Gold Price: सोना लगातार गिर रहा है. मिडिल ईस्ट के घटनाक्रम के बाद इसकी कीमतों में गिरावट लगातार जारी है. हालांकि बीच-बीच में हल्की तेजी कीमतों में देखी जा रही है, पर सस्ते होने की दर कहीं अधिक ज्यादा है. ऐसे में निवेशकों के दिमाग में एक सवाल लगातार घूम रहा है कि अभी इस गिरावट पर खरीद लें या उठा-पटक के इस दौर में दूरी ही बनाए रखें. साथ ही अगर खरीदें तो स्टॉप लॉस से लेकर सपोर्ट के जरूरी लेवल्स क्या रह सकते हैं. इन्हीं सब सवालों के जवाब हमनें कमोडिटी एक्सपर्ट से जानने की कोशिश की है. उनकी राय हम इस खबर में आपको बताते हैं.
जनवरी से अब तक कितना सस्ता हुआ सोना?
जनवरी से सोने की कीमतें अपने ऑल टाइम हाई लेवल पर थीं. अभी तक उस स्तर से सोना करीब 25% तक टूट चुका है. ग्लोबल मार्केट में इसके दाम 4,200 डॉलर प्रति औंस से नीचे चले गए हैं. वहीं भारत के एमसीएक्स मार्केट की बात करें तो यहां 10 ग्राम सोने के भाव 1,47,239 पर आ गए हैं, जो जनवरी में 1.80 लाख के लेवल तक जा पहुंचा था.
क्या गिरावट पर सोना खरीद लेना चाहिए?
एक्सपर्ट के अनुसार अभी लंबी अवधि में सोना काफी मजबूत है. दुनिया भर के सेंट्रल बैंक इसमें लगातार खरीदारी कर रहे हैं. साथ ही ग्लोबल मार्केट में बढ़ते कर्ज की वजह से इसकी डिमांड कम होती नहीं दिख रही है. अर्था भारत इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स IFSC LLP के मैनेजिंग पार्टनर सचिन सावरीकर के अनुसार, सोने में आई गिरावट का मतलब ये बिल्कुल नहीं है कि कमोडिटी मार्केट में कुछ खराबी है. बल्कि ये साइक्लिकल प्रेशर है. हालांकि इसका निचला स्तर क्या होगा, इसके बारे में कुछ नहीं सकते. लेकिन जो निवेशक कम से कम 5 साल के लिए अपने पोर्टफोलियो में इसे रखना चाहते हैं, उनके लिए एंट्री करने का ये समय बहुत अच्छा है.
सोने के तकनीकी आंकड़े जान लीजिए
कोटक सिक्योरिटीज के अनुसार MCX गोल्ड अगस्त वायदा के लिए निचला स्तर 1,51,792 रुपये से 1,51,236 रुपये और सपोर्ट के लिए 1,49,438 रुपये प्रति 10 ग्राम अहम लेवल हैं. अगर मार्केट यहां से सुधरता है तो ऊपरी लेवल 1,53,590 रुपये से 1,54,146 के बीच वहीं रेजिस्टेंस 1,55,146 रुपये प्रति 10 ग्राम पर दिख सकता है.
क्यों सस्ता हो रहा है लगातार सोना?
मार्केट के एक्सपर्ट के अनुसार इस गिरावट के पीछे एक नहीं बल्कि कई वजह हैं. गिरावट के सवाल पर अर्था भारत इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स IFSC LLP के मैनेजिंग पार्टनर सचिन सावरीकर ने बताया कि, मिडिल ईस्ट की वजह से कच्चे तेल की कीमतें महंगी हुईं, इससे कई देशों में महंगाई की आशंक बढ़ गई थी, जिसका असर सोने पर नेगेटिव रूप में दिखा. इसके अलावा अमेरिकी डॉलर का लगातार मजबूत होना, अमेरिका में ब्याज दरों के बढ़ने से सोने पर प्रेशर बना रहा. जब भी डॉलर मजबूत होता है तो निवेशक कमोडिटी मार्केट से पैसा निकालकर डॉलर इंडेक्स में निवेश करना शुरू कर देते हैं. वहीं ब्याज दरों के बढ़ने से सोने को अपने पास रखने से निवेशकों की लागत बढ़ जाती है, जिससे वो इसे बेचकर डॉलर या सरकारी बॉन्ड की तरफ चले जाते हैं.
कुल मिलाकर, एक्सपर्ट की बातों का निचोड़ देखें तो यही है कि शॉर्ट टर्म के निवेशकों के लिए अभी सोने से दूरी बनाना ही बेहतर है. वहीं अगर आपका प्लानिंग 5 साल ये इससे ज्यादा सोना होल्ड करने की है तो आप फ्रेश एंट्री मौजूदा भाव पर कर सकते हैं.
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