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JTL डिफेंस के शेयर ने एक साल में दिया 9,000% का रिटर्न, जानें- इस तेजी की असल कहानी

JTL डिफेंस लिमिटेड (JTL Defence Ltd) के शेयरों ने पिछले 1 साल में 9,000% से ज्यादा का तूफानी रिटर्न देकर निवेशकों को चौंका दिया है. दिवालियापन के संकट से निकलकर डिफेंस सेक्टर में तहलका मचाने वाली इस कंपनी में आई इस महा तेजी के 5 सबसे बड़े कारण जानिए इस रिपोर्ट में.

JTL डिफेंस के शेयर ने एक साल में दिया 9,000% का रिटर्न, जानें- इस तेजी की असल कहानी
JTL Defence Share ने पिछले एक साल के भीतर 9,000% से अधिक का अविश्वसनीय रिटर्न दिया है.
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JTL Defence Share Price: भारतीय शेयर बाजार (Share Bazar) में समय-समय पर ऐसे मल्टीबैगर स्टॉक्स सामने आते हैं, जो निवेशकों की किस्मत बदल देते हैं. इस समय ऐसा ही JTL डिफेंस लिमिटेड (JTL Defence Ltd.) नाम सुर्खियों में है. दरअसल, इस शेयर ने पिछले एक साल के भीतर 9,000% से अधिक का अविश्वसनीय रिटर्न दिया है. इस शेयर का 52 हफ्ते का लो 5.88 रुपये है. वहीं, इस वक्त ये शेयर 585 रुपये पर कारोबार कर रहा है. हालांकि, इससे पहले 616 रूपये का ऊपरी स्तर भी छू चुका है. 

इस शेयर की खास बात ये है कि इस शेयर ने 5.88 से 615 का स्तर एक- दोन दिन छोड़ दें तो लगातार अपर सर्किट के साथ तय किया है. यानी इसमें आम निवेशकों को शेयर के रफ्तार पकड़ने के बाद खरीदारी का मौका न के बराबर मिला है. दरअसल, अपर सर्किट के दौरान ज्यादा तर प्री-ट्रेडिंग के वक्त ही शेयर अपर सर्किट पर चला जाता है, जिसके बाद दिन भरके लिए शेयर में ट्रेड रोक दी जाती है, जिसकी वजह से आन निवेशकों को इस शेयर में खरीदारी का मौका बहुत ही कम मिलता है. 

इंट्रा डे में लगा लोअर सर्किट

JTL डिफेंस के शेयर की इंट्रा डे ट्रेड की बात करें, तो आज यानी सोमवार 13 जुलाई को शेयर में 4.99 प्रतिशत की गिरावट के साथ लोअर सर्किट लगा हुआ है. इंट्रा डे में यह शेयर 485.15 पर खुला, इसके बाद फिर दोबारा ऊपर की ओर नहीं गया. बिकवाली के दबाव की वजह से इस शेयर में दिनभर लोअर सर्किट लगा रहा. यानी जो लोग अपने मुनाफे को समेटने की सोच रहे हैं, उन्हें शेयर से बाहर निकलने का मौका नहीं मिला. अब देखना ये होगा कि मंगलवार को ये शेयर एक बार पिर से ऊपर की ओर जाता है या अपर सर्किट के बाद अब लोअर सर्किट की जद में आ जाता है. 

कभी दिवाली हो गई थी ये कंपनी

कभी कर्ज के दलदल में डूबी यह कंपनी इस वक्त रक्षा क्षेत्र (Defense Sector) की नई उभरती खिलाड़ी बन चुकी है. दरअसल, दिवालियापन (Insolvency) से बाहर निकलने और JTL ग्रुप की ओर से इसके अधिग्रहण के बाद से इस स्टॉक की किस्मत पूरी तरह बदल गई है. आइए विस्तार से समझते हैं वे 5 मुख्य कारण जिनकी वजह से इस शेयर में रॉकेट जैसी तेजी देखने को मिल रही है.

