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12 साल में 17 करोड़ नौकरियां, बेरोजगारी दर 3.1% पर पहुंची; Gen Z के गुस्से के बीच मोदी सरकार का रिपोर्ट कार्ड

देश में बेरोजगारी और नौकरियों को लेकर बढ़ती बहस के बीच मोदी सरकार ने अपना रोजगार रिपोर्ट कार्ड पेश किया है. सरकार ने दावा किया है कि पिछले 12 वर्षों में 17 करोड़ से अधिक रोजगार सृजित हुए हैं. श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि बेरोजगारी दर 3.1% पर पहुंची है और युवाओं की रोजगार क्षमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है.

12 साल में 17 करोड़ नौकरियां, बेरोजगारी दर 3.1% पर पहुंची; Gen Z के गुस्से के बीच मोदी सरकार का रिपोर्ट कार्ड
मोदी सरकार का दावा: 12 साल में 17 करोड़ से ज्यादा रोजगार सृजित, बेरोजगारी दर 3.1% पर पहुंची
नई दिल्ली:

देश में बेरोजगारी और रोजगार के अवसरों को लेकर जारी बहस के बीच केंद्र सरकार ने अपने कार्यकाल का रोजगार रिपोर्ट कार्ड पेश किया है. एनडीए सांसदों की बैठक में श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2014 से 2024 के बीच देश में 17 करोड़ से अधिक नए रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं. उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा यूपीए शासनकाल की तुलना में लगभग छह गुना अधिक वृद्धि को दर्शाता है. सरकार के मुताबिक इस अवधि में औसतन 1.7 करोड़ रोजगार प्रतिवर्ष पैदा हुए, जबकि बेरोजगारी दर घटकर 3.1 प्रतिशत पर पहुंच गई. रोजगार, कौशल विकास, सामाजिक सुरक्षा और स्वरोजगार को बढ़ावा देने वाली विभिन्न योजनाओं ने इस बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. सरकार का दावा है कि युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ी है और करोड़ों लोग आर्थिक रूप से सशक्त हुए हैं.

रोज़गार सृजन में यूपीए सरकार को बहुत पीछे छोड़ा

देश भर में बेरोज़गारी और नौकरियों के घटते अवसरों को लेकर जेन जी की नाराज़गी के बीच मोदी सरकार ने इस मोर्चे पर अपनी उपलब्धियों का ज़िक्र किया है. आज एनडीए सांसदों की बैठक में श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने बताया कि मोदी सरकार ने रोज़गार सृजन में यूपीए सरकार को बहुत पीछे छोड़ दिया.

उन्होंने कहा कि भारत में रोजगार, कौशल और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में हुआ ऐतिहासिक बदलाव हुआ है. मांडविया के प्रजेंटेशन के मुताबिक़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीते एक दशक के दौरान भारत के आर्थिक परिदृश्य, रोजगार सृजन और सामाजिक सुरक्षा में बड़ा और व्यापक परिवर्तन देखा गया है. संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन यानी यूपीए के शासनकाल में (2004-14) आर्थिक वृद्धि उपेक्षित रही. देश 10वीं अर्थव्यवस्था था और नीतिगत शिथिलता के कारण रोजगार वृद्धि धीमी थी. लेकिन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए के शासन में रोजगार और कौशल विकास को विकसित भारत के संकल्प का प्रमुख आधार बनाया गया.  

भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2014 से 2024 के दौरान देश में 17 करोड़ से अधिक नए रोजगार के अवसरों का सृजन हुआ है. यह यूपीए के शासनकाल की तुलना में लगभग छह गुना अधिक वृद्धि दर्शाता है. इस अवधि में प्रति वर्ष औसतन 1.7 करोड़ नौकरियां पैदा हुई हैं. औपचारिक क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण सुधार हुआ है, जहां कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के तहत पंजीकृत प्रतिष्ठानों और नौकरियों की संख्या में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

दुनिया ने बजा भारत का डंका

मनसुख मांडविया ने बताया कि वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है. विश्व बैंक और आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में भारत की बेरोजगारी दर घटकर 3.1% पर आ गई है, जो वैश्विक औसत 4.8% से काफी बेहतर है. जी-20 देशों के रुझानों में भारत का प्रदर्शन कई प्रमुख विकसित और उभरती अर्थव्यवस्थाओं से बेहतर रहा है. युवाओं के रोजगार और क्षमता निर्माण पर ध्यान केंद्रित करने के कारण युवाओं की रोजगार दर 41.4% से अधिक हो गई है और स्नातकों की रोजगार योग्यता में 66% का सुधार आया है.

सरकार की विभिन्न लक्षित योजनाओं ने इस बदलाव में अहम भूमिका निभाई है. मेक इन इंडिया, स्टार्ट-अप इंडिया, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, विश्वकर्मा योजना और लखपति दीदी जैसी पहलों से स्वरोजगार और उद्यमशीलता को प्रोत्साहन मिला है.

हाल ही में 2 लाख करोड़ रुपये की लागत से 4.1 करोड़ से अधिक युवाओं के लिए रोजगार, कौशल और औपचारिक नौकरी के अवसरों हेतु पैकेज घोषित किया गया है, जिसके तहत प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना से 3.5 करोड़ से अधिक रोजगार पैदा करने का लक्ष्य है.

विकसित देशों की कर रहे हैं बराबरी

ढांचागत बुनियादी ढांचे में व्यापक पूंजीगत व्यय से रोजगार सृजन को नई गति मिली है. रेलवे, राजमार्ग, मेट्रो, हवाई अड्डों, ऊर्जा और शहरी विकास से जुड़ी परियोजनाओं में भारी निवेश के माध्यम से लगभग 5.88 करोड़ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर निर्मित हो रहे हैं. क्षेत्रवार विश्लेषण से पता चलता है कि विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों में नौकरियों में जबरदस्त वृद्धि हुई है. विनिर्माण क्षेत्र में कार्यबल की भागीदारी बढ़कर 25.14% हो गई है, जो कई विकसित देशों के बराबर है.

मांडविया के मुताबिक़ आर्थिक प्रगति का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुँचा है. नीति आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, 2014-23 के बीच लगभग 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं और प्रति व्यक्ति घरेलू उपभोग खर्च में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है. इसके अलावा, सामाजिक सुरक्षा के दायरे का तीव्र गति से विस्तार हुआ है.

वर्ष 2015 में जहाँ केवल 25 करोड़ नागरिक (19%) किसी सामाजिक सुरक्षा योजना के दायरे में थे, वहीं 2026 तक यह संख्या बढ़कर 101 करोड़ से अधिक (68.4%) हो गई है. इस उपलब्धि के लिए भारत को अंतर्राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा संगठन पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है.

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