बैंक के ग्राहकों के लिए नवंबर की शुरुआत में कामकाज से जुड़ी परेशानी हो सकती है.आईडीबीआई बैंक के अधिकारियों और कर्मचारियों ने निजीकरण और कनाडा की कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को हिस्सेदारी बेचने के विरोध में 2 और 3 नवंबर 2026 को देशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है. यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (UFBU) ने भी इस आंदोलन का समर्थन किया है और अपने सदस्यों से विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है. ऐसे में इन दो दिनों में बैंकिंग सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका है.
2 और 3 नवंबर को क्यों हो रही है बैंक हड़ताल?
आईडीबीआई बैंक के अधिकारियों और कर्मचारियों के संगठन ने बैंक मैनेजमेंट को हड़ताल का नोटिस दिया है. यह दो दिन की देशव्यापी हड़ताल होगी, जिसमें बैंक की सभी शाखाओं और कार्यालयों के कर्मचारी शामिल हो सकते हैं. यूनियन का विरोध सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की बैंक में हिस्सेदारी बेचने के फैसले को लेकर है.
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UFBU ने भी दिया IDBI कर्मचारियों का साथ
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (UFBU) ने आईडीबीआई बैंक के अधिकारियों और कर्मचारियों की हड़ताल को समर्थन दिया है. संगठन ने 22 अक्टूबर को जारी पत्र में अपने सदस्यों से विरोध कार्यक्रमों में शामिल होने और एकजुटता दिखाने की अपील की.
सरकार के 51% हिस्सेदारी के वादे का मुद्दा
यूनियन ने दिसंबर 2003 में संसद में दिए गए उस आश्वासन का भी हवाला दिया है, जिसमें तत्कालीन वित्त मंत्री जसवंत सिंह ने आईडीबीआई में सरकार की कम से कम 51% हिस्सेदारी बनाए रखने की बात कही थी. यह आश्वासन संसद में दर्ज हुआ था और बाद में कमेटी ऑन एश्योरेंस को भी इसकी जानकारी दी गई थी. 2005 में आईडीबीआई बैंक को मूल संस्थान में मिला दिया गया और 2008 में इसका नाम आईडीबीआई बैंक रखा गया.
कर्मचारियों की क्या हैं मांगें?
यूनियन ने सरकार से प्रस्तावित बिक्री रोकने और एलआईसी से या बाजार के जरिए कम से कम 6% हिस्सेदारी खरीदकर सरकार की हिस्सेदारी 51% तक बनाए रखने की मांग की है. साथ ही कर्मचारियों की नौकरी की शर्तें, पेंशन, वेतन, दूसरी सुविधाएं और आरक्षण नीति सुरक्षित रखने के लिए लिखित कानूनी आश्वासन मांगा है. यूनियन चाहती है कि वेतन संशोधन और पेंशन से जुड़े मौजूदा नियम जारी रहें. अगर बिक्री होती है, तो कर्मचारियों को सरकारी बैंकों में जाने का विकल्प मिले और उनकी सेवा अवधि, पद, वरिष्ठता, वेतन और रिटायरमेंट लाभ सुरक्षित रहें. आउटसोर्स और कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों को भी बैंक में शामिल करने की मांग की गई है.
यूनियन ने चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है. इसमें लंबी या अनिश्चितकालीन हड़ताल भी शामिल हो सकती है.
हड़ताल से पहले सरकार ने दिया भरोसा
DIPAM के सचिव अरुणिश चावला ने कहा है कि आईडीबीआई बैंक बिक्री के बाद भी मौजूदा कर्मचारियों की सेवा शर्तों को ऐसे बदला नहीं जा सकता जिससे उन्हें उनके नुकसान है. उन्होंने कहा कि कर्मचारियों और पेंशनर्स को डरने की जरूरत नहीं है. पेंशन के लिए अलग फंड रखा गया है और पहले से किए गए वादे पूरे किए जाएंगे.उन्होंने यह भी साफ किया कि आईडीबीआई बैंक राष्ट्रीयकृत बैंक नहीं है. यहां कर्मचारियों की सेवा शर्तें सरकार नहीं, बल्कि बैंक का बोर्ड कर्मचारियों से बातचीत करके तय करता है.
2 और 3 नवंबर को बैंक के कामकाज पर असर
2 और 3 नवंबर को हड़ताल के कारण शाखाओं में चेक क्लीयरेंस, नकद लेनदेन और अन्य सेवाओं पर असर पड़ सकता है. ऐसे में अगर आप आईडीबीआई बैंक के ग्राहकों हैं तो आपके लिए जरूरी है कि आप अपने बैंकिंग काम पहले निपटा लें.
यह भी पढ़ें | IDBI Bank की बिक्री का रास्ता साफ! वित्त मंत्रालय का बड़ा बयान- 60.72% हिस्सेदारी बेचने पर कोई कानूनी रोक नहीं
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