पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने मंगलवार को पंजाब सरकार को राज्य सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लंबे समय से लंबित महंगाई भत्ते (DA) के बकाये के भुगतान से जुड़े निर्देशों का पालन न करने पर कड़ी फटकार लगाई.
कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश हुए मुख्य सचिव से 31 अगस्त की डेडलाइन तक अनुपालन रिपोर्ट जमा न करने के सरकार के फेल रहने पर सवाल पूछे गए.
कोर्ट में सरकार ने क्या तर्क दिया?
सरकार ने तर्क दिया कि उसने राहत पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की थी. हालांकि, सुनवाई के दौरान, हाई कोर्ट ने पाया कि सुप्रीम कोर्ट में दायर SLP में कमियां थीं, जिससे यह गंभीर सवाल खड़ा हो गया कि क्या यह केवल अदालत के आदेशों के अनुपालन में देरी करने की कोशिश थी.
एक दिन पहले मुख्य सचिव की ओर से दायर हलफनामे की जांच के दौरान, अदालत ने पाया कि SLP में अन्य कमियों के अलावा, सुप्रीम कोर्ट की याचिका में वकालतनामा पर हस्ताक्षर भी नहीं किए गए थे.
मुख्य सचिव को नोटिस
मामले को गंभीरता से लेते हुए, हाई कोर्ट ने मुख्य सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी किया और पूछा कि अदालत के निर्देशों का कथित रूप से पालन न करने के लिए उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही क्यों शुरू नहीं की जानी चाहिए.
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अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को
अब इस मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को होगी. यह मामला तब फिर से हाई कोर्ट के सामने लाया गया जब कर्मचारियों ने अदालत के 3 अगस्त के निर्देशों का पालन न करने के लिए अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. कर्मचारियों के वकील ने तर्क दिया कि सरकार ने न तो निर्धारित समय सीमा के भीतर लंबित DA बकाया जारी किया और न ही आवश्यक अनुपालन रिपोर्ट दायर की.
इस घटनाक्रम ने पंजाब सरकार को अपने कर्मचारियों और पेंशनर्स के लंबे समय से लंबित वित्तीय बकाये के मामले में फिर से न्यायिक जांच के दायरे में ला दिया है.
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