New Income Tax Rules: साल 2026 देश के करोड़ो टैक्सपेयर्स के लिए कई मौर्चों पर बड़े बदलाव लेकर आया है. इनकम टैक्स एक्ट बदलने से कई नियम करदाताओं के लिए आसान बन गए हैं. ऐसे में आप भी हर साल बैंक ब्याज, रेंट या डिविडेंड पर कटने वाले टीडीएस (Tax Deducted at Source) को लेकर परेशान थे, तो ये खबर आपकी इस परेशानी को काफी हद तक कम करेगी. दरअसल इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने टैक्स नियमों को बदलते हुए पुराने फॉर्म 15G और 15H को हटा दिया है. अब इनकी जगह एक नया फॉर्म 121 (Form 121) लाया गया है. इस खबर में आपको बताते हैं कि कौन से टैक्सपेयर्स इसे भर पाएंगे, साथ ही इसके दायरे में क्या-क्या आएगा.
फॉर्म 121 क्या है?
फॉर्म 121 एक ऐसा फॉर्म है जिसमें कोई व्यक्ति खुद ये बताता है कि उसकी साल भर की कमाई इतनी कम है कि उस पर टैक्स नहीं लगता. ये फॉर्म बैंक को दिया जाता है, जिससे वे उसकी कमाई से टीडीएस ना काटें.
क्यों हुई 15G और 15H की छुट्टी?
पहले ये जानिए पुराने फॉर्म की छुट्टी कर इस नए फॉर्म को लाने की जरूरत क्यों पड़ी. अब तक 60 साल से कम उम्र के लोगों को 15G और सीनियर सिटीजन्स को 15H फॉर्म भरना पड़ता था. दो अलग-अलग फॉर्म की वजह से अक्सर लोग कंफ्यूज रहते थे और कई बार गलत फॉर्म भर देते थे, जिसकी वजह से बैंक उनका टीडीएस काट लिया करते थे. सरकार ने इस प्रोसेस को आसान और पूरी तरह से डिजिटल बनाने के लिए फॉर्म 121 लॉन्च किया है. अब 18 साल से लेकर 100 साल के बुजुर्ग, सभी के लिए यही एक यूनिवर्सल फॉर्म काम करेगा.
कौन भर सकता है ये फॉर्म?
नए नियमों के अनुसार कोई भी भारतीय निवासी और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) इस फॉर्म को भर सकते हैं. बशर्ते कुल सालाना इनकम टैक्स छूट की सीमा से कम होनी चाहिए. अगर आपकी कमाई टैक्स के दायरे में नहीं आती, तो आप इस फॉर्म को भरकर अपनी इनकम पर टीडीएस कटने से रोक सकते हैं.
कैसे करेगा टैक्सपेयर्स की मदद?
फॉर्म 121 के जरिए एफडी या बचत खाते पर मिलने वाला ब्याज, अगर रेंट से इनकम होती है और वो फिक्स लिमिट से ऊपर है, शेयर्स या म्यूचुअल फंड से मिलने वाला डिविडेंड और बीमा पॉलिसी की मैच्योरिटी पर मिलने वाले अमाउंट पर टीडीएस से बच सकते हैं.
अप्रैल में ही क्यों भरना जरूरी?
नया वित्त वर्ष शुरू हो चुका है. टैक्स एक्सपर्ट्स की सलाह है कि इस फॉर्म को इसी महीने यानी अप्रैल में ही जमा कर दें. अगर आप देरी करते हैं और बैंक को फॉर्म नहीं मिलता, तो वो आपकी इनकम पर 20% तक टीडीएस काट सकते हैं. एक बार टैक्स कट जाने के बाद उसे वापस पाने का इकलौता तरीका आईटीआर फाइल करना ही बचता है, जिसमें महीनों का समय लग सकता है.
डिजिटल और स्मार्ट हुआ सिस्टम
नया फॉर्म 121 पूरी तरह डिजिटल है. इसमें यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर (UIN) और ऑटो-फिल जैसी खासियत शामिल है. इसका मतलब कि अगर आप ई-पोर्टल पर इसे भरते हैं, तो आपकी बेसिक जानकारी पहले से ही भरी हुई आएगी. ये कदम मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस की दिशा में एक बड़ा सुधार माना जा रहा है.
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