भारत की नई रणनीति
दुनिया का लगभग 20-30% तेल और गैस का व्यापार हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होता है, जिसे युद्ध के कारण ईरान ने ब्लॉक कर दिया है. इस सप्लाई रूट के संकट से निपटने के लिए भारत ने अपनी रणनीति बदल दी है. खाड़ी देशों पर निर्भरता कम करने के लिए भारत अब अफ्रीकी देश अंगोला की कंपनी 'सोनानगोल' से LPG खरीदने की बात कर रहा है. इसके अलावा, भारत ने हाल ही में अमेरिका से 1.76 लाख टन गैस की ऐतिहासिक खरीद की है. साथ ही अल्जीरिया, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और नॉर्वे जैसे देशों से भी ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के विकल्पों पर तेजी से काम चल रहा है. होर्मूज के रास्ते भी टैंकर वाले हमारे कई जहाज भारत पहुंचे हैं और पहुंच रहे हैं.
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सरकार ने क्या किया कि आप पर नहीं पड़ रहा बोझ?
पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बुधवार को बताया कि केंद्र सरकार ने घरेलू ऊर्जा लागत को स्थिर करने और उपभोक्ताओं को अस्थिर अंतरराष्ट्रीय बाजार कीमतों से बचाने के लिए कई उपाय लागू किए हैं. ईंधन की कीमतों में अचानक वृद्धि को रोकने के लिए, अधिकारियों ने उत्पाद शुल्क कम किया और निर्यात शुल्क लागू किए ताकि देश में पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके. LPG के वैश्विक आयात मानकों में उल्लेखनीय वृद्धि के बावजूद, सरकार जनता में घबराहट को रोकने और पैनिक बाइंग रोकने के लिए आपूर्ति के स्थिर स्तर को प्राथमिकता दे रही है. इसके अलावा, प्रशासन PNG का तेजी से विस्तार कर रहा है और एक ही महीने में लाखों नए घरों को सफलतापूर्वक ग्रिड से जोड़ दिया है.
जिस तरह से वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और ईरान युद्ध के कारण उपजे संकट ने पूरी दुनिया में ऊर्जा क्षेत्र की कमर तोड़ दी है. इसके बावजूद भारतीय उपभोक्ताओं के लिए ये राहत भरी बात है.
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