भारतीय सेना की मारक क्षमता कुछ और बढ़ने जा रही है. सेना जल्द ही 300 स्वदेशी धनुष हॉवित्जर तोपों का नया ऑर्डर दे सकती है. रक्षा मंत्रालय की उच्च स्तरीय बैठक में मंजूरी मिलने के बाद यह प्रक्रिया आगे बढ़ेगी.इन 300 तोपों की खरीद से सेना में 15 नई आर्टिलरी रेजिमेंट बनाई जाएंगी. इससे सेना की मारक क्षमता काफी बढ़ेगी.यह धनुष तोपों का दूसरा बड़ा ऑर्डर होगा. इससे पहले भारतीय सेना 114 तोपों का ऑर्डर दे चुकी है. इनमें से कई तोपें सेना में शामिल हो चुकी हैं. इनके आधार पर चार रेजिमेंट्स पूरी तरह ऑपरेशनल हो चुकी हैं. दो और रेजिमेंट्स को शामिल करने की प्रक्रिया चल रही है.

आपको बता दें कि धनुष तोपों का निर्माण एडवांस्ड वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड (AWEIL) कर रही है. यह कंपनी पहले ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड का हिस्सा थी. इन तोपों का उत्पादन मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित गन कैरिज फैक्ट्री में किया जाता है.धनुष एक आधुनिक 155 मिमी और 45 कैलिबर की हॉवित्जर तोप है. इसे बोफोर्स तोप की तकनीक के आधार पर विकसित किया गया है. लेकिन इसमें कई आधुनिक सुधार भी किए गए हैं.इस तोप की मारक क्षमता काफी ज्यादा है. सामान्य गोला-बारूद के साथ इसकी रेंज लगभग 36 किलोमीटर है. खास एम्यूनिशन के साथ यह 38 से 40 किलोमीटर या उससे अधिक दूरी तक निशाना लगा सकती है.इसमें डिजिटल फायर कंट्रोल सिस्टम लगाया गया है. इससे लक्ष्य पर सटीक निशाना लगाना आसान हो जाता है. इसमें ऑटोमैटिक लोडिंग असिस्ट और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम भी लगाए गए हैं.
धनुष तोप की एक खासियत यह भी है कि यह ऊंचाई वाले इलाकों में भी अच्छी तरह काम करती है. इसे लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश जैसे कठिन इलाकों में टेस्ट किया गया है. वहां इसका प्रदर्शन संतोषजनक पाया गया है.भारतीय सेना लंबे समय से अपने तोपखाने को आधुनिक बना रही है. सेना धीरे-धीरे पुरानी 105 मिमी और 130 मिमी तोपों को हटाकर 155 मिमी की आधुनिक तोपों को शामिल करना चाहती है.धनुष तोपों की खरीद इसी योजना का हिस्सा है. इसे फील्ड आर्टिलरी रैशनलाइजेशन प्लान के तहत शामिल किया गया है.नए 300 तोपों के ऑर्डर की लागत लगभग 4,000 से 5,000 करोड़ रुपये के बीच हो सकती है. इनकी डिलीवरी चरणबद्ध तरीके से की जाएगी. यह प्रक्रिया 2028 से 2032 के बीच पूरी हो सकती है.

धनुष तोपों का इस्तेमाल मुख्य रूप से उत्तरी और पूर्वी सीमाओं पर किया जाएगा. यहां लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की जरूरत होती है.इन तोपों की एक और बड़ी खासियत यह है कि इनमें 80 प्रतिशत से अधिक हिस्से स्वदेशी हैं. इससे विदेशी निर्भरता कम होती है और देश के रक्षा उद्योग को भी बढ़ावा मिलता है.इस प्रोजेक्ट से कई छोटे और मध्यम उद्योगों को भी काम मिल रहा है. इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं.
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