मिडिल ईस्ट में हालात पहले से खराब हैं. अमेरिका के ईरान पर हमले के बाद होर्मुज स्ट्रेट पर संकट के बादल छाए हुए हैं. इस वजह से तेल निर्यात को लेकर चिंता बढ़ी हुई है. दूसरी ओर लाल सागर में बढ़ते शिपिंग संकट की वजह से ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत लगातार बढ़ रही है. वहीं गुरुवार (23 जुलाई) को ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है.
लाल सागर है तेल निर्यात के लिए वैकल्पिक रास्ता
तेल निर्यात के लिए लाल सागर का रास्ता काफी अहम है, क्योंकि दुनिया भर के बाज़ारों तक पहुंचने के लिए लाखों बैरल तेल बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य से गुज़रता है. इस जलमार्ग से दुनिया का लगभग 12-15% समुद्री व्यापार भी होता है, जिसकी कीमत सालाना 1 ट्रिलियन डॉलर से ज़्यादा है. जब होर्मुज़ जलडमरूमध्य से ट्रैफ़िक में रुकावट आती है, तो इसे एक वैकल्पिक रास्ते के तौर पर भी इस्तेमाल किया जाता है.
मंगलवार को होर्मुज़ से गुज़रने वाले जहाज़ों की संख्या घटकर सिंगल डिजिट में आ गई. महीने की शुरुआत से अब तक तेल की कीमतों में लगभग 35% की बढ़ोतरी हुई है. इस साल अब तक इनमें 60% से ज़्यादा की बढ़त हो चुकी है.
120 डॉलर कच्चे तेल की कीमत जाने की चेतावनी
बता दें, हाल ही में कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति डॉलर पार करने की चेतावनी दी गई थी. ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार इन्वेस्टमेंट बैंक गोल्डमैन ने अपने एक नोट के हवाले से बताया है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट इसी तरह बंद रहा और तेल निर्यात ठप रहा तो चौथी तिमाही तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती है.
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में लगातार बढ़ोतरी की खबर के बाद भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी होने की चिंता बढ़ गई है. क्योंकि इंटरनेशनल मार्केट में हंगामें के बाद तेल कंपनियां फिर तेल की कीमतों पर विचार कर सकती है.
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