- भविष्य के युद्धक्षेत्र की तैयारी अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमानों तक सीमित नहीं होनी चाहिए: डिप्टी चीफ एयर मार्शल
- वर्तमान सैन्य जरूरतों के साथ भविष्य की युद्ध प्रणाली और कॉम्बैट आर्किटेक्चर तैयार करने पर भी ध्यान देना जरूरी
- वायुसेना को जरूरी चीजों को शामिल करते हुए आने वाले वर्षों के लिए मजबूत सैन्य आर्किटेक्चर विकसित करना होगा
NDTV Defence Summit: भारतीय वायुसेना के डिप्टी चीफ ऑफ एयर स्टाफ एयर मार्शल तेजपाल सिंह ने NDTV डिफेंस समिट में कहा कि भविष्य के युद्धक्षेत्र की तैयारी केवल अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के इंतजार तक सीमित नहीं रहनी चाहिए. भारत को अपनी मौजूदा जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ भविष्य की युद्ध प्रणाली और कॉम्बैट आर्किटेक्चर तैयार करने पर भी ध्यान देना होगा. हम वॉरफेयर में एकदम से अलगी जनरेशन में छलांग नहीं लगा सकते, लेकिन इसके लिए तैयारियां अभी से कर सकते हैं, ताकि भविष्य में हम तेजी से आगे बढ़ सकें.
मजबूत आर्किटेक्चर तैयार करना जरूरी
एनडीटीवी डिफेंस समिट में 5th जनरेशन वॉयरफेयर और उससे आगे के युद्धक्षेत्र को लेकर चर्चा करते हुए एयर मार्शल तेजपाल सिंह ने कहा, "भारत को आज अपने पास उपलब्ध क्षमताओं का आकलन करना होगा और जिन क्षमताओं की तत्काल जरूरत है, उन्हें जल्द शामिल करना होगा. इसके साथ ही आने वाले वर्षों की तकनीकी और सैन्य जरूरतों के लिए एक मजबूत आर्किटेक्चर तैयार करना जरूरी है."
20 साल बाद आने वाले आदर्श भविष्य का इंतजार नहीं करना चाहिए
एयर मार्शल तेजपाल सिंह ने कहा कि भारत 20 साल बाद सामने आने वाले किसी आदर्श भविष्य का इंतजार करते हुए वर्तमान में जरूरी सैन्य क्षमताओं को शामिल करना बंद नहीं कर सकता. उनके मुताबिक, भारत के सामने चुनौतियां और भी अधिक मुश्किल हैं. इसलिए मौजूदा जरूरतों और भविष्य की तैयारियों के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है. एयर मार्शल तेजपाल सिंह ने कहा कि भारत भले ही लड़ाकू विमानों की जनरेशन को सीधे तौर पर छलांग लगाकर पार न कर पाए, लेकिन कॉम्बैट आर्किटेक्चर की पीढ़ी को जरूर आगे ले जाने का प्रयास करना चाहिए.
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भारतीय वायुसेना के डिप्टी चीफ ने कहा कि भविष्य के युद्धक्षेत्र के लिए ऑटोनॉमी, डिस्ट्रीब्यूटेड सेंसिंग, रेजिलिएंट कम्युनिकेशन और ओपन मिशन सिस्टम जैसी क्षमताओं का निर्माण अभी से शुरू किया जा सकता है. इन तकनीकों के लिए छठी जनरेशन के लड़ाकू विमान के पूरी तरह विकसित होकर आने का इंतजार जरूरी नहीं है. आधुनिक युद्ध में केवल एक अत्याधुनिक विमान पर्याप्त नहीं होगा. अलग-अलग सेंसर, नेटवर्क, ऑटोमैटिक सिस्टम और हथियार प्लेटफॉर्म एक शेयरिंग नेटवर्क के तहत किस तरह काम करते हैं, यह भविष्य की सैन्य क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा.
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