TDS के ऑटोमैटिक रिफंड की मांग को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है. जिसमें कहा गया है, जिन पर कोई टैक्स देनदारी नहीं है और जिन्हें इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की ज़रूरत नहीं है. उन्हें TDS ऑटोमैटिक रिफंड मिलना चाहिए. अब इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा है. याचिका में इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 की धारा 433 को चुनौती दी गई है, जिसके तहत टैक्स रिफंड का दावा करने के लिए व्यक्ति को ITR फाइल करना ज़रूरी होता है. इसमें तर्क दिया गया है कि जिन लोगों पर कोई टैक्स बकाया नहीं है, उन्हें सिर्फ़ अपनी इनकम से कटे हुए TDS को वापस पाने के लिए रिटर्न फाइल करने की प्रक्रिया से नहीं गुजरना चाहिए.
PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की डिवीज़न बेंच ने आकाश गोयल की याचिका पर नोटिस जारी किया और केंद्र को अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया. इस मामले की अगली सुनवाई 6 नवंबर, 2026 को होगी.
याचिका में ऑटोमैटिक TDS रिफंड सिस्टम की मांग
याचिका के अनुसार, यह मुद्दा कई टैक्सपेयर्स को प्रभावित करता है. डिडक्शन, छूट और अन्य लाभों को घटाने के बाद इनकी कुल टैक्सेबल इनकम छूट की सीमा से कम हो जाती है, फिर भी एम्प्लॉयर और बैंक हर फाइनेंशियल ईयर के दौरान TDS काटते हैं. नतीजतन, ऐसे कर्मचारियों पर कोई टैक्स देनदारी नहीं होती और न ही उन्हें ITR फाइल करने की ज़रूरत होती है, फिर भी उन्हें सिर्फ़ कटे हुए टैक्स का रिफंड पाने के लिए ऐसा करना पड़ता है.
याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट से अपील की है कि धारा 433 की व्याख्या इस तरह की जाए कि उन लोगों को भी रिफंड क्लेम के लिए ITR फाइल करना पड़े, जिन्हें आम तौर पर रिटर्न फाइल करने से छूट मिली हुई है.
सरकार और CBDT से राहत की मांग
याचिकाकर्ता ने केंद्र सरकार और सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ डायरेक्ट टैक्सेस (CBDT) से ऐसे टैक्सपेयर्स के लिए ऑटोमैटिक या 'सुओ मोटो' (खुद से पहल करके) TDS रिफंड सिस्टम शुरू करने के निर्देश भी मांगे हैं, ताकि बेवजह के कंप्लायंस का बोझ कम हो और योग्य टैक्सपेयर्स को रिफंड के ज़रिए समय पर राहत मिल सके.
सिनियर सिटिजन पर सिस्टम का असर
याचिका में यह भी कहा गया है कि मौजूदा सिस्टम सीनियर सिटिज़न, ब्लू-कॉलर वर्कर और कम आय वाले दूसरे लोगों पर अनुचित बोझ डालता है. इनमें से कई लोगों के पास शायद इतने संसाधन, जानकारी या तकनीकी क्षमता न हो कि वे सिर्फ़ छोटी रकम का रिफंड पाने के लिए टैक्स रिटर्न फाइल कर सकें.
2.35 करोड़ लोगों के पास TDS क्रेडिट था लेकिन ITR फाइल नहीं की
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए, याचिका में दावा किया गया है कि लगभग 2.35 करोड़ लोगों के पास TDS क्रेडिट था, लेकिन उन्होंने ITR फाइल नहीं किया, जबकि उनमें से कई पर कोई टैक्स देनदारी नहीं थी. इसमें तर्क दिया गया है कि अनिवार्य रिटर्न फाइलिंग की शर्त कई योग्य टैक्सपेयर्स को वह पैसा वापस पाने से रोकती है जो असल में उनका है.
इसमें कहा गया है कि बिना किसी टैक्स देनदारी के भी ऐसी रकम को अपने पास बनाए रखना मनमाना और असंवैधानिक है. PIL में इनकम टैक्स बिल, 2025 पर संसदीय चयन समिति की सिफारिश का भी ज़िक्र किया गया है, जिसमें रिफंड का दावा करने के लिए अनिवार्य रिटर्न-फाइलिंग की शर्त को हटाने का सुझाव दिया गया था और इसे छोटे टैक्सपेयर्स के लिए बोझिल बताया गया था. याचिकाकर्ता के अनुसार, इस सिफारिश को अंतिम कानून में शामिल नहीं किया गया था.
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