अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की ओर से उस बिल को आगे बढ़ाने की मंजूरी दिए जाने के बाद वैश्विक व्यापार हलकों में हलचल तेज हो गई है, जिसके तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों (विशेषकर भारत) पर 100 फीसदी तक का टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है. इस अहम भू-राजनीतिक और आर्थिक मुद्दे पर NDTV से खास बातचीत में नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक लाहिड़ी ने दो टूक कहा है कि टैरिफ के मोर्चे पर फिलहाल गहरी अनिश्चितता बनी हुई है, लेकिन इस नीति का सबसे बड़ा नकारात्मक असर खुद अमेरिकी अर्थव्यवस्था और वहां के उपभोक्ताओं पर ही पड़ेगा.
अमेरिकी उपभोक्ताओं को ही भुगतना पड़ेगा खामियाजा
अशोक लाहिड़ी ने सवाल उठाया कि अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा लगाए जा रहे इन भारी-भरकम टैरिफ का भुगतान असल में कौन कर रहा है? उनका स्पष्ट मानना है कि इसका खामियाजा अंततः अमेरिकी उपभोक्ताओं को ही भुगतना पड़ता है. उन्होंने कहा कि अमेरिका में आयात करने वाले कारोबारियों ने भी 'रेसिप्रोकल टैरिफ' का पूरा फायदा अभी तक उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचाया है. ऐसे में यह एक बड़ा सवाल है कि क्या डोनाल्ड की यह आक्रामक टैरिफ नीति अन्य देशों के निर्यातकों को नुकसान पहुंचा रही है या फिर खुद अमेरिकी अर्थव्यवस्था को अधिक चोट दे रही है.
'हर चुनौती का समाधान करना होगा'
वैश्विक स्तर पर बढ़ रही इन अनिश्चितताओं के बीच भारत के लिए रणनीतिक कदम उठाना बेहद जरूरी हो गया है. नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने सुझाव दिया कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को जल्द से जल्द अंतिम रूप देना चाहिए. अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में पैदा हो रही उथल-पुथल से निपटने के लिए हमें समय रहते हर चुनौती का समाधान करना होगा. उन्होंने भारत सरकार से यह भी अनुरोध किया कि देश को किसी भी बुरे दौर या 'बैड सिनेरियो' के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए, हालांकि हमें उम्मीद और सकारात्मकता के साथ आगे बढ़ते रहना होगा.
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