Petrol Diesel may be Cheaper soon: अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर बातचीत के बीच कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट देखी जा रही है. क्रूड ऑयल और ब्रेंट क्रूड 73 से 77 डॉलर प्रति बैरल के बीच ट्रेड कर रहा है. कच्चे तेल के भाव जो पिछले दिनों 55 से 70 फीसदी तक बढ़ गए थे और एक समय तो 126 डॉलर/बैरल के पार कर गए थे, वो अब काफी नीचे आ गए हैं. कच्चा तेल तो सस्ता हो गया, अब करोड़ों लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पेट्रोल-डीजल के दाम कम होने वाले हैं? NDTV ने तेल, बाजार और ऊर्जा रणनीति से जुड़े सवालों पर नीति आयोग के उपाध्यक्ष (Vice Chairman) डॉ अशोक कुमार लाहिड़ी से बात की. डॉ लाहिड़ी, नीति आयोग में चेयरमैन PM नरेंद्र मोदी के बाद दूसरे सबसे बड़े प्रमुख व्यक्ति (Key-person) हैं.
नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ लाहिड़ी ने मध्य पूर्व तनाव और उसके कारण भारतीय अर्थव्यवस्था, विशेष रूप से तेल और गैस आयात पर पड़ने वाले प्रभावों पर महत्वपूर्ण बातें कहीं. उन्होंने इस संकट के दौरान भारत की रणनीतियों और भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा के लिए आवश्यक कदमों पर भी चर्चा की.
क्या सस्ते होने वाले हैं LPG, पेट्रोल-डीजल?
कच्चा तेल सस्ता होने के बाद देश में क्या पेट्रोलियम पदार्थों (पेट्रोल-डीजल-LPG) की कीमतें कम होनी चाहिए, NDTV के इस सवाल पर नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक लाहिड़ी ने कहा कि एक बार कीमतें स्थिर हो जाए तो सरकार और तेल कंपनियां विचार करेंगी. उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि अगर पेट्रोलियम प्राइस, कच्चे तेल की कीमत स्टेबलाइज कर जाए, स्थिर हो जाए तो धीरे-धीरे सरकार विचार करेगी, कंपनी विचार करेगी कि क्या होना चाहिए.'
उन्होंने वर्तमान परिदृश्य पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि अब शांति की ओर संकेत मिल रहे हैं और 'तूफान' थम चुका है. उन्होंने इस बात का जिक्र किया कि ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude Oil) की कीमतों में महत्वपूर्ण गिरावट देखी गई है, जो इस बात का प्रमाण है कि संकट के दौरान भारत ने सही तरीके से मुकाबला किया.
ऊर्जा संकट को बताया 'इन्फ्लुएंजा', कहा- जौंडिस हो सकता था
हालिया भू-राजनीतिक तनाव पर टिप्पणी करते हुए, डॉ लाहिड़ी ने एक सटीक उदाहरण देते हुए कहा कि मध्य पूर्व में युद्ध की स्थिति 'इन्फ्लुएंजा' (Influenza) जैसी थी. उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि यह संकट लंबा खिंचता और 'टाइफाइड' या 'जौंडिस' जैसी गंभीर बीमारी का रूप लेता, तो चुनौतियां कहीं अधिक बड़ी हो सकती थीं. हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकार और तेल कंपनियों ने इमरजेंसी के दौरान बहुत कुशलता से काम किया और स्थिति को सफलतापूर्वक संभाला.
आयात पर निर्भरता और भविष्य की राह: 3 स्ट्रैटजी
डॉ लाहिड़ी ने एक गंभीर तथ्य की ओर इशारा करते हुए कहा कि भारत अपनी 85% कच्चा तेल (Crude Oil) आयात करता है. उन्होंने चेतावनी दी कि इस निर्भरता को कम करने के लिए अब 'एनर्जी सेल्फ-सफिशिएंसी' यानी ऊर्जा आत्मनिर्भरता पर ध्यान केंद्रित करना अनिवार्य है. भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने तीन महत्वपूर्ण विकल्पों का प्रस्ताव दिया:-
- रिन्युएबल एनर्जी (Renewable Energy): नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों पर अधिक से अधिक ध्यान देना.
- एक्सप्लोरेशन (Exploration): घरेलू स्तर पर तेल और गैस की खोज को बढ़ावा देना.
- डायवर्सिफिकेशन (Diversification): पेट्रोलियम उत्पादों के आयात के स्रोतों को किसी एक देश या क्षेत्र तक सीमित न रखकर विविधतापूर्ण बनाना.
उन्होंने स्पष्ट किया कि ये कदम इसलिए जरूरी है ताकि भविष्य में जियो-पॉलिटिकल तनावों से होने वाले व्यवधानों की स्थिति में भारत अन्य देशों से निर्बाध रूप से आपूर्ति प्राप्त कर सके. पेट्रोल, डीजल, गैस की कीमतें कम होने की संभावना पर उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की कीमतें स्थिर होती हैं, तो सरकार और संबंधित कंपनियां धीरे-धीरे कीमतों के निर्धारण पर उचित निर्णय ले सकेंगी.
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