म्यूचुअल फंड में निवेश के मामले में बिहार के लोगों का अंदाज सबसे अलग नजर आ रहा है. एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया यानी एम्फी (AMFI) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, ज्यादा रिटर्न की चाह में इक्विटी यानी शेयर बाजार में हाई-रिस्क वाले फंड्स में पैसा लगाने के मामले में बिहार पूरे देश में पहले पायदान पर पहुंच गया है.
यूपी-एमपी और राजस्थान से भी आगे
बिहार में म्यूचुअल फंड में लगी कुल रकम का 81 फीसदी हिस्सा अकेले इक्विटी (हाई-रिस्क) योजनाओं में है. इस मामले में बिहार ने पंजाब, राजस्थान, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों को भी पीछे छोड़ दिया है.
अमीरी नहीं, रिस्क लेने के मिजाज में बिहार नंबर-1
अक्सर यह माना जाता है कि बड़े राज्यों के लोग बाजार के रिस्क को बेहतर समझते हैं, लेकिन AMFI के आंकड़े बताते हैं कि रिस्क लेने के मामले में बिहार सबसे आगे है और देश में नंबर-1 है.
AMFI डेटा: किस राज्य के निवेशक कितना ले रहे हैं रिस्क?

इन आंकड़ों से साफ है कि बिहार के निवेशकों में हाई रिस्क लेने की इच्छा सबसे ज्यादा है. इसका मतलब यह नहीं कि हर बिहारी निवेशक ज्यादा जोखिम वाला फंड ही चुन रहा है, बल्कि कुल निवेशकों में जोखिम लेने का क्रेज दूसरे राज्यों की तुलना में ज्यादा देखने को मिला है. यह ट्रेंड इसलिए भी अहम है क्योंकि इन राज्यों में निवेशकों की संख्या और म्यूचुअल फंड बाजार का दायरा काफी बड़ा है.
यूपी में लखनऊ के बाद कानपुर का क्रेज
रिपोर्ट के अनुसार, यूपी में लखनऊ इक्विटी निवेश के मामले में सबसे आगे है. लखनऊ से म्यूचुअल फंड में कुल 60,437 करोड़ रुपए का निवेश है, जिसमें से 46,651 करोड़ रुपए इक्विटी योजनाओं में हैं. कानपुर 32,656 करोड़ रुपए के साथ दूसरे नंबर पर और वाराणसी 15,328 करोड़ रुपए के साथ तीसरे नंबर पर है.
युवाओं में ज्यादा रिटर्न की चाह में बढ़ रहा रिस्क लेने का ट्रेंड
इक्विटी फंड्स की तरफ लोगों का झुकाव इसलिए ज्यादा है क्योंकि इनमें अन्य स्कीमों के मुकाबले ज्यादा रिटर्न मिलने की संभावना होती है. लंबे समय तक पैसा लगाए रखने से बाजार में तेजी का पूरा फायदा मिलता है. यही वजह है कि अब युवा और नौकरीपेशा लोग पुरानी बैंक एफडी या सेविंग को छोड़कर ज्यादा मुनाफे के लिए रिस्क वाले फंड्स को ज्यादा पसंद कर रहे हैं.वे थोड़ा रिस्क उठाने से भी पीछे नहीं हट रहे हैं.
क्या बिना सोचे रिस्क लेना सही है?
एक्सपर्ट का मानना है कि हर किसी के लिए हाई रिस्क वाला फंड सही नहीं है. अगर कोई निवेशक ज्यादा जोखिम लेने को तैयार है, तो भी उसे बिना समझे किसी फंड में निवेश नहीं करना चाहिए. शेयर बाजार से जुड़े म्यूचुअल फंड्स में उतार-चढ़ाव हो सकता है और रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती.
इसलिए सिर्फ देखा-देखी में रिस्क लेना समझदारी नहीं है. इक्विटी म्यूचुअल फंड में बाजार के उतार-चढ़ाव का सीधा असर पड़ता है. इसलिए निवेश से पहले हमेशा अपनी कमाई, उम्र, फाइनेंश्यल गोल और रिस्क लेने की क्षमता को ध्यान में रखना चाहिए.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं