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महंगाई का झटका! देश में खुदरा महंगाई बढ़कर 3.48% पहुंची, 100 वाली खाने की प्‍लेट 105 की हुई!

खाद्य महंगाई 4.2 फीसदी रही. यानी 100 रुपये वाली थाली, करीब 105 रुपये (104.20) की पड़ रही है. हालांकि इस महीने के दौरान आलू-प्‍याज, चने, मटर वगैरह सस्‍ते हुए, जबकि टमाटर की कीमतें 35.28 फीसदी तक बढ़ गईं.

महंगाई का झटका! देश में खुदरा महंगाई बढ़कर 3.48% पहुंची, 100 वाली खाने की प्‍लेट 105 की हुई!
CPI Inflation April 2026 Data: देश में महंगाई कितनी बढ़ गई?

देश में महंगाई के मोर्चे पर आम लोगों को थोड़ा झटका लगा है. वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच जहां दुनियाभर के देश भारी महंगाई से जूझ रहे हैं, वहीं भारत में भी महंगाई एक महीने के भीतर 3.40 से बढ़कर 3.48 फीसदी हो गई. केंद्रीय सांख्यिकी मंत्रालय ने मंगलवार को जो आंकड़े जारी किए हैं, उसके अनुसार नई CPI सीरीज पर आधारित देश की खुदरा महंगाई दर अप्रैल 2025 की तुलना में अप्रैल 2026 में बढ़कर 3.48 फीसदी दर्ज की गई. इसी महीने चांदी के आभूषण सबसे ज्‍यादा महंगे हुए. सिल्‍वर ज्‍वैलरी की कीमतों में 144.34 फीसदी का उछाल आया. वहीं दूसरी ओर सोने के आभूषण 40.72 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई.  

क्रमिक रूप से (Sequentially), अप्रैल में CPI महंगाई दर स्थिर रही क्योंकि पिछले मार्च के महीने में यह 3.4 फीसदी दर्ज की गई थी.

100 रुपये वाली थाली 105 रुपये की हो गई! 

अप्रैल में समग्र खाद्य महंगाई 4.2 फीसदी रही. यानी 100 रुपये वाली थाली, करीब 105 रुपये (104.20) की पड़ रही है. हालांकि इस महीने के दौरान आलू की कीमतों में 23.69 फीसदी तक की भारी गिरावट आई, जबकि प्याज 17.67 फीसदी सस्ता हो गया. महीने के दौरान चने और मटर की कीमतों में भी कमी आई. हालांकि, आंकड़ों से पता चला है कि टमाटर की कीमतें 35.28 फीसदी तक बढ़ गईं.

बिजली, गैस, तेल के मोर्चे पर राहत 

आवास, पानी, बिजली, गैस और अन्य ईंधन श्रेणी के लिए महंगाई की दर अप्रैल में 1.71 फीसदी पर कम बनी रही, जबकि मध्य पूर्व संघर्ष के कारण वैश्विक बाजारों में तेल की कीमतें बढ़ रही थीं, क्योंकि सरकार ने इस बढ़ोतरी का बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला.

इस बीच, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 2026-27 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित देश की महंगाई दर 4.6 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है, क्योंकि रबी की मजबूत फसल से निकट अवधि में खाद्य आपूर्ति की संभावनाओं को बढ़ावा मिला है, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईरान युद्ध के कारण तेल की बढ़ती कीमतों के बीच कुछ राहत प्रदान करता है.

क्‍या बोले केंद्रीय बैंक के गवर्नर?

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के मुताबिक, 'उच्च वैश्विक ऊर्जा कीमतों के प्रभाव के परिणामस्वरूप प्रीमियम पेट्रोल, एलपीजी और औद्योगिक उपयोग के लिए डीजल जैसे चुनिंदा ईंधनों की कीमतों में वृद्धि हुई है. दूसरी ओर, रबी की मजबूत फसल से निकट अवधि में खाद्य आपूर्ति की संभावनाओं को बल मिला है, जिससे कुछ राहत मिली है.'

RBI गवर्नर ने कहा कि इन सभी कारकों को ध्यान में रखते हुए, 2026-27 के लिए CPI महंगाई 4.6 फीसदी रहने का अनुमान है, जिसमें पहली तिमाही (Q1) 4.0 फीसदी, दूसरी तिमाही (Q2) 4.4 फीसदी, तीसरी तिमाही (Q3) 5.2 फीसदी, और चौथी तिमाही (Q4) 4.7 फीसदी पर रहेगी.

हालांकि, उन्होंने गौर किया कि पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण ऊर्जा की लगातार ऊंची कीमतें और संभावित अल नीनो (El Niño) स्थितियां (जो दक्षिण-पश्चिम मानसून पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं) महंगाई के लिए ऊपर की ओर जोखिम पैदा करती हैं.

मल्होत्रा ने कहा कि भारत की कोर महंगाई (Core Inflation), जिसमें खाद्य और ईंधन की कीमतें शामिल नहीं हैं, 2026-27 के लिए 4.4 फीसदी रहने का अनुमान है और कीमती धातुओं को छोड़कर यह और भी कम है, जो दर्शाता है कि अंतर्निहित महंगाई का दबाव सीमित रहने की उम्मीद है.

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