शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव के बीच एक तरफ जहां कई कंपनियां बिखर चुक हैं, वहीं पावर स्टॉकश्नाइडर इलेक्ट्रिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (Schneider Electric Infrastructure) ने अपने निवेशकों को जमकर मुनाफा कराया है. कंपनी ने पिछले 5 साल में अपने निवेशकों को 966% का छप्परफाड़ मल्टीबैगर रिटर्न दिया. यानी अगर किसी ने 5 साल पहले इस शेयर में 1 लाख रुपये का निवेश किया होता, तो उसका पोर्टफोलियो आज बढ़कर ₹10.66 लाख रुपये का हो चुका होता.
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि 10 गुना तक चढ़ चुके इस शेयर में क्या अभी भी तेजी का दम बाकी है.डेटा सेंटर, एआई-ग्रिड और रिन्यूएबल एनर्जी में बढ़ते फोकस के बीच जानिए क्या इस मल्टीबैगर शेयर में आगे भी पैसों की बारिश जारी रहेगी...
घाटे से उबरकर मुनाफे तक पहुंची कंपनी
कंपनी के बिजनेस में पिछले कुछ साल में बड़ा बदलाव आया है. FY21 में कंपनी को करीब 1 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था. वहीं, FY26 में कंपनी का शुद्ध मुनाफा (PAT) बढ़कर 213 करोड़ रुपये पहुंच गया.इस दौरान कंपनी की बिक्री भी करीब 2.5 गुना बढ़ी है. EBITDA में करीब 5 गुना बढ़ोतरी हुई है. कंपनी के मुताबिक, इस बदलाव में लागत कम करने, बिजनेस को बेहतर तरीके से चलाने और सही सेगमेंट पर फोकस बढ़ाने की अहम भूमिका रही है.
ऑर्डर बुक में भी मजबूत बढ़ोतरी
FY26 में कंपनी के लिए ऑर्डर बुक भी एक बड़ा पॉजिटिव रहा. कंपनी का ऑर्डर इनटेक 27.4% बढ़कर 3,430 करोड़ रुपये पहुंच गया. वहीं, वित्त वर्ष के अंत में ऑर्डर बैकलॉग 50.1% बढ़कर 1,911 करोड़ रुपये रहा.कंपनी को डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, ग्रिड मॉडर्नाइजेशन, रिन्यूएबल एनर्जी, मेट्रो और यूटिलिटी जैसे सेक्टरों से ऑर्डर मिले हैं. इससे कंपनी के बिजनेस को आगे बढ़ने का मौका मिल रहा है.
डेटा सेंटर और AI-ग्रिड से उम्मीदें
कंपनी अब सिर्फ पावर इक्विपमेंट बिजनेस पर फोकस नहीं कर रही बल्कि इसका इलेक्ट्रिफिकेशन, ऑटोमेशन और डिजिटलाइजेशन भी बढ़ा रही है.AI-बेस्ड ग्रिड मैनेजमेंट, डिजिटल सबस्टेशन, कनेक्टेड इक्विपमेंट और बैटरी एनर्जी स्टोरेज जैसे नए प्रोडक्ट्स पर भी कंपनी काम कर रही है. भारत में डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर और बिजली से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर में बढ़ता निवेश कंपनी के लिए बड़ा मौका बन सकता है.
मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने पर जोर
कंपनी वडोदरा और कोलकाता में अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ा रही है. इसका मकसद बढ़ती मांग को पूरा करना और सप्लाई चेन को मजबूत करना है.मैनेजमेंट के मुताबिक, कई क्षमता विस्तार योजनाएं 2027 और उसके बाद तक पूरी होने की उम्मीद है. इससे आने वाले वर्षों में कंपनी की बिक्री और ऑर्डर पूरा करने की क्षमता बढ़ सकती है.
मार्जिन और कमोडिटी महंगाई बड़ी चुनौती
हालांकि, कंपनी के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं. FY26 में EBITDA मार्जिन घटकर 13.4% रह गया, जो FY25 में 15.4% था.FY27 की जून तिमाही में भी कमोडिटी महंगाई, पुराने फिक्स्ड-प्राइस ऑर्डर और कम ऑपरेटिंग लीवरेज का असर मुनाफे पर पड़ा. कंपनी ने इन दबावों से निपटने के लिए कीमतों में बदलाव जैसे कदम उठाए हैं.
क्या आगे भी जारी रह सकती है तेजी?
कंपनी का बिजनेस टर्नअराउंड और मजबूत ऑर्डर बुक आगे की ग्रोथ की उम्मीद जरूर बढ़ाते हैं. लेकिन करीब 10 गुना रिटर्न दे चुके इस शेयर में आगे की तेजी अब कमाई के प्रदर्शन पर निर्भर करेगी.श्नाइडर इलेक्ट्रिक इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए अब सिर्फ नए ऑर्डर मिलना काफी नहीं होगा. इन ऑर्डर को समय पर पूरा करना, मार्जिन में सुधार लाना और नई मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का बेहतर इस्तेमाल करना जरूरी होगा. अब निवेशकों की नजर कंपनी की कमाई और आगे की ग्रोथ पर है.
(नोट- यह सिर्फ एक सामन्य जानकारी है. किसी भी शेयर में पैसे लगाने से पहले उस कंपनी के वैल्यूएशन, तिमाही नतीजों और बिजनेस की ग्रोथ पर नजर रखनी चाहिए.शेयर का पिछला रिटर्न भविष्य में भी ऐसा ही प्रदर्शन करने की गारंटी नहीं देता. इसलिए जरूरत हो तो एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें.)
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