Fuel Price Hike: मिडिल ईस्ट संकट और कच्चे तेल की सप्लाई पर बढ़ते दबाव के बीच पूरी दुनिया में एनर्जी सिक्योरिटी को लेकर चिंता बढ़ गई है. कई देशों ने पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने के लिए फ्यूल राशनिंग यानी ईंधन कोटा सिस्टम लागू करना शुरू कर दिया है. भारत में फिलहाल ऐसा कोई फैसला नहीं हुआ है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचाने की अपील, काफिलों में कटौती, RBI गवर्नर की तेल कीमतों पर चिंता और सरकार के लगातार एनर्जी सिक्योर करने के बीच ‘फ्यूल राशनिंग' चर्चा का बड़ा विषय बन गया है.
ऐसे में जानिए क्या है फ्यूल राशनिंग, यह कैसे काम करती है और क्या मिडिल ईस्ट संकट के चलते आपकी गाड़ी के पेट्रोल पर भी लिमिट लगने वाली है?
Fuel Rationing क्या होती है?
फ्यूल राशनिंग का मतलब है कि सरकार पेट्रोल, डीजल या गैस की खरीद पर लिमिट तय कर देती है. यानी कोई व्यक्ति अपनी जरूरत से ज्यादा ईंधन नहीं खरीद सकता. सरकार हर वाहन या नागरिक के लिए एक तय कोटा निर्धारित करती है.यह लिमिट हफ्ते या महीने के हिसाब से तय की जा सकती है. इसके लिए QR Code सिस्टम, कूपन, डिजिटल पास या Odd-Even जैसे नियम लागू किए जाते हैं.
आसान शब्दों में कहें तो अगर फ्यूल राशनिंग लागू होती है, तो लोग अपनी मर्जी के मुताबिक अनलिमिटेड पेट्रोल-डीजल नहीं खरीद पाएंगे.
किन देशों में लागू हो चुका है Fuel Quota System?
मिडिल ईस्ट संकट और एनर्जी सप्लाई में रुकावट के बाद कई देशों ने पेट्रोल-डीजल पर लिमिट लगाई है.
पाकिस्तान में एक बार में सिर्फ 5 लीटर तेल
पाकिस्तान में हालात और ज्यादा गंभीर हैं. वहां कई जगहों पर एक बार में केवल 5 लीटर पेट्रोल देने की सीमा तय की गई है. साथ ही सरकारी कर्मचारियों के लिए 4 दिन वर्किंग वीक लागू किया गया है ताकि ईंधन की बचत हो सके.
श्रीलंका में QR Code से मिल रहा पेट्रोल
श्रीलंका में ‘नेशनल फ्यूल पास' सिस्टम लागू किया गया है. यहां QR Code के जरिए पेट्रोल दिया जा रहा है. कारों के लिए हफ्ते में 15 से 25 लीटर और बाइक के लिए केवल 5 लीटर पेट्रोल तय किया गया है.
फ्रांस और जर्मनी में भी लगी लिमिट
तेल संकट का असर यूरोप में भी दिख रहा है. फ्रांस के कुछ इलाकों में QR Code के जरिए लोगों को हफ्ते में 15-20 लीटर तक पेट्रोल दिया जा रहा है. जर्मनी में कुछ जगहों पर एक बार में सिर्फ 10 लीटर पेट्रोल देने की सीमा लागू की गई है.
बांग्लादेश और म्यांमार में भी पाबंदियां
बांग्लादेश ने फ्यूल बचाने के लिए स्कूलों को ऑनलाइन मोड में शिफ्ट किया और लोड शेडिंग शुरू की है.वहीं, म्यांमार में Odd-Even सिस्टम के जरिए पेट्रोल दिया जा रहा है.
स्लोवेनिया और केन्या ने भी उठाए कदम
स्लोवेनिया ने प्राइवेट ड्राइवरों के लिए हफ्ते में 50 लीटर का कोटा तय किया है. वहीं केन्या ने घरेलू सप्लाई बचाने के लिए तेल निर्यात पर रोक लगा दी है.

पेट्रोल-डीजल को लेकर PM Modi ने लोगों से की ये अपील
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में लोगों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने की अपील की थी. उन्होंने कहा था कि...
- जहां संभव हो मेट्रो और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करें
- कारपूलिंग अपनाएं
- इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग बढ़ाएं
- वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा दें
- गैर-जरूरी विदेशी यात्रा टालें
इसके बाद PM Modi समेत कई बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और नेता भी अपने काफिलों में गाड़ियों की संख्या कम करने लगे हैं.
PM Modi और अन्य नेताओं ने कैसे घटाया फ्यूल इस्तेमाल?
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने काफिले का साइज कम किया है और जहां संभव हो इलेक्ट्रिक वाहनों को शामिल करने को कहा है.
- यूपी CM योगी आदित्यनाथ ने काफिले में 50% वाहन कम करने के निर्देश दिए
- मध्य प्रदेश CM मोहन यादव ने न्यूनतम गाड़ियों के इस्तेमाल की बात कही
- दिल्ली CM रेखा गुप्ता ने सरकारी वाहनों पर लिमिट लगाने का ऐलान किया
- महाराष्ट्र के डिप्टी CM एकनाथ शिंदे ने EV इस्तेमाल शुरू किया
- गुजरात के राज्यपाल ने ट्रेन और पब्लिक ट्रांसपोर्ट से यात्रा करने का फैसला लिया
क्या बढ़ने वाले हैं पेट्रोल-डीजल के दाम? RBI गवर्नर ने कही ये बड़ी बात
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि अगर वेस्ट एशिया संकट लंबे समय तक जारी रहता है तो सरकार को पेट्रोल-डीजल की बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर डालना पड़ सकता है.उन्होंने कहा कि भारत ऊर्जा आयात पर काफी निर्भर है और तेल-गैस सप्लाई में रुकावट का असर अब दिखने लगा है.
भारत के पास कितना तेल और गैस स्टॉक है?
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के मुताबिक भारत के पास फिलहाल 60 दिनों का कच्चे तेल का स्टॉक और 60 दिनों का LNG बैकअप है. इसके साथ ही 45 दिनों का LPG स्टॉक मौजूद है.उन्होंने कहा कि इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के 90 दिन के मानक के मुकाबले भारत के पास कुल 76 दिनों का ऊर्जा भंडार है.
तेल कंपनियों को रोजाना करीब 1,000 करोड़ रुपये का भारी नुकसान
सरकार के मुताबिक तेल कंपनियां फिलहाल हर दिन करीब 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान उठा रही हैं. कुल अंडर-रिकवरी करीब 1.98 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है.इसके बावजूद सरकार ने पिछले चार साल से पेट्रोल-डीजल के रिटेल दाम नहीं बढ़ाए हैं.
क्या भारत में भी लागू हो सकती है फ्यूल राशनिंग?
फिलहाल भारत सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर किसी तरह का कोटा या राशनिंग सिस्टम लागू करने का कोई ऐलान नहीं किया है. हालांकि दुनिया के कई देशों में लागू हो चुके QR Code, Odd-Even और वीकली फ्यूल लिमिट जैसे मॉडल अब चर्चा में जरूर आ गए हैं. सरकार लगातार ईंधन बचाने, पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल और एनर्जी सिक्योर करने पर जोर दे रही है.
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