Satcom Services in India: देश के शहरों ही नहीं दूर-दराज के इलाकों, गांव-मुहल्लों में भी हाई स्पीड इंटरनेट मिलेगी. टेलीकॉम सेक्टर में हाई-स्पीड सैटेलाइट इंटरनेट की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. केंद्र सरकार ने संसद में एक लिखित जवाब में ये जानकारी दी है कि एलन मस्क की स्टारलिंक (Starlink), जियो सैटेलाइट (Jio Satcom) और सुनील भारती मित्तल समर्थित एयरटेल की वनवेब (OneWeb) को भारत में सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेवाओं के लिए प्रोविजनल रूप से स्पेक्ट्रम आवंटित कर दिया गया है.
केंद्रीय संचार राज्य मंत्री चंद्र शेखर पेम्मासानी ने संसद को बताया कि इन तीनों कंपनियों के पास ग्लोबल मोबाइल पर्सनल कम्युनिकेशन बाय सैटेलाइट (GMPCS) सेवाओं के अधिकार के साथ यूनिफाइड लाइसेंस मौजूद हैं.
दूर-दराज के इलाकों में हाई-स्पीड इंटरनेट
जमीन पर ऑप्टिकल फाइबर बिछाना हर जगह संभव नहीं होता. ऐसे में सैटेलाइट इंटरनेट (Satcom) देश के सबसे दूर-दराज, ग्रामीण, पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में भी तेज इंटरनेट पहुंचाने का जरिया बनेगा.
एंटरप्राइज और आपदा प्रबंधन के लिए वरदान
बैंकिंग, माइनिंग, समुद्री जहाजों, विमानन और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों के लिए सैटेलाइट कनेक्टिविटी बेहद उपयोगी साबित होगी, जहां नेटवर्क फेल होने की गुंजाइश नहीं होती.
यह अनंतिम स्पेक्ट्रम आवंटन कंपनियों को अपने नेटवर्क को वास्तविक भारतीय परिस्थितियों में टेस्ट करने का मौका देगा, जिससे उपभोक्ताओं को भविष्य में एक स्थिर और सुरक्षित सेवा मिल सके.
कमर्शियल लॉन्च से पहले कड़ा इम्तिहान
भले ही इन दिग्गज कंपनियों को स्पेक्ट्रम मिल गया हो, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे तुरंत बाजार में कमर्शियल सेवाएं शुरू कर सकती हैं. यह एलोकेशन केवल टेस्टिंग और तकनीकी-सुरक्षा मानकों को परखने के लिए है. जब तक ये कंपनियां सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की सभी शर्तों पर खरी नहीं उतरतीं, तब तक इन्हें फाइनल अप्रूवल नहीं मिलेगा.
सैटेलाइट ब्रॉडबैंड बाजार में कड़ी टक्कर
भारत के अंतरिक्ष आधारित इंटरनेट बाजार में दुनिया की दो सबसे बड़ी ताक़तें (एलन मस्क की स्टारलिंक और सुनील मित्तल की वनवेब) और देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी (रिलायंस जियो) आमने-सामने हैं. इस रेगुलेटरी प्रोसेस के पूरा होने से भारत में ब्रॉडबैंड और एंटरप्राइज कनेक्टिविटी की परिभाषा बदल जाएगी.
सुरक्षा और डेटा लोकलाइजेशन पर फोकस
सरकार ने साफ कर दिया है कि सुरक्षा सबसे पहले है. कंपनियों को यह साबित करना होगा कि भारत में उत्पन्न होने वाला सारा डेटा देश के भीतर ही रहे, ट्रैफिक अप्रूव्ड गेटवे से होकर गुजरे और अधिकृत एजेंसियां इसकी निगरानी आसानी से कर सकें.
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