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मानसून में देरी के चलते जून में रिटेल इंफ्लेशन 4% के पार पहुंचा, खाने-पीने की चीजें हुईं महंगी

भारत में जून महीने के खुदरा महंगाई के आंकड़े सामने आ गए हैं. मई में 3.93% पर रहने वाली महंगाई जून में उछलकर 4.38% पर पहुंच गई है, जो अनुमान से ज्यादा है.

मानसून में देरी के चलते जून में रिटेल इंफ्लेशन 4% के पार पहुंचा, खाने-पीने की चीजें हुईं महंगी
जून में खाने-पीने की चीजें मई के मुकाबले महंगी हो गई हैं. ऐसे में ब्याज दरों में कमी की उम्मीद कम हो गई है.
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  • जून महीने में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.33 प्रतिशत हो गई, जो मई के मुकाबले अधिक है
  • ग्रामीण इलाकों में महंगाई का असर शहरी क्षेत्रों की तुलना में अधिक देखा गया, जून में ये 4.74 प्रतिशत रही
  • कपड़े, जूते, ट्रांसपोर्ट सर्विसेज, हाउसिंग और हेल्थ सर्विसेज की कीमतों में जून में सालाना आधार पर इजाफा हुआ है

आम आदमी की जेब पर महंगाई की मार एक बार फिर बढ़ती दिख रही है. जून महीने के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी खुदरा महंगाई के आंकड़े जारी हो गए हैं. मानसून में कमी के चलते ये आंकड़े आम जनता के साथ सरकार की चिंता बढ़ाने वाले हैं. जून में रिटेल इन्फ्लेशन बढ़कर 4.38% पर पहुंच गई है, जो कि मई महीने में 3.93% थी. ये उछाल ना केवल पिछले महीने से ज्यादा है, बल्कि बाजार के अनुमानों से भी ऊपर है. एक्सपर्ट्स ने जून में इसके 4.2% के आसपास रहने का अनुमान लगाया था.

थाली हुई महंगी

इस बार महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह खाने-पीने की चीजों के दामों में हुआ इजाफा है. आंकड़ों के अनुसार,

  • खाद्य महंगाई, मई के 4.78% से बढ़कर जून में 5.32% पर पहुंच गई
  • फूड एंड बेवरेज में सालाना आधार पर 5.05% की बढ़ोतरी दर्ज की गई

गांवों में महंगाई का असर ज्यादा

शहरी इलाकों के मुकाबले देश के गांव में महंगाई का असर ज्यादा देखने को मिला है. जून महीने में ग्रामीण महंगाई बढ़कर 4.74% हो गई है, जो मई में 4.25% के लेवल पर थी. 

इन चीजों पर दिखाई दिया असर

जून में सिर्फ खाने-पीने की चीजें ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा की कई दूसरी जरूरतें भी महंगी हो गईं. कपड़े और जूतों की कीमतों में सालाना आधार पर 3.23% की बढ़ोतरी हुई. वहीं, ट्रांसपोर्ट से जुड़ी सर्विस 4.31% महंगी हो गईं, जिससे लोगों का यात्रा खर्च बढ़ा है. घर से जुड़े खर्च, जैसे हाउसिंग और यूटिलिटी सर्विस में 1.99% की बढ़ोतरी हुई, जबकि हेल्थ सर्विस भी 1.42% महंगी हो गईं. यानी जून में आम लोगों को कई जरूरी खर्चों के लिए पहले से ज्यादा पैसे चुकाने पड़े हैं.

मानसून की देरी ने बिगाड़ा खेल

आमतौर पर जून के महीने में मानसून पूरे देश को कवर कर लेता है, लेकिन इस साल मानसून की चाल उम्मीद से धीमी रही है. कई बड़े कृषि प्रधान राज्यों में शुरुआती दौर में कम बारिश होने की वजह से फसलों की बुआई पर असर पड़ा है. मार्केट एक्सपर्ट का मानना है कि जब तक मानसून पूरी तरह एक्टिव होकर देश भर में अच्छी बारिश नहीं करता, तब तक फल, सब्जियों और अनाज की कीमतों में कमी आने की उम्मीद कम है.

ब्याज दरें कम होने की उम्मीद कम

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने खुदरा महंगाई दर को 4% रखने का टारगेट रखा है. मई में जब महंगाई दर 3.93% पर आई थी, तब उम्मीद थी कि आरबीआई आने वाले समय में ब्याज दरों में कटौती कर सकता है. लेकिन जून में महंगाई के दोबारा 4.38% पर पहुंचने से आरबीआई की परेशानी फिर बढ़ सकती हैं. ऐसी कंडीशन में, ब्याज दरों को कम करने का इंतजार और लंबा हो सकता है.

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