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बीयर, व्हिस्की, वोदका, रम... नकली फ्लेवर और भ्रामक दावे पर FSSAI का हंटर! शराब कंपनियों को शो-कॉज नोटिस

शराब कंपनियां व्हिस्की, वोदका, रम और बीयर जैसे ड्रिंक्‍स में अनधिकृत फ्लेवर का इस्‍तेमाल कर रही थीं, साथ ही शराब के ज्‍यादा पुरानी होने को लेकर भ्रामक दावे कर रही थी. इसपर FSSAI ने क्‍लास लगाई है.

बीयर, व्हिस्की, वोदका, रम... नकली फ्लेवर और भ्रामक दावे पर FSSAI का हंटर! शराब कंपनियों को शो-कॉज नोटिस
शराब कंपनियों पर FSSAI ने एक्‍शन लिया है
(File Photo)

FSSAI Notice to Liquor Companies: एनर्जी ड्रिंक पर कंपनियों की क्‍लास लगाने के बाद सरकार की फूड रेगुलेटर एजेंसी ने शराब कंपनियों पर नकेल कसी है. ये वो शराब कंपनियां हैं, जो व्हिस्की, वोदका, रम और बीयर जैसे ड्रिंक्‍स में वैसे फ्लेवर का इस्‍तेमाल कर रही थीं, जिनकी अनुमति नहीं है. साथ ही 8 साल पुरानी शराब, 12 साल पुरानी शराब... जैसे भ्रामक दावे कर रही थीं. ऐसे में FSSAI यानी भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने शराब बनाने वाली कई कंपनियों के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं. 

नहीं सुधरीं कंपनियां तो होगी कड़ी कार्रवाई 

FSSAI ने स्पष्ट किया है कि यदि कंपनियां जल्द सुधार नहीं करतीं तो उनके खिलाफ फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी. FSSAI ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्‍ट में कहा कि शराब बनाने वाली कंपनियों को नियमों के उल्लंघन के मामले में नोटिस जारी किए गए हैं. इनमें फ्लेवर मिलाने और उत्पाद की उम्र से जुड़े भ्रामक दावे प्रमुख हैं. कंपनियों से पूछा गया है कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए.

क्‍या गड़बड़झाला कर रही थीं कंपनियां? 

FSSAI की जांच और तकनीकी विश्लेषण में सामने आया कि कुछ कंपनियां अपने उत्पादों में ऐसे अतिरिक्त सिंथेटिक फ्लेवर का इस्तेमाल कर रही हैं, जो व्हिस्की, वाइन और अन्य मादक पेय पदार्थों के प्राकृतिक स्वाद और खुशबू की नकल करते हैं. नियामक का कहना है कि इस तरह के अनधिकृत फ्लेवर का उपयोग न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि इससे उपभोक्ताओं को उत्पाद की वास्तविक गुणवत्ता के बारे में गुमराह भी किया जाता है.

नियामक ने शराब की बोतलों पर 'एज्ड (उम्र)', '8 साल', '12 साल पुराना' जैसे दावों के इस्तेमाल पर भी गंभीर आपत्ति जताई है. नियमों के अनुसार, यदि किसी शराब के लेबल पर उसकी उम्र का दावा किया जाता है तो वह उस मिश्रण में मौजूद सबसे कम उम्र वाली स्पिरिट के आधार पर होना चाहिए.

जांच में पाया गया कि कुछ कंपनियां मिश्रण में बहुत कम मात्रा में पुरानी स्पिरिट मिलाकर पूरी बोतल को 'एज्ड' बताकर प्रीमियम कीमत पर बेच रही थीं. FSSAI ने इस तरह की लेबलिंग को भ्रामक और नियमों के खिलाफ बताया है.

... तो शराब कंपनियों पर दर्ज होगा मुकदमा 

नियामक ने सभी संबंधित कंपनियों से पूछा है कि उन्होंने खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन क्यों किया. साथ ही बाजार में उपलब्ध संबंधित बैचों की लेबलिंग में सुधार करने या जरूरत पड़ने पर उन्हें वापस लेने के निर्देश भी दिए गए हैं.

FSSAI ने चेतावनी दी है कि यदि कंपनियों का जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के तहत उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा सकता है. इसके अलावा भारी जुर्माना, लाइसेंस निलंबन या लाइसेंस रद्द करने जैसी सख्त कार्रवाई भी की जा सकती है.

FSSAI का कहना है कि खाद्य पदार्थों, पेय पदार्थों की गुणवत्ता और सही जानकारी उपलब्ध कराना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है. ऐसे में किसी भी तरह की भ्रामक लेबलिंग या अनधिकृत सामग्री के इस्तेमाल को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. 

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