मंगलवार को इज़ इक्वल टू की थ्योरी का प्रतिपादन करते वक्त मुझे भी अंदाज़ा नहीं था कि प्रतिपादन के अगले ही दिन इसका फैक्ट्री उत्पादन शुरू हो जाएगा। आज तो दिल्ली में जिस तरह से इज़ इक्वल टू हुआ है क्या बतायें। असम के मामले में असम के नेता तो उत्तराखंड के मामले में उत्तराखंड के नेता दोनों दलों ने उतार दिये या उतर आए।
फिर से बता दूं कि इज़ इक्वल टू वो अवस्था हैं जहां हर बहस बराबर हो जाती है। इसके तहत अगर कांग्रेस बीजेपी पर घोटाले का आरोप लगाएगी तो बीजेपी भी कांग्रेस पर घोटाले का आरोप लगा देगी। बुधवार सुबह विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने जैसे ही ट्वीट किया कि एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने मुझ पर काफी दबाव डाला था कि कोयला घोटाले के आरोपी संतोष बागरोडिया को डिप्लोमेटिक पासपोर्ट दे दूं। मैं उस नेता का नाम सदन के पटल पर बताऊंगी।
सुषमा स्वराज के ट्वीट से थोड़ी देर के लिए कांग्रेस सकते में तो आ ही गई थी मगर आनंद शर्मा ने जल्दी यह कहकर मोर्चा संभाला कि ये हास्यापस्द बात है। भारत के किसी नागरिक द्वारा पासपोर्ट के लिए आवेदन देना और किसी भगोड़े को पासपोर्ट दिलवाने में बहुत फर्क है। ये बयान उनकी हताशा को बयान करता है।
क्या ललित मोदी और बागरोडिया की मदद का इज़ इक्वल टू हो सकता है लेकिन यह जानना दिलचस्प था कि विदेश मंत्री पर दबाव डालने वाला कांग्रेसी नेता कौन था। संतोष बागरोडिया ने हमारे राजनीतिक संपादक मनोरंजन भारती से कहा, 'जब वाजपेयी सरकार में सुषमा स्वास्थ मंत्री थीं तो कैंसर ग्रस्त अपनी बीमार पत्नी के इलाज के लिए मदद मांगी थी जो उन्होंने की थी। दस साल बाद मैं जब डिप्लोमेटिक पासपोर्ट के लिए योग्य हो गया तो खुद ही उनके पास गया लेकिन उन्होंने नहीं दिया। मेरे ऊपर चार्जशीट नहीं हुई है। मुझे बाहर जाने पर कोई अदालती रोक नहीं है। सुषमा मेरे नाम का सहारा न लें। अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब दें।'
बुधवार को संसद के बाहर कांग्रेस का धरना नहीं हुआ। अज्ञात सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस चाहती थी कि सभी विपक्ष को लेकर धरना किया जाए। लेकिन लोकसभा में राहुल गांधी और उनकी पार्टी के सभी सांसद बांह पर काली पट्टी बांध कर चले आए। कुछ ने सदन में तख्तियां भी दिखा दीं जिस पर लिखा था, 'बड़ा मोदी मेहरबान तो छोटा मोदी पहलवान।' केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी ने आपत्ति जताई और कहा कि हम भी राहुल गांधी और सोनिया गांधी के बारे में ऐसी तख्ती लेकर आ सकते हैं।
स्पीकर महाजन ने चेतावनी दी कि वे अनुशासनात्मक कार्रवाई भी कर सकती हैं। एक कांग्रेसी नेता ने इज़ इक्वल टू करते हुए अपना बचाव किया कि 2008 के विश्वास मत के दौरान संसद में नोट लेकर कौन आया था। सुषमा मामले में समाजवादी पार्टी के सांसद नरेश अग्रवाल ने कहा कि हम सुषमा स्वराज का इस्तीफा नहीं मांग रहे हैं। शिवराज सिंह और वसुंधरा राजे का मांग रहे हैं। मुलायम सिंह यादव ने कहा कि हमारी पार्टी महिलाओं के सौ खून भी माफ करती है। लेकिन माफी का फिफ्टी परसेंट कोटा ही क्यों भरा। सुषमा जी के साथ वसुंधरा जी को भी माफ कर देते।
