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मेटा का सुबह 4 बजे का वो छंटनी वाला मेल...जब मैटरनिटी लीव पर गई मां की उड़ गई रातों की नींद

मेटा की एक महिला कर्मचारी ने अपनी कहानी बयां की है कि जब छंटनी का दौर चल रहा था तो किस तरह उन्होंने मैटरनिटी लीव पर टेशन में रहकर अपनी रातें काटीं.

मेटा का सुबह 4 बजे का वो छंटनी वाला मेल...जब मैटरनिटी लीव पर गई मां की उड़ गई रातों की नींद
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क्या अगले महीने मेरे पास नौकरी होगी? ये एक ऐसा सवाल है जो इस साल अप्रैल और मई में सैन फ्रांसिस्को के डेटा साइंस प्रोफेशनल के मन में आ रहा होगा. जब कोई महिला मां बनती है तो उसे अपने बच्चे को पालने के लिए कुछ सुकून के पल चाहिए होते हैं. लेकिन उस महिला की रातें नींद उड़ाने वाली और घबराहट में बीतीं. हालांकि वो खुशकिस्मत रहीं कि उनकी नौकरी उनके हाथ में थी. लेकिन उनकी पूरी 9 लोगों की टीम उनके जैसे लकी नहीं थी. एक ही झटके में पूरा डिपार्टमेंट निकाला जा चुका था. ये दर्दनाक दास्तां है मेटा में काम करने वाली मीरा (बदला हुआ नाम) की. 

सुबह 4 बजे आया कंपनी का मेल

मई के पहले हफ्ते में ही मेटा के कर्मचारियों को बता दिया था कि कंपनी एआई के लिए अपने आप को तैयार कर रही है. इसके लिए 8 हजार कर्मचारियों को निकाला जा रहा है. ये नंबर टोटल वर्कफोर्स का 10 फीसदी है. मेटा में काम करने वाली कर्मचारी मीरा ने बताया कि, "मैं पूरे समय बहुत डरी हुई थी. अगर मेरी नौकरी चली जाती, तो मुझे अपने बच्चे पर ध्यान देने से ज्यादा नई नौकरी तलाशने पर फोकस करना होता. अगर नौकरी नहीं मिलती तो मुझे फिर भारत वापस लौटना पड़ता."

सुबह 4 बजे मेल आने की हुई शुरुआत

20 मई को सुबह 4 बजे कंपनी से निकाले जाने का मेल कर्मचारियों के इनबॉक्स में आने लगा. सबसे पहले सिंगापुर के कर्मचारियों को भेजा गया फिर यूके से होता हुआ अमेरिका की बारी आई. हालांकि मीरा को ये मेल नहीं मिला. इससे वो 60 दिन के वीज क्लॉक से बच गईं. दरअसल H-1B वीजा वालों की अगर नौकरी चली जाए तो उन्हें 60 दिनों के अंदर नई नौकरी ढूंढ लेनी होती है या फिर देश को छोड़ देना होता है.

हालांकि मीरा की नौकरी तो बच गई लेकिन उन्हें इसकी एक बड़ी कीमत चुकानी पड़ी. मीरा की टीम निकाली जा चुकी थी, तो उनका मैनेजर का पद उनसे ले लिया गया. मेटा की पॉलिसी फ्लैटर ऑर्गनाइजेशन मॉडल यानी मैनेजर को छोड़ते हुए इंडिविजुअल कंट्रीब्यूटर के तौर पर फोकस करना, इसके तहत उन्हें इस पद पर डिमोट कर दिया गया. अभी फिलहाल वो दो महीने की मैटरनिटी लीव पर हैं. लेकिन वापस लौटने पर उनका क्या रोल रहेगा, इसके बारे में अभी तस्वीर साफ नहीं है.

मीरा ने बताया कि जब वो चार साल पहले मेटा में आईं थीं तो उन्हें पता था कि वो कहां काम करने जा रही हैं. मेटा शानदार वर्क कल्चर के लिए बल्कि अच्छी सैलरी के साथ करियर ग्रोथ के लिए जानी जाती थी. लेकिन कोविड के बाद सारी कहानी ही बदल गई. कोविड के समय जब देशों में लॉकडाउन लगा था, लोग घरों में कैद थे, तब मेटा के साथ कई टेक कंपनियों ने बल्क में हायरिंग की. लेकिन 2022 आते-आते एडवरटाइजर्स कंपनी से दूर होने लगे. इसके बाद कंपनी के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने कहा था कि कंपनी में शायद ऐसे बहुत से लोग हैं जो यहां होने के लायक नहीं हैं.

इसके बाद साल 2022 के नवंबर महीने में मेटा ने 11 हजार कर्मचारियों को बाहर निकाल दिया. तब जुकरबर्ग ने कहा कि मुझसे गलती हुई. लेकिन कर्मचारियों को निकालने की वो सिर्फ एक शुरुआत थी, पिछले 3 सालों में फायरिंग का ये आंकड़ा 30 हजार के पार जा चुका है.

क्या सच में AI की वजह से नौकरियां जा रहीं हैं?

मार्क जुकरबर्ग ने कहा कि ये छंटनी कंपनी के अस्तित्व के लिए जरुरी है. एआई भविष्य की तकनीक है और इसमें आगे रहने के लिए ये जरूरी है. हालांकि हर कोई इस बात से सहमत नहीं है. एनवीडिया के सीईओ जेन्सेन हुआंग का मानना है कि अभी एआई इस लेवल पर नहीं पहुंचा कि वो इसानों को पूरी तरह रिप्लेस कर दे. मीरा ने भी कहा कि अभी फिलहाल एआई काम नहीं छीन रहा, बल्कि इसका इस्तेमाल काम की स्पीड को बढ़ाने के लिए हो रहा है. पर अगर आंकड़ों को देखें तो अलग ही कहानी निकल कर आ रही है. मई 2026 की बात करें तो अमेरिका में 97 हजार से ज्यादा नौकरियां गईं. कंपनियों ने इसकी वजह एआई को ही बताया. 

इस पूरे घटनाक्रम के बाद मीरा ने कहा कि, "कॉर्पोरेट की नजर में कर्मचारी कभी भी बदले जा सकते हैं. इसलिए पर्सनल लाइफ और परिवार की जरूरत के आगे ऑफिस को रखना बिल्कुल भी ठीक नहीं है. नौकरी पर लौटने से पहले मुझे एक चुनाव करना था कि मैटरनिटी लीव का इस्तेमाल खुद को अपस्किल करने में करूं, जिससे नौकरी बचे रहे या फिर अपने बच्चे पर फोकस करूं. ऐसे में मैंने अपना ध्यान परिवार पर लगाने का फैसला किया है."

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