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स्पेस में भारत की तीसरी आंख, बादलों के पार भी देखेगा स्वदेशी 'Drishti' सैटेलाइट, जानें क्यों है खास

GalaxEye Drishti Satellite: GalaxEye के सीईओ सुयश सिंह ने बताया कि दृष्टि (Drishti) भारत का सबसे बड़ा प्राइवेट सेक्टर सैटेलाइट है, जिसका वजन करीब 170 किलो है.

स्पेस में भारत की तीसरी आंख, बादलों के पार भी देखेगा स्वदेशी 'Drishti' सैटेलाइट, जानें क्यों है खास

GalaxEye Drishti Satellite: भारत का प्राइवेट स्पेस सेक्टर तेजी से आगे बढ़ रहा है. देश दुनिया को अपना लोहा मनवाने के लिए तैयार है बेंगलुरु की स्पेस स्टार्टअप GalaxEye अपना सैटेलाइट दृष्टि (Drishti) लॉन्च करने जा रही है. ये सैटेलाइट 3 मई 2026 को दोपहर 12:29 बजे अमेरिका के कैलिफ़ोर्निया से SpaceX के Falcon 9 रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में भेजा जाएगा. इस लॉन्च के साथ ही GalaxEye भारत के प्राइवेट स्पेस सेक्टर में नया इतिहास बनाने की तैयारी में है. एनडीटीवी से खास बातचीत में GalaxEye के सीईओ सुयश सिंह ने इस मिशन के बारे में बताया कि आखिर ये सैटेलाइट भारत के लिए गेम चेंजर क्यों है.

GalaxEye Drishti Satellite

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Drishti सैटेलाइट क्या है?

GalaxEye के सीईओ सुयश सिंह ने बताया कि दृष्टि (Drishti) भारत का सबसे बड़ा प्राइवेट सेक्टर सैटेलाइट है, जिसका वजन करीब 170 किलो है. इसके जरिए भारत में पहली बार मल्टी स्पेक्ट्रल कैमरा इस्तेमाल होगा.मल्टी स्पेक्ट्रल कैमरा एक ऐसा कैमरा होता है जो नॉर्मल कैमरे से ज्यादा देखता है. साथ ही इसमें सिंथेटिक अपर्चर रडार (SAR - Synthetic Aperture Radar) है, जो बादलों के पार देख सकता है. दोनों कैमरा और सेंसर एक ही प्लेटफॉर्म पर इस्तेमाल पूरी दुनिया में पहली बार हो रहे हैं. इस तकनीक की जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि वेस्ट कंट्री के मुकाबले भारत बादलों से ज्यादा घिरा हुआ है. इसी वजह से मानसून में पिक्चर मिलने में बड़ी समस्या आती है. इसी समस्या को दूर करने के लिए कैमरा और रडार का इस्तेमाल एक साथ किया है.

GalaxEye Drishti Satellite

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Drishti भारत का बनाया हुआ एक प्राइवेट सैटेलाइट है, जो अंतरिक्ष से पृथ्वी को देखने के लिए इस्तेमाल होता है. इसे आप अंतरिक्ष में लगा एक कैमरा समझ सकते हैं. ये कैमरा सिर्फ फोटो नहीं खींचता, बल्कि फोटो देखकर खुद समझता भी है कि उसमें क्या है. इस सैटेलाइट का वजन करीब 170 किलो है और इसे पूरी तरह भारत में ही बनाया गया है. Drishti में कैमरा और रडार दोनों लगे हैं. 

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Drishti सैटेलाइट की क्या खासियत है?

  • अमूमन सैटेलाइट या तो कैमरा इमेजिंग करते हैं या फिर रडार इमेजिंग. लेकिन दृष्टि इन दोनों को एक ही प्लेटफॉर्म पर ले आया है.
  • अक्सर मानसून या खराब मौसम में सामान्य सैटेलाइट तस्वीरें नहीं ले पाते, लेकिन दृष्टि का रडार बादलों के पार देख सकता है.
  • ये सैटेलाइट सूरज की रोशनी पर डिपेंड नहीं है. यानी अंधेरे में भी उतनी ही साफ तस्वीरें लेगा जितनी दिन के उजाले में.
  • इसके दोनों सेंसर ऑप्टिकल और रडार 1.5 मीटर के हाई-रेजोल्यूशन के जरिए जमीन पर मौजूद छोटी से छोटी चीज को देख पाएगा.
GalaxEye Drishti Satellite

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'हम सभी उत्साहित'

सैटेलाइट बनाने की यात्रा पर बात करते हुए GalaxEye के सीईओ सुयश सिंह ने कहा कि ये सफर मजेदार रहा. 5 साल का इसमें समय लगा. हमने रिसर्च पहले ड्रोन पर की, इसके बाद एयक्राफ्ट पर की और अब आखिरकार वो सैटेलाइट आ रहा है तो हम सभी उत्साहित हैं.

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लेखक के बारे में
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पल्लव बागला
Science Editor
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