Gold investment: बढ़ती सोने की कीमतों के बीच अब निवेशकों का भरोसा तेजी से Gold ETF की तरफ बढ़ रहा है. अप्रैल महीने में गोल्ड ईटीएफ में निवेश 34% उछलकर ₹3,040.3 करोड़ पर पहुंच गया है. AMFI के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, निवेशकों ने बाजार में उतार-चढ़ाव और ग्लोबल टेंशन के माहौल में गोल्ड को सिक्योर इन्वेस्टमेंट ऑप्शन माना है. खास बात यह है कि अब लोग फिजिकल गोल्ड खरीदने के बजाय डिजिटल तरीके से सोने में निवेश को ज्यादा पसंद कर रहे हैं.
अप्रैल में Gold ETF में निवेश 34% उछला
AMFI डेटा के मुताबिक, अप्रैल में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में कुल निवेश बढ़कर ₹3.22 लाख करोड़ पहुंच गया. एक्टिव इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में ₹38,440.20 करोड़ का नेट इनफ्लो आया. फ्लेक्सी-कैप फंड्स ₹10,147.85 करोड़ के निवेश के साथ सबसे आगे रहे. वहीं स्मॉल-कैप फंड्स में ₹6,885.90 करोड़ और मिड-कैप फंड्स में ₹6,551.40 करोड़ का निवेश आया. बड़ी कंपनियों वाले लार्ज-कैप फंड्स में भी ₹2,524.61 करोड़ का निवेश दर्ज किया गया.
खास बात यह है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और वैश्विक अनिश्चितता के कारण निवेशकों का भरोसा सोने पर बढ़ा है, जिससे Gold ETF में निवेश महीने-दर-महीने आधार पर 34% उछलकर ₹3,040.3 करोड़ पर पहुंच गया.
क्या है Gold ETF?
गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) सोने में निवेश करने का एक डिजिटल तरीका है. इसमें आपको फिजिकल गोल्ड नहीं मिलता, बल्कि आप ऐसी यूनिट्स खरीदते हैं जो सोने की कीमत को ट्रैक करती हैं. आमतौर पर Gold ETF की एक यूनिट 1 ग्राम 24 कैरेट सोने के बराबर मानी जाती है. इसे शेयर बाजार में खरीदा और बेचा जाता है, ठीक वैसे ही जैसे किसी कंपनी के शेयर की ट्रेडिंग होती है.
Gold ETF में लोग क्यों जमकर लगा रहे पैसा?
सोने की बढ़ती कीमतों ने आम खरीदारों की चिंता बढ़ा दी है क्योंकि फिजिकल गोल्ड खरीदने पर बढ़े हुए रेट के साथ GST और मेकिंग चार्ज भी देना पड़ता है. वहीं गोल्ड ईटीएफ में न मेकिंग चार्ज देना पड़ता है और न ही स्टोरेज की चिंता होती है. इसमें चोरी का भी कोई डर नहीं रहता. यही वजह है कि निवेशक तेजी से गोल्ड ईटीएफ की ओर बढ़ रहे हैं.
Gold ETF में निवेश कैसे करें?
Gold ETF में निवेश करना बेहद आसान है. इसके लिए आपके पास डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट होना जरूरी है. इसके बाद आप अपने ट्रेडिंग ऐप पर जाकर Gold ETF सर्च कर सकते हैं और अपनी पसंद की यूनिट्स खरीद सकते हैं. निवेश की शुरुआत ₹500 से ₹1,000 जैसी छोटी रकम से भी की जा सकती है.
Gold ETF शेयर बाजार में लिस्टेड होता है और इसकी कीमत सीधे सोने के भाव से जुड़ी रहती है. जब सोने की कीमत बढ़ती है तो Gold ETF यूनिट की कीमत भी बढ़ जाती है. वहीं कीमत गिरने पर इसकी वैल्यू भी कम हो जाती है. जब निवेशक इसे बेचते हैं तो उन्हें उस समय के सोने के रेट के हिसाब से पैसा मिलता है.
फिजिकल गोल्ड से कैसे ज्यादा फायदेमंद?
फिजिकल गोल्ड खरीदने पर आपको GST और मेकिंग चार्ज देना पड़ता है, लेकिन बेचते समय यह पैसा वापस नहीं मिलता. यानी आपका खर्च बढ़ जाता है. जबकि Gold ETF में ऐसा कोई अतिरिक्त खर्च नहीं होता. यही वजह है कि लंबे समय में Gold ETF फिजिकल गोल्ड के मुकाबले ज्यादा फायदे का सौदा साबित हो सकता है.
इन Gold ETF ने दिया 50% से ज्यादा का रिटर्न
Gold ETF का रिटर्न पूरी तरह सोने की कीमतों पर निर्भर करता है. पिछले कुछ समय में कई Gold ETFs ने शानदार रिटर्न दिया है. Nippon India Gold ETF ने करीब 57% रिटर्न दिया, जबकि ICICI Prudential Gold ETF ने लगभग 55% और HDFC Gold ETF ने करीब 52% का रिटर्न दिया है. औसतन कई Gold ETFs ने 50% से ज्यादा का रिटर्न निवेशकों को दिया है.
Gold ETF में निवेश से पहले समझें क्या है रिस्क
हालांकि Gold ETF सुरक्षित निवेश विकल्प माना जाता है, लेकिन इसमें भी जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं होते. इसका रिटर्न पूरी तरह सोने की कीमतों पर निर्भर करता है. अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड की कीमतें गिरती हैं तो निवेशकों को नुकसान भी हो सकता है. इसके अलावा शेयर बाजार में ट्रेडिंग होने की वजह से इसमें बाजार का उतार-चढ़ाव भी असर डालता है.
Gold ETF पर टैक्स कैसे लगता है?
Gold ETF से होने वाले मुनाफे पर टैक्स भी देना पड़ता है. अगर निवेशक कम समय में खरीद-बिक्री करते हैं तो उस पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स लग सकता है. वहीं लंबे समय तक निवेश रखने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लागू होता है. टैक्स के नियम निवेश की अवधि और मौजूदा टैक्स व्यवस्था के हिसाब से तय होते हैं.
क्यों बढ़ रहा है निवेशकों का भरोसा?
अमेरिका-ईरान तनाव जैसे वैश्विक हालात और बाजार में अनिश्चितता के बीच निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्प तलाश रहे हैं. यही वजह है कि भारत ही नहीं, दुनियाभर में Gold ETFs में निवेश बढ़ रहा है. World Gold Council के मुताबिक अप्रैल में ग्लोबल Gold ETFs में भी $6.6 बिलियन का निवेश आया, जिसमें यूरोपीय फंड्स सबसे आगे रहे.
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