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एयरफोर्स के लिए 210 एयरक्राफ्ट खरीदेगी सरकार, 1.15 लाख करोड़ की डील, HAL समेत ये कंपनियां रेस में

भारतीय वायुसेना के लिए 210 नए विमान खरीदने की बड़ी तैयारी चल रही है. ये सभी विमान भारत में ही बनाए जाएंगे.मेक इन इंडिया के तहत होने वाली इस डील के लिए Tata, Mahindra और HAL के बीच मचेगी होड़. जानिए डिफेंस और एयरोस्पेस सेक्टर पर इसका क्या असर पड़ेगा.

एयरफोर्स के लिए 210 एयरक्राफ्ट खरीदेगी सरकार, 1.15 लाख करोड़ की डील, HAL समेत ये कंपनियां रेस में
Air Force Aircraft Deal: वायुसेना की ताकत में बड़ा इजाफा

भारतीय वायुसेना के बेड़े को मजबूत करने के लिए सरकार एक बड़ी खरीद की तैयारी में है. रक्षा मंत्रालय ने एयरफोर्स के लिए 60 मल्टी-रोल ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और 150 ट्रेनर एयरक्राफ्ट खरीदने की प्रक्रिया शुरू की है. दोनों प्रोजेक्ट की कुल अनुमानित कीमत करीब ₹1.15 लाख करोड़ बताई जा रही है.खास बात यह है कि सरकार इन विमानों को सिर्फ विदेश से खरीदने के बजाय भारत में ही बनाने पर जोर दे रही है.

इससे देश में एयरक्राफ्ट मैन्युफैक्चरिंग और डिफेंस सेक्टर को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है. इस बड़ी डील के लिए टाटा ग्रुप, महिंद्रा ग्रुप और सरकारी कंपनी हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड  (HAL) जैसी कंपनियां रेस में हैं.

60 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट की खरीद पर करीब ₹1 लाख करोड़ खर्च

रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी दो अलग-अलग रिक्ववेस्ट फॉर इन्फॉर्मेशन  यानी RFI के तहत यह प्रक्रिया शुरू हुई है. इनमें सबसे बड़ा प्रोजेक्ट 60 मल्टी-रोल ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट का है. डिफेंस से्कटर  से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट की कीमत करीब ₹1 लाख करोड़ हो सकती है.

इन एयरक्राफ्ट को भारत में बनाने को प्राथमिकता दी जा रही है. यानी यह सिर्फ तैयार विमान खरीदने की डील नहीं होगी, बल्कि देश में इनके निर्माण पर भी जोर रहेगा. यह सरकार की आत्मनिर्भर भारत और  डिफेंस सेल्फ रिजिलियंस की पॉलिसी के तहत है.

टाटा, महिंद्रा और HAL में मुकाबला

60 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट के बड़े कॉन्ट्रैक्ट के लिए टाटा ग्रुप, महिंद्रा ग्रुप और HAL के नाम प्रमुख दावेदारों के तौर पर सामने आ रहे हैं.टाटा ग्रुप पहले से ही एयरोस्पेस सेक्टर में अपनी मौजूदगी मजबूत कर चुका है. कंपनी गुजरात में Airbus के साथ C-295  ट्रासपोर्ट एयरक्राफ्ट प्रोजेक्ट पर काम कर रही है और वहां एयरक्राफ्ट की असेंबली के लिए मैन्युफैक्चरिंग लाइन भी है. वहीं महिंद्रा ग्रुप ने भी पिछले कुछ वर्षों में एयरोस्पेस और डिफेंस सेक्टर में अपनी क्षमता बढ़ाई है. दूसरी तरफ सरकारी कंपनी HAL के पास एयरक्राफ्ट बनाने का लंबा अनुभव और मजबूत सप्लाई नेटवर्क है.

पुराने ट्रांसपोर्ट विमानों की जगह आएंगे नए एयरक्राफ्ट

नए ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल एयरफोर्स के पुराने होते टैक्टिकल एयरलिफ्ट फ्लीट को बदलने या मजबूत करने के लिए किया जा सकता है.इन विमानों की मदद से सेना के जवानों, हथियारों, उपकरणों और जरूरी सामान को देश के अलग-अलग हिस्सों तक तेजी से पहुंचाया जा सकेगा. इसका फायदा खास तौर पर हिमालयी इलाकों में मौजूद फॉरवर्ड पोस्ट और हिंद महासागर के द्वीपीय क्षेत्रों तक सप्लाई पहुंचाने में हो सकता है.

भारत लंबे समय से अपनी ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहा है. ऐसे में यह डील एयरफोर्स की लॉजिस्टिक्स क्षमता को और मजबूत कर सकती है.

