मिडिल ईस्ट में जारी जंग ने पूरी दुनिया के एनर्जी मार्केट में खलबली मचा दी है. पिछले 21 दिनों से चल रहे इस युद्ध का सीधा असर भारत की जेब पर पड़ रहा है. चूंकि भारत अपनी जरूरत का 85% कच्चा तेल विदेशों से मंगवाता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतें सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गई हैं. हालांकि, इस संकट के बीच भारत ने अपनी सप्लाई को सुरक्षित रखने के लिए 'प्लान-बी' एक्टिवेट कर दिया है.
18 साल पुराना रिकॉर्ड टूटने के करीब कच्चा तेल
पेट्रोलियम मंत्रालय के PPAC की ताजा रिपोर्ट डराने वाली है. मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण 18 मार्च 2026 को भारतीय बास्केट के कच्चे तेल की औसत कीमत US$ 146.39 प्रति बैरल के ऊंचे स्तर पर पहुंच गई. यह आंकड़ा 2008 के उस रिकॉर्ड के करीब है जब ब्रेंट क्रूड 147 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा था. फरवरी 2026 में औसत कीमत महज 69.01 डॉलर थी, यानी मार्च में कीमतें 65.30% तक बढ़ चुकी हैं.
ग्लोबल सप्लाई चेन बाधित, 49% महंगा हुआ ब्रेंट ऑयल
युद्ध की वजह से समुद्री रास्तों से होने वाली सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है. शुक्रवार को भी ब्रेंट ऑयल फ्यूचर्स की कीमत 107 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रही. अगर पिछले एक महीने के आंकड़ों को देखें, तो ब्रेंट ऑयल की कीमतों में करीब 49% का उछाल आ चुका है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में मची इस अफरा-तफरी का असर भारत के इम्पोर्ट बिल पर साफ दिख रहा है.
भारत का 'मास्टरस्ट्रोक', सुरक्षित है क्रूड सप्लाई
इस संकट के बीच पेट्रोलियम मंत्रालय ने देश को भरोसा दिलाया है कि भारत की क्रूड सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित है. भारत की हर दिन की खपत 55 लाख बैरल है. मंत्रालय के मुताबिक, सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता और पर्याप्त स्टॉक के साथ काम कर रही हैं. पेट्रोल और डीजल का भी बैकअप तैयार रखा गया है ताकि देश में ईंधन की कोई किल्लत न हो.
बदले समुद्री रास्ते, चीन जा रहा तेल टैंकर मुड़ा भारत की ओर
भारत ने सप्लाई को सुरक्षित रखने के लिए 'Strait of Hormuz' पर अपनी निर्भरता कम कर दी है. अब 70% से ज्यादा कच्चा तेल दूसरे समुद्री रास्तों से आ रहा है, जो पहले 55% था. इसी बीच बड़ी खबर यह है कि चीन जा रहा रूसी तेल टैंकर एक्वा टाइटन (Aqua Titan) भारत की ओर मोड़ दिया गया है. इसमें 7.7 लाख बैरल कच्चा तेल है, जो 21 मार्च को न्यू मंगलौर बंदरगाह पहुंचेगा. इससे पहले 18 मार्च को जहाज 'जग लाडकी' भी मुंद्रा पोर्ट पहुंच चुका है.
21 दिनों में तेल लेकर पहुंचे 4 भारतीय जहाज
28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से भारत सरकार ने वैकल्पिक व्यवस्थाओं को तेज कर दिया है. पिछले 21 दिनों में चार भारतीय ध्वज वाले जहाज तेल और गैस का बड़ा स्टॉक लेकर भारत पहुंच चुके हैं. सरकार 40 अलग-अलग देशों से तेल आयात कर रही है ताकि किसी एक क्षेत्र में युद्ध होने पर सप्लाई चेन पूरी तरह ठप न हो.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं