क्या आपको पता है हमारी सेना के जवान बिना हथियारों के भी दुश्मन को धूल चटा सकते हैं या सेना के पास रात के घनघोर अंधेरे में भी देख पाने की क्षमता है... शायद आप यह भी नहीं जानते होंगे कि हमारी सेना सरहद पार के दुश्मनों से ज्यादा सरहर के भीतर के शत्रुओं से जूझ रही है। और शायद आपको यह भी पता नहीं होगा की सेना में अच्छे गायक, संगीतज्ञ, गीतकार और चिकित्सक भी हैं। ऐसे और भी सवाल कई सवाल हैं जिनका जवाब जानने का मौका खुद सेना आपको दे रही है।
दरअसल सेना ही तो है जो हर मुसीबत में हमारे साथ और हमारे आगे खड़ी नजर आती है। बाढ़ से लेकर हिमपात तक और भूकंप से लेकर किसी दुर्घटना तक में सेना के ये जवान हमारा कवच बनने में जरा भी देर नहीं करते। हमेशा मदद करने वाली सेना के बारे में अधिकतर लोगों को शायद पता भी न हो कि 15 जनवरी को सेना अपना जन्मदिन यानी सेना दिवस मनाती है। दिल्ली में कैंट इलाक़े के परेड ग्राउंड में हर साल इसी दिन सेना के जवान अपने अपने हथियारों के साथ परेड में हिस्सा लेते हैं।
सेना दिवस के बारे में आम लोगों को जागरूक बनाने के लिए शायद इतिहास में पहली बार सेना के जाबांज नुक्कड़ पर आम लोगों के बीच आए। दिल्ली के द्वारका में सेना ने लोगों को फिट रहने के टिप्स दिए। सुबह- सुबह लोगों ने जवानों के साथ फौजी जोश के साथ स्वस्थ रहने के गुर सीखे। लोगों में उत्साह भरने के लिए सेना के जवानों ने मार्शल आर्ट्स के पैतरें भी दिखाए।असम रजिमेंट के जवानों ने अपने इलाके का मार्शल आर्ट्स, मद्रास रेजिमेंट ने कलरियापयट्टू और पंजाब रेजिमेंट के जवानों ने गटका के जरिए दिखाया कि कैसे बिना हथियार के भी दुश्मनों को पल भर में धूल चटाया जा सकता है। महिलाएं अपने आपको कैसे सुरक्षित रख सकती हैं इसके भी तरीके सिखाए गए। जब जवान आगे आए तो इनके साथ हर वक्त साथ चलने वाले डॉग स्कॉयड कैसे पीछे रहते। इन्होनें भी अपने करतब से सबका मन मोह लिया। यहां जानकारी के लिए बता दें कि इन डॉग की बदौलत ही सेना के जवान कई मिशन में सफल हुए हैं और इनको बहादुरी के लिए मेडल भी मिले हैं।
उम्मीद है कि 15 जनवरी से पहले ऐसे और भी कार्यक्रम दिल्ली के अलग अलग हिस्सों में किए जा सकते हैं। वैसे अगर आपको मौका मिले तो आप भी 15 जनवरी को दिल्ली कैंट परेड देखने आ सकते है वह भी बिना किसी टिकट के। यहां पर आप देख सकते है कि आपकी सेना के पास कैसे कैसे हथियार है.. कितने जोश से भरपूर हैं सेना के जवान और अगर दुश्मन हमला करने की गुस्ताखी करें तो वे कैसे उसे मुहतोड़ जवाब देते हैं।
सेना तो हमेशा हमारे साथ खड़ी होती ही है तो आइए क्यों न हम भी उसकी वर्षगांठ पर मौजूद रहकर जवानों की हौंसला-अफजाई करें और बता दें की अवाम को भी उनकी खुशियों की उतनी ही फ़िक्र है।
This Article is From Jan 04, 2015
राजीव रंजन की कलम से : आपको कितनी फ़िक्र है सेना की?
Rajeev Ranjan, Saad Bin Omer
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Updated:जनवरी 04, 2015 21:18 pm IST
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Published On जनवरी 04, 2015 21:12 pm IST
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Last Updated On जनवरी 04, 2015 21:18 pm IST
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