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चीन का खेल खत्म! भारत 2 साल में ला सकता है 100% स्वदेशी फोन, एक भी पुर्जा नहीं होगा विदेशी

अगले 2 साल में 100% स्वदेशी 'Bharat' स्मार्टफोन लॉन्च हो सकता है. 35 हजार करोड़ के पार्ट्स चीन को निर्यात करने के बाद अब 2028 तक पूरी तरह मेड-इन-इंडिया फोन बनाने की तैयारी तेज हो गई है.

चीन का खेल खत्म! भारत 2 साल में ला सकता है 100% स्वदेशी फोन, एक भी पुर्जा नहीं होगा विदेशी
AI से बनी प्रतीकात्मक फोटो

भारतीय टेक जगत और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बड़ा बदलाव जल्द हमें देखने को मिल सकता है. देश में अगले दो सालों के भीतर पूरी तरह से भारत में मैन्युफैक्चर्ड स्मार्टफोन को बाजार में लॉन्च कर दिया जाएगा. इस फोन की सबसे बड़ी यूएसपी इसका हर एक छोटा-बड़ा हिस्सा पूरी तरह से स्वदेशी होगा और इसके मैन्युफैक्चर के लिए विदेशों से एक भी कंपोनेंट आयात नहीं किया जाएगा. सरकारी सूत्रों के अनुसार, ये पूरी तरह स्वदेशी स्मार्टफोन साल 2028 के अंत तक बनकर तैयार हो जाएगा. देश की दो या तीन बड़ी दिग्गज कंपनियां केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) के सहयोग और समर्थन के साथ इसके प्रोडक्शन पर बेहद तेजी से काम कर रही हैं.

अब तक कोई भी फोन पूरी तरह 'भारतीय' नहीं

आपको बता दें कि भारत में पहले भी मोबाइल फोन्स का मैन्युफैक्चर्ड होता रहा है. लेकिन हकीकत ये है कि उनके डिजाइन से लेकर उनके भीतर इस्तेमाल होने वाले जरूरी कंपोनेंट्स तक सब कुछ विदेशी हुआ करते हैं. कोरोना महामारी के बाद से Apple ने भारत में अपने आईफोन की असेंबलिंग का काम बड़े पैमाने पर शुरू किया. साथ ही दिग्गज कंपनी Samsung भी भारत में अपने फोन्स बना रही है. लेकिन तकनीकी रूप से आज भी बाजार में कोई ऐसा फोन मौजूद नहीं है जिसे पूरी तरह से 'भारतीय' कहा जा सके, क्योंकि इनके जरूरी पार्ट्स आज भी विदेशों से आयात किए जाते हैं.

चीन को मिलेगा करारा जवाब

सूत्रों के अनुसार, भारत सरकार ने इस स्वदेशी सपने को पूरा करने के लिए एक बेहद व्यवस्थित और चरणबद्ध रोडमैप तैयार किया है. पहले कदम के तहत भारत ने उन स्मार्टफोन पार्ट्स का मैन्युफैक्चर अपने देश में ही शुरू करना है जिन्हें हम लंबे समय से चीन से आयात करते आ रहे हैं. इतिहास में पहली बार भारत ने 35 हजार करोड़ रुपये के मोबाइल कंपोनेंट्स चीन को भेजे हैं. अब टारगेट मोबाइल में इस्तेमाल होने वाले बचे हुए सभी कंपोनेंट्स का उत्पादन भारत में ही शुरू करने का है.

कंपोनेंट्स के बाद भारत ने मोबाइल असेंबली लाइन्स को पूरी तरह से मजबूत किया है. इसके बाद सरकार का पूरा फोकस 'डिजाइन' पर है, ताकि आने वाले इस नए फोन की पूरी डिजाइनिंग और आर्किटेक्चर देश के भीतर ही तैयार की जा सके. अभी भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्मार्टफोन निर्माता देश बन चुका है, लेकिन अभी हमारा फोकस आयातित पुर्जों को एसेंबल तक ही सीमित है. सरकार का लक्ष्य अब इस असेंबली को 100% स्वदेशी विनिर्माण में बदलने का है.

अगर ऐसा हो जाता है तो वह दिन दूर नहीं, जब भारतीयों के हाथ में पूरी तरह से मेड-इन-इंडिया फोन होगा. इसमें चीन या किसी दूसरे देश के कंपोनेंट नहीं लगे होंगे. हालांकि, इसके लिए अभी थोड़ा इंतजार करना होगा. लगभग 2 साल बाद ऐसे फोन को लॉन्च किया जा सकता है. सरकार के एक बड़े अधिकारी ने एनडीटीवी को बताया कि ये फोन आईफोन से तीन या चार लेवल नीचे का फोन होगा. इसकी प्राइस रेंज इस तरह रखी जाएगी ताकि आम लोग इसे खरीद सकें. हालांकि, इसका ऑपरेटिंग सिस्टम गूगल का एंड्रॉयड होगा जो सबसे अधिक लोकप्रिय है. हालांकि अभी इसका नाम तय नहीं हुआ है पर इसके नाम को ‘भारत' से जोड़ा जा सकता है.

यह कदम राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ये फोन ऐसे समय लाने की योजना है जब 2029 का लोक सभा चुनाव सिर पर होगा. गौरतलब है कि लोक सभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी जनसभाओं में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को लेकर सवाल उठाते रहे हैं. वहीं आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने भी मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में भारत के पिछड़ने की बात कही है. ऐसे में भारत में ही बना सौ प्रतिशत स्वदेशी फोन एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर प्रचारित किया जा सकता है.

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