Financial Planning to Buy a Flat in NCR: 32 साल के राहुल शर्मा पिछले 7 साल से दिल्ली की एक प्राइवेट कंपनी में सीनियर एसोसिएट हैं. पिछले कुछ महीनों से वो प्रॉपर्टी वेबसाइट्स और ब्रोशर्स के पन्नों में उलझे हुए हैं. हर महीने बैंक खाते में आने वाली 60,000 रुपये की इन-हैंड सैलरी उनके लिए काफी तो पड़ती है, लेकिन जब भी वो अपना 'घर' लेने की सोचते हैं तो NCR में आसमान छूती प्रॉपर्टी की कीमतें उनके हौसले पस्त कर देती हैं. राहुल का ये सोचना लाजिमी है कि क्या आज के दौर में इतनी सीमित आय के साथ अपने घर की चाबी हासिल की जा सकती है? और ये केवल राहुल की दिक्कत नहीं, बल्कि NCR में काम कर रहे उनके जैसे लाखों युवाओं की चिंता है.
पहली नजर में ये मुश्किल लगता है, लेकिन ऐसे ही फॉर्मल बातचीत के दौरान जब हमने रियल एस्टेट और फाइनेंशियल सेक्टर्स के एक्सपर्ट्स से बातचीत की तो सभ ने सही जगह के चुनाव, सटीक बजटिंग और एक व्यवस्थित होम लोन स्ट्रैटजी की जरूरत बताई. सभी से करीब एक से डेढ़ घंटे की बातचीत का लब्बोलुआब यही निकला कि 60,000 रुपये की सैलरी में भी राहुल जैसे लाखों युवा अपने आशियाने का सपना हकीकत में बदल सकते हैं.
सबसे पहला कदम: EMI और आय का गुणा-गणित
घर खरीदने की पूरी प्रक्रिया में जो सबसे बुनियादी बात समझनी जरूरी है, वो है आपकी एफॉर्डिबिलिटी (Affordability) यानी पेमेंट करने की आपकी क्षमता. फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स की सलाह है कि किसी भी नौकरीपेशा व्यक्ति को घर खरीदने के उत्साह में आकर अपनी पूरी सैलरी को EMI के जाल में नहीं फंसाना चाहिए.
हरियाणा के एक बड़ी इंडस्ट्री फर्म में ACFO रह चुके CA अमित कुमार कहते हैं, 'सुरक्षित वित्तीय संतुलन बनाए रखने के लिए ये थंब रूल हमेशा याद रखें कि आपकी कुल मासिक EMI आपकी नेट इन-हैंड इनकम के 35% से 40% से ज्यादा कभी नहीं होनी चाहिए.'
यानी अगर आपकी मासिक सैलरी 60,000 रुपये है, तो होम लोन की किस्त को हर हाल में 22,000 से 25,000 रुपये के बीच ही सीमित रखना समझदारी का फैसला होगा. इससे भविष्य में आपके दैनिक खर्चों, मेडिकल इमरजेंसी और अन्य जरूरी बचतों पर कोई अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता है.

फाइनेंशियल बैलेंस के इस रूल पर अंसल हाउसिंग के डायरेक्टर कुशाग्र अंसल भी अपनी राय रखते हैं. वे कहते हैं,
कितना महंगा फ्लैट लेना रहेगा सही?
50, 55, 60 या 70 हजार वाले आय वर्ग के लिए बेहतर है कि वे 40 से 45 लाख रुपये तक का बजट फ्लैट चुनें. अमित कुमार के मुताबिक, मान लीजिए कि आप 45 लाख रुपये की एक प्रॉपर्टी पसंद करते हैं, तो आपको उसका कम से कम 20% हिस्सा यानी लगभग 9 लाख रुपये डाउन पेमेंट के रूप में खुद की बचत से चुकाना चाहिए. इसके बाद शेष 36 लाख रुपये की राशि आप होम लोन के तौर पर बैंक से ले सकते हैं.
यदि आप 20 वर्ष की अवधि के लिए मौजूदा औसत ब्याज दरों (लगभग 8.5%) पर यह लोन लेते हैं, तो आपकी मंथली EMI करीब 31,000 रुपये के आसपास आएगी, जो थोड़ी अधिक लग सकती है. लेकिन यदि आप अपनी पुरानी सेविंग्स से डाउन पेमेंट का हिस्सा और बढ़ाकर लोन अमाउंट को 30 लाख रुपये तक ले आते हैं, तो आपकी EMI आसानी से 25,000 रुपये के आरामदायक दायरे में आ जाएगी.
इसके उलट, अगर आप सीधे 50-55 लाख रुपये के बड़े फ्लैट पर हाथ डालते हैं और 40 लाख रुपये से ऊपर का लोन लेते हैं, तो 35,000 रुपये से अधिक की EMI आपकी पूरी मासिक वित्तीय व्यवस्था को अस्त-व्यस्त कर सकती है.

