NDTV World Summit 2026: जेरोधा (Zerodha) के को-फाउंडर और फेमस इन्वेस्टर निखिल कामत ने बताया कि अगर उनकी कंपनी खत्म हो जाए और उनके पास सिर्फ 10 लाख रुपये बचें, तो वह नए सिरे से कैसे शुरुआत करेंगे. उन्होंने कहा कि वह कंटेंट क्रिएशन के जरिए अपना नया बिजनेस खड़ा करने के बारे में सोचेंगे. उनके मुताबिक, आज के दौर में कंटेंट बनाने और उसे ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने की ताकत किसी भी बिजनेस के लिए बड़ी मदद बन सकती है.
₹10 लाख बचे तो कंटेंट से करेंगे शुरुआत
NDTV World Summit 2026 में निखिल कामत से पूछा गया कि भगवान न करे अगर आज जेरोधा बंद हो जाए, उनके पास सिर्फ 10 लाख रुपये हों और पुराने कॉन्टैक्ट भी न हों, तो वह अगले दिन क्या करेंगे? इस पर कामत ने हंसते हुए कहा कि ऐसे में जिंदगी काफी मुश्किल होगी, लेकिन वह कंटेंट बनाने का काम शुरू करने के बारे में सोचेंगे.
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कोई भी कर सकता है कंटेंट क्रिएशन
उन्होंने कहा कि कंटेंट क्रिएशन उन कामों में से एक है, जिसे कोई भी शुरू कर सकता है. शुरुआत में इसके लिए कोई खर्च जरूरी नहीं है. अगर कंटेंट के जरिए लोगों तक पहुंच बन जाती है, तो उसके आधार पर कंज्यूमर बिजनेस समेत कई तरह के कारोबार शुरू किए जा सकते हैं.
AI के दौर में कंटेंट और पहचान जरूरी
इस बातचीत के दौरान उनसे यह भी पूछा गया कि क्या कंटेंट बनाने का बढ़ता चलन लोगों को मेहनत करने, नई स्किल सीखने और जरूरी तकनीकी कामों के लिए तैयार होने से दूर कर रहा है? इस पर कामत ने कहा कि AI और मैन्युफैक्चरिंग में बढ़ते ऑटोमेशन के साथ कंटेंट की समझ, अपनी पसंद और चीजों को समझने का नजरिया जरूरी होते जा रहे हैं. उनके मुताबिक, जब टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग आसानी से उपलब्ध होने लगती हैं, तो दूसरों से अलग पहचान बनाना और अपने प्रोडक्ट को लोगों तक पहुंचाना सबसे बड़ी ताकत बन सकता है.
बड़े ब्रांड के मुकाबले नए ब्रांड कैसे बना रहे जगह?
निखिल कामत ने बताया कि वह पहले HUL और ITC जैसी FMCG कंपनियों को लंबे समय तक ट्रैक करते थे. उनके मुताबिक, पिछले एक दशक में ऐसी कंपनियों की वैल्यूएशन के मल्टीपल में कमी आई है. वहीं, कंटेंट या अलग तरह के डिस्ट्रीब्यूशन के दम पर आगे बढ़ने वाले नए ब्रांड तेजी से अपनी जगह बना रहे हैं.उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी ज्यादा लोगों के लिए आसान होती जाएगी, वैसे-वैसे बिजनेस में अलग पहचान बनाना और भी जरूरी हो जाएगा.
10 लाख रुपये हो तो किस सेक्टर में लगाएं?
जब कामत से पूछा गया कि अगर किसी के पास 10 लाख रुपये हों, तो उसे लंबे समय के लिए किन सेक्टरों में मौके तलाशने चाहिए, तो उन्होंने कहा कि इसका जवाब देना आज के दौर में मुश्किल है.हालांकि, उन्होंने भारत में कम लागत पर मिलने वाले कर्मचारियों की मदद से विदेशों में बिजनेस करने का एक तरीका बताया.
उनके मुताबिक, भारत में एक इंजीनियर को हर महीने करीब 500 से 1,000 डॉलर में रखा जा सकता है.ऐसे में अगर इंसानी मेहनत को AI या दूसरी टेक्नोलॉजी के साथ जोड़कर कोई प्रोडक्ट या सर्विस बनाई जाए, तो विदेशी कस्टमर को सर्विस दी जा सकती है. कामत के मुताबिक, ऐसा मॉडल उन बाजारों में काम आ सकता है, जहां कर्मचारियों पर खर्च भारत के मुकाबले ज्यादा है.
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