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AI डेटा सेंटर्स की सबसे बड़ी टेंशन दूर! nVIDIA की जादुई लिक्विड कूलिंग ने पानी पर पूरी कहानी ही बदल डाली

AI Data Centers Water Efficiency: AI डेटा सेंटर्स, जाे आम लोगों के बीच अब तक पानी की बहुत ज्‍यादा बर्बादी के लिए बदनाम रहे हैं, वो भविष्‍य में सबसे ज्‍यादा पानी बचाने वाली इंडस्‍ट्री बन सकते हैं. इसके पीछे है nVIDIA की जादुई कूलिंग तकनीक. ये स्‍टोरी पढ़ कर आप निश्चित ही चौंक जाएंगे.

AI डेटा सेंटर्स की सबसे बड़ी टेंशन दूर! nVIDIA की जादुई लिक्विड कूलिंग ने पानी पर पूरी कहानी ही बदल डाली
AI डेटा सेंटर्स अब पानी बर्बाद नहीं करेंगे, पानी बचाएंगे, पूरी कहानी अंदर पढ़ें
NDTV इंडिया ग्राफिक्‍स

पिछले दिनों एक रिसर्च रिपोर्ट सामने आई थी कि AI से 100 शब्‍दों का एक छोटा-सा ईमेल लिखवाने में आधा लीटर पानी खर्च हो जाता है. ये पानी बड़े-बड़े डेटा सेंटर्स को ठंडा रखने और सर्वर चलाने में खर्च होता है. ये रिपोर्ट शायद आपने पढ़ी भी होगी. लेकिन अब अगर हम आपसे ये कहें कि AI डेटा सेंटर्स, सबसे ज्‍यादा वाटर एफिशिएंट यानी सबसे ज्यादा पानी की बचत करने वाली इंडस्‍ट्रीज में से एक बनने जा रहे हैं, तो आप क्‍या सोचेंगे? आप कहेंगे कि ये क्‍या बकवास कर रहे हैं! हम समझ सकते हैं कि आपने पिछले कुछ समय से जो देखते, पढ़ते, सुनते आ रहे हैं, उसके बाद आपको ये बात बकवास ही लग सकती है, लेकिन रिसर्च और डेटा कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं.  

मैनहट्टन इंस्टीट्यूट (Manhattan Institute) के अनुसार, मौजूदा समय में डेटा सेंटर्स अमेरिका में दैनिक पानी के कुल उपयोग का मात्र 0.2% ही कंज्‍यूम करते हैं. दिलचस्‍प बात ये है कि वाटर कंजप्‍शन का ये आंकड़ा भविष्य में बढ़ने के बजाय और नीचे जाने वाला है. इसके पीछे जो जादुई तकनीक है, वो है- लिक्विड कूलिंग (Liquid Cooling).

ये जादुई तकनीक लेकर आई है, जेनसेन हुआंग की दिग्‍गज AI कंपनी- एनवीडिया (nVIDIA). जिनएआई डेटा सेंटरर्स को पानी की बर्बादी करने वाला बताया जा रहा था, वही पानी की सबसे ज्‍यादा बचत करने वाले बन जाएंगे. ये पूरी कहानी ही दिलचस्‍प है. 

पहले ये वीडियो देखिए

'हॉट टब' से भी ज्यादा गर्म लिक्विड से होगी कूलिंग

दिग्गज टेक कंपनी एनवीडिया (Nvidia) ने एआई सर्वर की एक नई जनरेशन पेश की है, जो डेटा सेंटर के इतिहास में कार्यक्षमता (Efficiency) के मामले में सबसे बड़ी छलांग है. कंपनी की 'रुबिन' (Rubin) जनरेशन का AI इंफ्रास्ट्रक्चर दुनिया का पहला ऐसा सिस्टम है, जो 100% लिक्विड कूलिंग पर काम करता है. इस सिस्टम में कोई पंखा नहीं लगा है. इसकी हर चिप और नेटवर्किंग कंपोनेंट पूरी तरह से एक क्लोज्ड-लूप (बंद सिस्टम) में लिक्विड के जरिये ठंडे किए जाते हैं.

चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें इस्तेमाल होने वाला कूलिंग लिक्विड 45 डिग्री सेल्सियस तक के टेंपरेचर पर काम कर सकता है. ये टेंपरेचर एक सामान्य 'हॉट टब' (जिसका तापमान 38 से 40 डिग्री सेल्सियस होता है) से भी अधिक गर्म है. 