NCLT के बाद JTL इंडस्ट्रीज के अधिग्रहण से बदली किस्मत

यह कंपनी पहले RCI इंडस्ट्रीज एंड टेक्नोलॉजीज लिमिटेड के नाम से शेयर बाजार में लिस्टेड थी. भारी कर्ज और लगातार हो रहे घाटे की वजह से यह नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की दिवाला प्रक्रिया (Insolvency) से गुजर रही थी. इस संकट के समय स्टील पाइप सेक्टर की दिग्गज कंपनी JTL Industries ने इसे खरीद लिया. JTL ग्रुप ने इसमें 95% की भारी हिस्सेदारी हासिल की और इसका नाम बदलकर 'JTL डिफेंस लिमिटेड' कर दिया. इस बड़े ग्रुप का हाथ सिर पर आते ही कंपनी के प्रति बाजार का नजरिया बदल गया.

डिफेंस और ईवी (EV) जैसे हाई मार्जिन बिजनेस में एंट्री

JTL डिफेंस के पास अब हिमाचल प्रदेश के बद्दी स्थित प्लांट का पूरा मालिकाना हक है. इस प्लांट में कंपनी कॉपर और नॉन फेरस एलॉय के हाई प्रिसिजन कंपोनेंट्स तैयार कर रही है. ये कंपोनेंट्स राष्ट्रीय रक्षा के लिए बनने वाले गोला बारूद (Ammunition) और तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के कलपुर्जों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं. हाई मार्जिन वाले इस बिजनेस मॉडल की वजह से भविष्य में कंपनी का मुनाफा और तेजी से बढ़ने की उम्मीद है.

वित्तीय स्थिति में ऐतिहासिक सुधार 

JTL ग्रुप के कमान संभालते ही कंपनी के वित्तीय नतीजों में जादुई सुधार देखने को मिला. जो कंपनी लगातार घाटे में चल रही थी, उसने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया.  कंपनी ने सालाना आधार पर करीब 9,425% की रिकॉर्ड बढ़ोतरी के साथ यह ₹15.24 करोड़ पर पहुंच गया. इसके साथ ही पुराने सारे घाटों को पीछे छोड़ते हुए कंपनी ने ₹1.70 करोड़ का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया है. इसके अलावा, कंपनी का EBITDA मार्जिन करीब 22% रहा, जो इस सेक्टर की शुरुआत के लिहाज से बेहद दमदार माना जाता है.

ऑपरेशन वॉल्यूम में रिकॉर्ड बढ़ोतरी 

जनवरी 2026 से कंपनी ने अपने नए अवतार में कमर्शियल प्रोडक्शन की शुरुआत की. नए मैनेजमेंट के तहत मैन्युफैक्चरिंग क्षमता में लगातार इजाफा हो रहा है. हाल ही के Q1 FY 27 बिजनेस अपडेट के अनुसार, कंपनी का कुल प्रोसेसिंग वॉल्यूम पिछली तिमाही Q4 FY 26 के 217 मीट्रिक टन से 38.5% बढ़कर 300 मीट्रिक टन हो गया है. यह आंकड़े दर्शाते हैं कि जमीन पर कंपनी का कामकाज बहुत तेजी से रफ्तार पकड़ रहा है.

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प्रमोटर्स का अटूट भरोसा और मजबूत शेयरहोल्डिंग

दिवाला प्रक्रिया से बाहर आने के बाद कंपनी के प्रमोटर्स ने ओपन मार्केट से लगातार शेयर खरीदे हैं और अपनी हिस्सेदारी को सीधे 95% तक पहुंचा दिया है. दरअसल, शेयर बाजार का यह नियम है कि जब किसी कंपनी में प्रमोटर्स खुद अपना पैसा लगाते हैं और अधिकतम हिस्सेदारी रखते हैं, तो बाजार और आम निवेशकों का भरोसा उस स्टॉक पर कई गुना बढ़ जाता है. प्रमोटर्स का यह भरोसा ही शेयर को लगातार अपर सर्किट की ओर ले जा रहा है.

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नोट- ये एक सामान्य जानकारी है. शेयर में निवेश करने से पहले अपने फाइनेंसियल एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें. 

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