ज्यादातर कर्मचारी 15,000 रुपये की वेतन सीमा के आधार पर कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में योगदान करते हैं, लेकिन कुछ लोग अपनी असल बेसिक सैलरी के हिसाब से योगदान करना चुनते हैं. वहीं राज्यसभा में EPS योजना के तहत हायर पेंशन को एक समान रूप से लागू करने का मुद्दा उठाया गया है. इस मामले में सांसद अजीत माधवराव गोपचाडे ने पूछा कि क्या सरकार ने ट्रस्ट (Exempted) और गैर-ट्रस्ट (Unexempted) दोनों तरह के संस्थानों में कर्मचारियों के लिए ज्यादा पेंशन को एक समान रूप से लागू करने के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के पिछले फैसलों के साथ-साथ मद्रास हाई कोर्ट के 9 जुलाई, 2026 के फैसले पर भी विचार किया है.
गोपचाडे मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच के हालिया फैसले का जिक्र कर रहे थे, जिसमें छूट प्राप्त संस्थानों के कर्मचारियों के ज्यादा पेंशन फायदे पाने के अधिकारों को फिर से पक्का किया गया था. यह फैसला उन छूट प्राप्त संस्थानों (exempted establishments) के मौजूदा और रिटायर हो चुके कर्मचारियों के लिए अहम था, जो अपनी असल सैलरी के आधार पर ज्यादा पेंशन चुनना चाहते थे. इसके अलावा, गोपचाडे ने सुप्रीम कोर्ट के 2022 के एक फैसले का भी जिक्र किया, जिसमें शीर्ष अदालत ने मौजूदा कर्मचारियों के उस अधिकार को बरकरार रखा था जिसके तहत वे ज्यादा या बिना सीमा वाली सैलरी पर EPS में योगदान करके ज्यादा पेंशन का विकल्प चुन सकते हैं.
हायर पेंशन के फैसले को ट्रस्ट और गैर ट्रस्ट संस्थानों बराबर रूप से लागू- सरकार
सरकार ने कहा है कि उसने छूट प्राप्त संस्थानों के कर्मचारियों के लिए EPS, 1995 के तहत ज्यादा पेंशन से जुडे मद्रास हाई कोर्ट (मदुरै बेंच) के 9 जुलाई, 2026 के फैसले पर ध्यान दिया है. सरकार ने आगे कहा कि उसने 'सुनील कुमार बी. और अन्य' मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश को तय समय-सीमा के भीतर लागू करने की प्रक्रिया की भी समीक्षा की है.
सरकार ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि नवंबर 2022 के ज्यादा पेंशन वाले फैसले को सभी ट्रस्ट और गैर ट्रस्ट संस्थानों के लिए एक समान रूप से लागू किया गया है.
हायर पेंशन EPS-95 पेंशन क्या है?
हायर EPS पेंशन स्कीम, EPS सब्सक्राइबर्स के लिए एम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन (EPFO) की तरफ से दिया गया एक विकल्प है. यह स्कीम EPS योगदान के लिए 15,000 रुपये की स्टैंडर्ड वेज कैप (वेतन सीमा) तक सीमित नहीं है और योग्य कर्मचारियों को अपनी पेंशन के लिए अपनी असल बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते का 8.33% योगदान करने की सुविधा देती है. असल बेसिक सैलरी के आधार पर ज्यादा योगदान करने से कर्मचारी ज्यादा पेंशन पाने के हकदार हो सकते हैं, क्योंकि पेंशन की गणना में पिछले 60 महीनों की औसत पेंशन-योग्य सैलरी को ध्यान में रखा जाता है.
ज्यादा योगदान करने से रिटायरमेंट के बाद EPS सब्सक्राइबर्स को हर महीने मिलने वाली रकम में काफी बढ़ोतरी हो सकती है.
एम्प्लॉइज पेंशन स्कीम-95 (EPS-95) क्या है?
एम्प्लॉइज पेंशन स्कीम, 1995, इस एक्ट के दायरे में आने वाले संस्थानों के योग्य कर्मचारियों को पेंशन का लाभ देती है. यह स्कीम रिटायरमेंट (सुपरएनुएशन), समय से पहले रिटायरमेंट, और स्थायी विकलांगता की स्थिति में हर महीने पेंशन देती है. साथ ही, EPS सदस्य की मृत्यु होने पर परिवार को पेंशन भी देती है.
EPS पेंशन फंड में एम्प्लॉयर कर्मचारी की बेसिक सैलरी का 8.33% हिस्सा जमा करते हैं, जबकि केंद्र सरकार 1.16% (वेतन सीमा के अधीन) का योगदान देती है. जिन सदस्यों ने कम से कम 10 साल तक नौकरी की है, वे 58 साल की उम्र में रिटायर होने के बाद EPS स्कीम के तहत पेंशन पाने के हकदार होते हैं. 10 साल से कम समय तक नौकरी करने वाले सदस्य EPS स्कीम के तहत पैसे निकालने (विड्रॉल) का विकल्प चुन सकते हैं. हालांकि, अभी EPS-95 स्कीम की जगह EPS-2026 स्कीम ने ले ली है.
ट्रस्ट और गैर ट्रस्ट संस्थान क्या हैं?
EPF से ट्रस्ट संस्थान वह नियोक्ता संस्था है जिसने अपने कर्मचारियों के लिए एक प्राइवेट प्रोविडेंट फंड ट्रस्ट बनाया है और 'एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड्स एंड मिसलेनियस प्रोविजन्स एक्ट, 1952' (प्रोविडेंट फंड एक्ट) की धारा 17 के तहत छूट हासिल की है. दूसरी ओर, 'अनएक्जेम्प्टेड' (गैर ट्रस्ट) संस्थान वे संगठन हैं जिन्हें EPFO से छूट की मंजूरी नहीं मिली है. ऐसे संस्थानों को EPFO द्वारा तय किए गए EPF नियमों का अनिवार्य रूप से पालन करना होता है.
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