यही विपरीत और अनूठा विकल्प इस सिस्टम को अत्यधिक कुशल बनाता है. कूलेंट का तापमान अधिक होने के कारण डेटा सेंटर्स को मैकेनिकल चिलर्स (ठंडा करने वाली मशीनों) की जरूरत नहीं होगी, बल्कि वे साल के अधिकांश समय बाहरी हवा (Outdoor Air) के सहारे ही कूलिंग कर सकेंगे.

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पानी की खपत घटकर होगी 'लगभग शून्य'

एनवीडिया के डेटा सेंटर कूलिंग और इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर डायरेक्‍टर अली हेदारी के अनुसार, ये अनूठा डिजाइन कूलिंग की प्रक्रिया से पानी की जरूरत को पूरी तरह से खत्‍म कर देता है. बंद सिस्टम होने के कारण यह पूरी तरह से ड्राई कूलर्स पर निर्भर करता है, जिससे पानी की बर्बादी नहीं होती.

आंकड़ों की बात करें तो, पारंपरिक कूलिंग-टॉवर सिस्टम के तहत प्रति मेगावाट प्रति वर्ष लगभग 26 लाख गैलन पानी खर्च होता था. लेकिन इस नई वास्तुकला (Architecture) की बदौलत अनुकूल मौसम वाले क्षेत्रों में पानी की यह भारी-भरकम खपत घटकर 'लगभग शून्य' (100% तक की कमी) पर आ जाएगी.

पानी तो पानी... बिजली की भी टेंशन दूर 

ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो डेटा सेंटर्स की कुल बिजली का 40% हिस्सा केवल उन्हें ठंडा रखने (Cooling) में ही खर्च हो जाता था. उद्योग के अनुमानों के मुताबिक, चिलर प्लांट के तापमान में महज 1 डिग्री की बढ़ोतरी करने से कूलिंग की ऊर्जा लागत में लगभग 4% की कमी आती है. ऐसे में लिक्विड-कूल्ड इन्फ्रास्ट्रक्चर अपनाने से एक 50-मेगावाट क्षमता वाली हाइपरस्केल फैसिलिटी सालाना कूलिंग और पानी के खर्च में 40 लाख डॉलर (लगभग 33 करोड़ रुपये) से अधिक की बचत कर सकती है.

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शांत, सघन और पूरी तरह से अलग

इस तकनीक से डेटा सेंटर्स का भौतिक स्वरूप और माहौल भी पूरी तरह बदल जाएगा. इसमें 75% पानी और 25% प्रोपलीन ग्लाइकोल से बना कूलेंट सीधे प्रोसेसर पर लगी कोल्ड प्लेटों के माध्यम से बहता है. इसके कारण पारंपरिक डेटा सेंटर्स में होने वाला भारी शोर और पंखों की आवाज पूरी तरह गायब हो जाएगी.

मोटिवेयर (स्नाइडर इलेक्ट्रिक के एडवांस्ड कूलिंग डिवीजन) के चेयरमैन और CEO रिचर्ड व्हिटमोर का कहना है कि जब चिप्स की पावर डेंसिटी एक निश्चित सीमा को पार कर जाती है, तो लिक्विड कूलिंग ही एकमात्र रास्ता बचता है. एनवीडिया का मानना है कि एआई की बढ़ती मांग के बीच इसके एनर्जी फुटप्रिंट को नियंत्रण में रखने के लिए यह बदलाव बेहद जरूरी है.

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आम के आम, गुठलियों के भी दाम: वेस्ट हीट से गर्म होंगे घर

इस नई तकनीक का एक और सबसे बड़ा फायदा यह है कि एआई फैक्ट्रियों के संचालन से निकलने वाली अवशिष्ट गर्मी (Residual Heat) को बर्बाद करने के बजाय, उसका पुनरुत्पादक उपयोग (Reuse) किया जा सकेगा. इस गर्मी का इस्तेमाल आसपास के व्यावसायिक या आवासीय भवनों और घरों को गर्म रखने के लिए किया जा सकता है.

ये बदलाव डेटा सेंटर्स को केवल बिजली और पानी की खपत करने वाले केंद्रों से बदलकर उन्हें स्थानीय समुदायों के लिए एक मूल्यवान संसाधन (Asset) बना देगा, जो बिजली ग्रिड के पूरक के रूप में काम करेंगे. कुल मिलाकर, 'एआई पृथ्वी और पर्यावरण को नष्ट कर रहा है' वाली पुरानी अवधारणा अब पूरी तरह से गलत साबित होने की राह पर है.

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