अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने गुरुवार को कहा कि भारत की आर्थिक प्रगति में पिछले कई दशकों से पश्चिमी और दक्षिणी राज्यों की बड़ी भूमिका रही है, लेकिन अब देश के अगले विकास चरण के लिए नए आर्थिक केंद्रों का उभरना जरूरी है. उन्होंने कहा कि भारत की अगली ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की वृद्धि के लिए पूर्वी भारत का उदय आवश्यक है और इस दृष्टि से पश्चिम बंगाल की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है.
बंगाल के रणनीतिक महत्व पर जोर
इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईसीसी) के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अदाणी समूह के चेयरमैन ने कहा, "भारत की अगली ट्रिलियन डॉलर वृद्धि के लिए पूर्व को उठना होगा. विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में बंगाल की भूमिका अनिवार्य है और मेरी नजर में भारत में शायद ही कोई दूसरा राज्य है, जिसके पास बंगाल जैसे रणनीतिक लाभ हों."
भौगोलिक स्थिति को बताया बड़ी ताकत
उन्होंने कहा कि बंगाल की भौगोलिक स्थिति इसे देश के सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक केंद्रों में बदल सकती है. राज्य के पश्चिम में ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे खनिज एवं औद्योगिक क्षेत्र हैं, जबकि उत्तर और पूर्व में पूर्वोत्तर भारत का प्रवेश द्वार स्थित है. वहीं बंगाल की खाड़ी के माध्यम से दक्षिण-पूर्व एशिया और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के तेजी से बढ़ते बाजारों तक सीधी पहुंच मिलती है.
गौतम अदाणी ने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर के नजरिए से बंगाल केवल एक राज्य या बाजार नहीं है, बल्कि एक रणनीतिक राष्ट्रीय केंद्र है, जिसमें विशाल संभावनाएं मौजूद हैं और अदाणी समूह इसी दृष्टिकोण से राज्य के भविष्य को देखता है.
1 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश की घोषणा
उन्होंने पश्चिम बंगाल में बड़े निवेश की घोषणा करते हुए कहा कि आने वाले 10 वर्षों में अदाणी समूह राज्य में 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश करने का इरादा रखता है. यह निवेश बंदरगाह, लॉजिस्टिक्स, बिजली उत्पादन, बिजली पारेषण एवं वितरण, सड़क, पुल, रोपवे, ग्रीन सीमेंट और हाइपरस्केल डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में किया जाएगा.
विकास का पैमाना लोगों के जीवन पर प्रभाव
अदाणी ने कहा कि विकास को केवल कार्गो वॉल्यूम, मेगावाट, टन या टेराबाइट जैसे आंकड़ों से नहीं मापा जाना चाहिए. विकास का वास्तविक पैमाना लोगों के जीवन पर पड़ने वाला प्रभाव होता है. इसी सोच के तहत अदाणी समूह न्यू टाउन में 2,000 बिस्तरों वाले विश्वस्तरीय 'अदाणी आरोग्य मंदिर' की स्थापना के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि अस्पताल के आधे बिस्तर उन लोगों के लिए आरक्षित होंगे, जो गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का खर्च वहन नहीं कर सकते.
सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर भी फोकस
उन्होंने आगे कहा कि बंगाल के भविष्य के निर्माण के साथ-साथ उसकी सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण भी उतना ही जरूरी है. बंगाल की पहचान उसके घाटों, साहित्य, स्थापत्य कला, त्योहारों और सांस्कृतिक आत्मविश्वास से जुड़ी हुई है. इसी भावना के तहत अदाणी समूह प्रतिष्ठित कुमारटुली घाट के पुनरुद्धार, बंगाल के कलाकारों को समर्पित विशेष दुर्गा पूजा कार्यक्रम, मां दुर्गा की विरासत को वैश्विक स्तर तक पहुंचाने के प्रयासों तथा ऐतिहासिक राइटर्स बिल्डिंग के संरक्षण में भी सहयोग करेगा.
बंगाल को दूसरी कर्मभूमि बनाने की इच्छा
अपने उद्यमी सफर को याद करते हुए गौतम अदाणी ने कहा कि 30 वर्ष पहले पश्चिम भारत का मुंद्रा उनकी पहली कर्मभूमि बना था. आज वह उसी विनम्रता और जिम्मेदारी की भावना के साथ यह कामना करते हैं कि पूर्व में बंगाल उनकी दूसरी कर्मभूमि बने. उन्होंने कहा, "बंगाल को गुजरात बनने की जरूरत नहीं है. बंगाल को अपने सबसे मजबूत स्वरूप में विकसित होना चाहिए, अपनी भौगोलिक स्थिति, बौद्धिक क्षमता, औद्योगिक विरासत और देश को दिशा देने की ऐतिहासिक क्षमता के आधार पर."
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