भारत में सालों से हवाई किराया कम होने की मांग होती रही है. लेकिन इसे लेकर कोई नियम-कायदे अब तक नहीं हैं. हवाई किराया वैसे ही महंगा है और त्योहारों-छुट्टियों के दौरान तो ये और बढ़ जाता है. हवाई किराये को लेकर नियम बनाने की मांग सुप्रीम कोर्ट में की गई है. सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकार से कह दिया है कि नियम बनाइए और अगर एयरलाइन कंपनियां नियम न मानें तो उनकी उड़ानें रोक दीजिए.
भारत में एयरलाइंस 'डायनामिक प्राइसिंग' मॉडल पर काम करती हैं. मतलब, जैसे-जैसे सीटें बुक होती हैं और यात्रा की तारीख नजदीक आती है, वैसे-वैसे किराया बढ़ने लगता है.
दिसंबर 2025 में जब इंडिगो का संकट बढ़ गया था तो केंद्र सरकार ने टिकटों की कीमत पर 18,000 रुपये तक की कैप लगा दी थी. लेकिन 23 मार्च को इसे हटा लिया गया. इसलिए अब एयरलाइंस चाहें तो 18 हजार रुपये से ज्यादा का किराया भी ले सकती हैं.
भारत में कितना महंगा है किराया?
भारत में हवाई किराया इसलिए भी महंगा लगता है क्योंकि भारतीयों की कमाई बाकी देशों की तुलना में काफी कम है.
इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) के मुताबिक, 2023 में एक हवाई टिकट खरीदने के लिए भारतीयों को औसतन 17 दिन काम करना पड़ता था. IATA का कहना है कि 2011 से 2023 के बीच हवाई किराया 25% कम भी हुआ है लेकिन अब भी बहुत से लोगों के लिए हवाई सफर तक पहुंच बहुत दूर है.
भारतीयों की कमाई कम होने के कारण हवाई सफर कर पाना बहुत महंगा पड़ता है. इसकी तुलना में अमीर देशों में हवाई सफर करना आसान है.
उदाहरण के लिए, एक अमेरिकी को अगर हवाई टिकट खरीदनी है तो उसे बस एक दिन काम करने की जरूरत है. यूके और फ्रांस में सिर्फ 1.5 दिन में ही इतनी कमाई हो जाएगी कि हवाई टिकट खरीद सकते हैं. पड़ोसी मुल्कों में देखें तो चीन में 4 दिन काम करके ही हवाई टिकट खरीदी जा सकती है. हालांकि, पाकिस्तान में एक टिकट खरीदने के लिए लगभग 53 दिन काम करना होगा.

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इतना महंगा क्यों है किराया?
भारत में 15 महीनों में हवाई किराया और महंगा हुआ है. 27 जुलाई को केंद्र सरकार ने संसद में बताया था कि मार्च 2025 से जून 2026 के बीच हवाई किराया 20.5% महंगा हुआ है.
एयरलाइन कंपनी चलाना बहुत महंगा पड़ता है. IATA के मुताबिक, भारत में एयरलाइन कंपनियों के ऑपरेटिंग कॉस्ट में 40 से 50% खर्च सिर्फ फ्यूल (ATF) का होता है.
संसद में भी सरकार ने बताया था कि एयरलाइंस की ऑपरेटिंग कॉस्ट बदलती रहती है और इसकी कई वजहें हैं. जैसे- इंटरनेशनल मार्केट में ATF की कीमत, विदेशी मुद्रा, एक्साइज ड्यूटी, लीज रेंटल और VAT.
तो कंपनियां कितना कमाती हैं?
हवाई किराया महंगा होने के कारण एयरलाइन कंपनियों की कमाई तो बढ़ी है लेकिन क्या इससे उन्हें मुनाफा भी हुआ है? जवाब है- नहीं.
इंडिगो देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी है, जिसका लगभग 65% मार्केट पर कब्जा है. इसकी एनुअल रिपोर्ट बताती है कि 2025-26 में कंपनी को 73,648 करोड़ रुपये का रेवेन्यू सिर्फ टिकटों की बिक्री से आया था. जबकि, 2024-25 में 69,696 करोड़ रुपये का रेवेन्यू मिला था. इसका मतलब हुआ कि एक साल में ही कंपनी को टिकटों की बिक्री से होने वाली कमाई 5.7% बढ़ गई.
कुल मिलाकर, 2025-26 में इंडिगो को 89,513 करोड़ रुपये की कमाई हुई थी. लेकिन इसे 2,393 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था. जबकि, 2024-25 में कंपनी 7,258 करोड़ रुपये के मुनाफे में थी.
एअर इंडिया की हालत तो और खराब है. 2025-26 में कंपनी को 26,800 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था, जो 2024-25 की तुलना में 12 गुना ज्यादा था.
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और यात्रियों के आंकड़े क्या कहते हैं?
महंगे किराये का असर यात्रियों की संख्या पर भी पड़ रहा है. ICRA की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025-26 में घरेलू यात्रियों की संख्या 2024-25 की तुलना में सिर्फ 1.4% ही बढ़ी.
ICRA की रिपोर्ट बताती है कि 2025-26 में 16.77 करोड़ घरेलू यात्रियों ने हवाई सफर किया था, जबकि 2024-25 में 16.53 करोड़ यात्रियों ने सफर किया था.
जबकि, 2023-24 की तुलना में 2024-25 में यात्रियों की संख्या लगभग 8 फीसदी तक बढ़ी थी. 2023-24 में 15.4 करोड़ यात्रियों ने हवाई सफर किया था. ये आंकड़े बताते हैं कि किराया महंगा होने का असर यात्रियों की संख्या पर किस तरह पड़ रहा है.
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