Israel-Iran War Impact: मिडिल ईस्ट में बढ़ते जियो पॉलिटिकल टेंशन ने ग्लोबली मार्केट में हलचल मचा दी है. इजरायल के ईरान पर किए हमले के बाद, ईरान की जवाबी कार्रवाई ने इस क्षेत्र को एक बड़े वॉर के मुहाने पर खड़ा कर दिया है. इस टकराव का सीधा और गहरा असर भारतीय निर्यातकों पर पड़ता दिख रहा है, जिन्हें अब लॉजिस्टिक्स और इंश्योरेंस प्रीमियम में बड़े इजाफे का डर सताने लगा है.
सप्लाई चेन पर संकट के बादल
शनिवार को भारतीय निर्यातकों ने कहा कि अगर यह तनाव लंबा खिंचता है, तो अमेरिका और यूरोप जाने वाले शिपमेंट पर बुरी तरह असर पड़ेगा. ईरान के कतर, कुवैत और यूएई में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमलों के बाद फारस की खाड़ी और लाल सागर जैसे अहम व्यापारिक मार्ग अब हाई-रिस्क जोन बन गए हैं.
निर्यातकों का कहना है कि युद्ध की स्थिति में जहाजों को लंबे रास्ते अपनाने पड़ेंगे, जिससे ट्रांसपोर्ट कॉस्ट बढ़ेगी. युद्ध वाले एरिया से गुजरने वाले जहाजों के लिए वॉर रिस्क प्रीमियम में रातों-रात इजाफा हो सकता है. इसके अलावा बंदरगाहों पर सेफ्टी चेक और रूट्स बदलने की वजह से शिपमेंट हफ्तों की देरी से पहुंचेंगे.

Israel-Iran War Impact
कच्चे तेल का गणित
एक्सपर्ट के अनुसार मिडिल ईस्ट सिर्फ एक केवल एक भौगोलिक ज्योग्राफिकल एरिया नहीं बल्कि दुनिया के लिए पावर लाइन है. टेंशन बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आना तय है. इसका असर ना केवल भारत के आयात बिल पर पड़ेगा, बल्कि लोकल लेवल पर इनपुट कॉस्ट बढ़ने से मैन्युफैक्चरिंग भी महंगा हो जाएगा.
निर्यातकों की मांग
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (FIEO) के सदस्यों का कहना है कि अभी के समय में स्टेबिलिटी को बनाए रखना अब एक बड़ी चुनौती है. अगर वॉर बढ़ता है, तो छोटे और मध्यम वर्गीय यानी एमएसएमई (MSMEs) के लिए अपने मार्जिन को बचा पाना मुश्किल होगा. सरकार से मांग है कि वे वैकल्पिक बिजनेस रूट्स के साथ लोन फैसिलिटी पर फोकस दें, जिससे इस परेशानी के दौर में भारतीय व्यापार सेफ रह सके.
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