भारत की मजबूत आर्थिक विकास दर और पहली तिमाही के जीडीपी (GDP) आंकड़ों को लेकर राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है. दिल्ली में बेल्जियम के प्रधानमंत्री के साथ एक संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया कि वैश्विक उथल-पुथल और सप्लाई चेन की अनिश्चितताओं के बीच भी भारतीय अर्थव्यवस्था ने अपनी रफ्तार बनाए रखी है और देश ने पहली तिमाही में 7.8% की शानदार ग्रोथ दर्ज की है.
विपक्ष और पूर्व वित्त सचिव के सवाल
प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब विपक्षी दलों और पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने जीडीपी के इन आंकड़ों को लेकर सवाल खड़े किए हैं. गुरुवार को हुई वित्त मामलों पर संसद की स्थायी समिति की बैठक में भी यह मुद्दा जोर-शोर से उठाया गया. सूत्रों के अनुसार, बैठक में एक विपक्षी सांसद ने कहा कि आंकड़ों को लेकर असमंजस की स्थिति है और सरकार को इस पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए.
सरकार अधिकारिक स्पष्टीकरण दे: RSP सांसद
एनडीटीवी से बातचीत करते हुए आरएसपी (RSP) के लोकसभा सांसद एनके. प्रेमचंद्रन ने कहा कि सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा 7.8% ग्रोथ बताए जाने के विपरीत पूर्व वित्त सचिव ने इसे 2.6% आंका है, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हुई है.
उन्होंने आशंका जताई कि इस विवाद से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि प्रभावित हो सकती है, इसलिए सरकार को इस पर आधिकारिक स्पष्टीकरण देना चाहिए.

सरकार का रुख और आर्थिक स्थिति
दूसरी ओर, सरकार और इसके समर्थकों का मानना है कि नए बेस ईयर और आधुनिक गणना पद्धतियों के आधार पर जारी किए गए ये आंकड़े देश की वास्तविक आर्थिक प्रगति को दर्शाते हैं. वैश्विक चुनौतियों के बावजूद घरेलू मांग, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और मजबूत मैन्युफैक्चरिंग के दम पर भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया में सबसे तेजी से आगे बढ़ने वाले प्रमुख बाजारों में बनी हुई है.
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