150 ट्रेनर एयरक्राफ्ट भी खरीदेगी सरकार

ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट के साथ-साथ रक्षा मंत्रालय ने 150 ट्रेनर एयरक्राफ्ट के लिए भी अलग RFI जारी किया है. इस प्रोजेक्ट की अनुमानित कीमत करीब ₹15,000 करोड़ बताई जा रही है.ट्रेनर एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल नए पायलटों को ट्रेनिंग देने के लिए किया जाता है. एयरफोर्स के बढ़ते कॉम्बैट और ट्रांसपोर्ट फ्लीट को देखते हुए ट्रेनर विमानों की जरूरत भी बढ़ रही है.

ट्रेनर एयरक्राफ्ट में HAL को मिल सकता है फायदा

150 ट्रेनर एयरक्राफ्ट के प्रोजेक्ट में HAL को बढ़त मिलती दिखाई दे रही है. इसकी बड़ी वजह यह है कि HAL पहले से ही भारतीय वायुसेना के लिए HTT-40 बेसिक ट्रेनर एयरक्राफ्ट बनाती है.कंपनी के पास इस विमान से जुड़ी प्रोडक्शन लाइन,सप्लाई चेव और काम करने का अनुभव पहले से मौजूद है. इसलिए ट्रेनर एयरक्राफ्ट की इस बड़ी खरीद को HAL के लिए एक बड़ा मौका माना जा रहा है.

सूत्रों के मुताबिक, अगर प्रक्रिया तय समय के मुताबिक आगे बढ़ती है तो अगले 12 से 16 महीनों में कॉन्ट्रैक्ट साइन हो सकता है. हालांकि डिफेंस डील  की प्रक्रिया में आमतौर पर कई चरण होते हैं और इसमें देरी भी हो सकती है.

भारत के डिफेंस इंडस्ट्री को मिलेगा बड़ा फायदा

इन दोनों प्रोजेक्ट से सिर्फ बड़ी कंपनियों को ही फायदा नहीं होगा. अगर ये डील आगे बढ़ती है तो इससे भारत के पूरे एयरोस्पेस और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को बढ़ावा मिल सकता है.बड़ी कंपनियों के साथ-साथ एयरक्राफ्ट कंपोनेंट बनाने वाली छोटी और मझोली कंपनियों यानी MSME सप्लायर को भी काम मिलने की उम्मीद है. इससे देश में एयरक्राफ्ट मैन्युफैक्चरिंग की पूरी सप्लाई चेन मजबूत हो सकती है.

HAL के सामने बढ़ेगी प्राइवेट सेक्टर की चुनौती

इन दोनों खरीद प्रस्तावों से एक बात साफ है कि भारत अब बड़े डिफेंस प्लेटफॉर्म के लिए सिर्फ सरकारी कंपनियों पर निर्भर नहीं रहना चाहता. टाटा और महिंद्रा जैसी प्राइवेट कंपनियां अब HAL को सीधी चुनौती देने की स्थिति में आ रही हैं.अगर टाटा या महिंद्रा में से किसी कंपनी को 60 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट का बड़ा कॉन्ट्रैक्ट मिलता है तो यह उनके लिए बहुत बड़ा कदम होगा. वहीं HAL के लिए यह अपने मौजूदा अनुभव और क्षमता को और मजबूत करने का मौका होगा.

अभी फाइनल नहीं हुई है ₹1.15 लाख करोड़ की डील

हालांकि अभी ₹1.15 लाख करोड़ की यह डील फाइनल नहीं हुई है.फिलहाल दोनों प्रोजेक्ट RFI यानी शुरुआती चरण में हैं. RFI के जरिए सरकार कंपनियों से यह जानती है कि उनके पास इस तरह के एयरक्राफ्ट बनाने की कितनी क्षमता और तैयारी है.इसके बाद औपचारिक टेंडर (RFP) जारी होगा, जिसमें विमानों की तकनीक, जांच-परख और कीमत को लेकर बातचीत होगी। इन सभी पैमानों पर खरा उतरने के बाद ही अंतिम कॉन्ट्रैक्ट पर मुहर लगेगी.

बता दें कि भारत के डिफेंस सेक्टर के लिए 210 एयरक्राफ्ट का यह प्रस्ताव एक बड़ा कदम है. अगर यह डील पक्की होती है, तो देश में ट्रांसपोर्ट और ट्रेनर एयरक्राफ्ट की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बड़ा बूस्ट मिल सकता है.साथ ही, इस बड़े ठेके को पाने के लिए टाटा (Tata), महिंद्रा (Mahindra) और एचएएल (HAL) जैसी दिग्गजों के बीच मुकाबला भी काफी दिलचस्प हो जाएगा.

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