दिल्ली, लखनऊ, पटना समेत देश के अलग-अलग शहरों में प्याज की कीमतें अचानक बढ़ने लगी है. कई बड़े शहरों में महीने भर पहले 30 से 40 रुपये किलो मिलने वाला प्याज 50 से 65 रुपये किलो तक बिक रहा है. प्याज की बढ़ती कीमतों पर काबू पाने के लिए सरकार ने अपना बफर स्टॉक बाजार में उतारने का फैसला लिया है. साथ ही 'कांदा एक्सप्रेस' चलाने का भी फैसला लिया है. चीनी के बाद प्याज की बढ़ी कीमतों ने जिस तरह परिवारों के किचन का बजट बढ़ा दिया है, उससे राहत दिलाने के लिए सरकार ये कदम उठा रही है. देश के जिन मंडियों में प्याज सस्ता है, वहां से प्याज माल ट्रेनों में भर कर उन शहरों तक भेजी जाएगी, जहां प्याज के दाम आसमान छू रहे हैं.
दिल्ली, चेन्नई, कोच्चि, गुवाहाटी तक फायदा
जैसे कि नासिक के लासलगांव में प्याज की कीमतें तेजी से गिर रही हैं, इसलिए यह तय किया गया है कि यहां से प्याज को उन इलाकों में भेजा जाए जहां कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. नागपुर की सब्जी मंडियों में भी प्याज 60 रुपये या उससे ज्यादा रुपये के भाव बिक रहा है, जबकि एक महीने पहले इसकी कीमत 20 रुपये प्रति किलो थी. अधिकारी अभी ये तय नहीं कर पाए हैं कि प्याज के इन रैक्स को किस ट्रेन में जोड़ा जाए. खबरों के मुताबिक, केंद्र सरकार नासिक से दिल्ली, चेन्नई, कोच्चि और गुवाहाटी तक कांदा एक्सप्रेस यानी प्याज ले जाने वाली ट्रेनें चलाने जा रही है, जहां कीमतें औसत से अधिक हैं.
45% तक महंगी हुई प्याज
उपभोक्ता मंत्रालय के आंकड़ों के मुताकि, प्याज की कीमतें पिछले महीने के मुकाबले 19% तक बढ़ गई हैं, जबकि पिछले साल के मुकाबले प्याज 45% तक महंगी हो गई है. बताया जा रहा है कि सरकार के पास पर्याप्त बफर स्टॉक है और वे इस प्याज को कम कीमतों पर चरणबद्ध तरीके से बाजार में जारी करेंगे. पिछले साल भी सहकारी संस्थाएं नैफेड (NAFED) और एनसीसीएफ (NCCF) के माध्यम से लोगों को सस्ते दामों पर प्याज उपलब्ध कराई गई थी.
उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो दिल्ली में प्याज की खुदरा कीमतें 65 रुपये/कलिो तक पहुंच गई हैं. पिछले साल अगस्त में भाव 35 रुपये था. चेन्नई में भी प्याज 60 रुपये के करीब पहुंच गया है. उत्तर पूर्व के कुछ शहरों में भी कीमतें 55 से 60 रुपये के करीब है.
क्यों बढ़े प्याज के दाम?
प्याज के दाम बढ़ने के पीछे की बड़ी वजह 'कम उत्पादन' को बताया जा रहा है. जानकारों का कहना है कि प्याज के सबसे बड़े उत्पादक राज्य, महाराष्ट्र में खरीफ प्याज के उत्पादन में 5-7% की गिरावट दर्ज की गई. अधिकारिक सूत्रों का ये भी कहना है कि कुछ व्यापारी जानबूझकर भी कीमतें बढ़ा देते हैं. बाजार में कमी दिखाकर भी दाम बढ़ाने के मामले पिछले कुछ वर्षों में कई बार देखने को मिले हैं.
देश में प्याज की कमी नहीं
हालांकि सरकार का ये कहना है कि आने वाले महीनों में प्याज की मांग को पूरा करने के लिए देश में पर्याप्त स्टॉक मौजूद हैं. NAFED और NCCF ने बफर स्टॉक के तौर पर इस वित्त वर्ष के लिए करीब 1.2 लाख टन प्याज की खरीदारी की है. मई में दोनों एजेंसियों ने प्याज का खरीद दाम 1,270 रुपये प्रति क्विंटल तय किया था, लेकिन खरीद में तेजी लाने के लिए पिछले हफ्ते इसे बढ़ाकर 2,645 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है.
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