क्रेडिट स्कोर का कमाल और आसान पेमेंट प्लान
वर्तमान में भारतीय स्टेट बैंक (SBI), HDFC बैंक, ICICI बैंक और एक्सिस बैंक कंपटीटिव रेट्स पर होम लोन ऑफर कर रही हैं. हालांकि, इन दरों का पूरा फायदा उठाने के लिए आपका क्रेडिट स्कोर (CIBIL Score) बेहद मजबूत होना चाहिए. यदि आपका क्रेडिट स्कोर 750 या उससे अधिक है, तो बैंक आपको सबसे कम उपलब्ध ब्याज दर पर लोन दे सकते हैं, जिससे पूरे 20 साल की लोन अवधि के दौरान आपकी जेब से जाने वाले लाखों रुपये की सीधी बचत होती है.
इसके अलावा, आज के दौर में घर खरीदारों के लिए बाजार में भुगतान के कई आसान विकल्प भी मौजूद हैं. निम्बस ग्रुप के CEO साहिल अग्रवाल इस बदलाव को समझाते हुए कहते हैं,
NCR के इन इलाकों में मिलेंगे बेहतरीन विकल्प
यदि आपका बजट 35 लाख से 45 लाख रुपये के बीच है, तो दिल्ली के मुख्य इलाकों में घर तलाशना व्यावहारिक नहीं होगा. इसके बजाय आपको दिल्ली से सटे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के उन इमर्जिंग माइक्रो-मार्केट्स की तरफ रुख करना चाहिए, जो तेजी से विकसित हो रहे हैं.
इन क्षेत्रों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह रैपिड रेल (RRTS), मेट्रो विस्तार और नए एक्सप्रेसवे के जरिए दिल्ली और मुख्य कमर्शियल हब्स से सीधे जुड़े हुए हैं. यहां स्कूल, अस्पताल और शॉपिंग सेंटर्स जैसी सामाजिक बुनियादी सुविधाएं पहले से ही तैयार हो रही हैं, जिससे भविष्य में प्रॉपर्टी की कीमतों में अच्छी मूल्य वृद्धि (Capital Appreciation) की प्रबल संभावनाएं हैं.

सर्वोत्तम इंडिया के डायरेक्टर संचित जैन इन इलाकों की क्षमता पर अपनी राय रखते हुए बताते हैं, 'मेट्रो विस्तार, एक्सप्रेसवे, नई सड़क परियोजनाओं और व्यावसायिक केंद्रों के विकास ने कई नए माइक्रो-मार्केट्स को पहली बार घर खरीदने वालों के लिए आकर्षक बना दिया है. नौकरीपेशा लोगों को अपने बजट के अनुरूप प्रोजेक्ट चुनने के साथ-साथ डेवलपर की विश्वसनीयता, कानूनी स्वीकृतियों, निर्माण गुणवत्ता और भविष्य की कनेक्टिविटी पर विशेष ध्यान देना चाहिए. सही प्रोजेक्ट में किया गया निवेश केवल रहने की जरूरत पूरी नहीं करता, बल्कि समय के साथ कैपिटल ग्रोथ और बेहतर क्वालिटी ऑफ लाइफ का मजबूत आधार भी बनता है.'
...और चलते-चलते
पूरी बातचीत में जो काम की बात निकलकर सामने आई, उसे शॉर्ट में ऐसे समझ सकते हैं कि
- 60,000 रुपये की सैलरी के साथ घर खरीदने का फैसला भावनाओं में बहकर नहीं, बल्कि ठंडे दिमाग से कैलकुलेट कर लिया जाना चाहिए.
- बैंक से बड़ा लोन मंजूर होने का मतलब यह नहीं है कि आपको उतना बड़ा कर्ज उठा ही लेना चाहिए.
- हमेशा अपनी बचत, कैश पेमेंट, भविष्य की पारिवारिक जिम्मेदारियों को दिल-दिमाग में रखना जरूरी है.
- कम से कम 6 महीने की EMI के बराबर एक इमरजेंसी फंड का इंतजाम करने के बाद ही डील फाइनल करें तो बेहतर रहेगा.
उचित डाउन पेमेंट, अनुशासित फाइनेंशियल प्लानिंग और NCR के किफायती इलाकों का चयन कर, आप भी बिना किसी आर्थिक तनाव के अपने सपनों के आशियाने की चाबी बहुत जल्द हासिल कर सकते हैं.
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