वित्त मंत्री और राज्यसभा में नेता सत्ता पक्ष अरुण जेटली विपक्ष से लोहा रहे थे। उसी तरह जैसे विपक्ष में रहते हुए वे सरकार से लोहा लिया करते थे। कांग्रेस उसी लोहे की याद दिलाती हुई कह रही थी कि आप दस सालों तक पहले इस्तीफा मांगते रहे अब आप भी वही कीजिए जो हम मांग रहे हैं।
विपक्ष को साधते हुए अरुण जेटली कभी उग्र हो रहे थे तो कभी उनके चेहरे पर झुंझलाहट भी नज़र आई जबकि जेटली अक्सर मुस्कुराते हुए अपने धारदार तर्कों से धाराशायी करने में माहिर रहे हैं। जब वे बोलते हैं तो एक खास किस्म का अनुशासन बन ही जाता है। हमेशा युवा नेता के तौर पर देखे जाने वाले जेटली जी की उग्रता पर उम्र दस्तक देने लगी है। उन्होंने कहा कि जांच तब होती है जब किसी कानूनी प्रावधान का उल्लंघन हुआ हो। जेटली ने कहा कि व्यापमं राज्य का मामला है तो सीताराम येचुरी ने कहा कि कई राज्यों का मामला है इसलिए संसद में चर्चा हो सकती है।
हंगामा हुआ तो संसद के दोनों ही सदन स्थगित कर दिये गए। बाहर फिर शुरू हुआ इज़ इक्वल टू का दौर। इसके लिए बीजेपी ने असम के मामले से कांग्रेस को घेरने के लिए प्रेस कांफ्रेंस की तो संबित पात्रा के साथ अरुणाचल प्रदेश से अपने सांसद और मंत्री किरण रिजिजू भी मौजूद रहे। संबित ने कहा कि पी.के. थुंगन इंदिरा गांधी के करीबी रहे हैं। अरुणाचल प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री रहे हैं जिन्हें हाल ही में एक मामले में दोषी पाया गया है। वे नागालैंड में सिंचाई घोटाले में शामिल थे। डीडीए स्कैम में शामिल थे। बीजेपी ने कहा कि असम सरकार के एक मंत्री का अमेरिकी कंपनी से रिश्वत लेने में नाम आया है। इसके जवाब में असम के सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि गोवा-असम मामले की जांच हो रही है। असम के मुख्यमंत्री ने भी कहा है कि ज़रूरत होगी तो सीबीआई जांच भी हो सकती है। इसकी तुलना व्यापमं से नहीं की जा सकती है।
असम के मामलों के जानकार हमारे सहयोगी संदीप फूकन ने बताया कि बीजेपी कांग्रेस के मंत्री हिमांता विश्व शर्मा को घेर रही है जो मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के प्रतिद्वंदी माने जाते हैं। इनके बारे में असम के अखबारों में चर्चा छपती रहती है कि वे बीजेपी में शामिल होने का प्रयास करते रहते हैं। जब हमने असम के अखबारों को खंगाला तो ये मिला। सोलह जुलाई की असम टाइम्स ट्रिब्यून की ख़बर है कि हिमांता विश्व शर्मा को बीजेपी में शामिल करने के मामले में बीजेपी के नेता बंटे हुए हैं। प्रदेश बीजेपी के नेता चाहते हैं कि वे पार्टी में आए मगर सांसद नहीं चाहते। इस अखबार में प्रदेश अध्यक्ष सिद्धार्थ भट्टाचार्य के किसी अनाम करीबी का बयान छपा है कि हमें डॉक्टर शर्मा से काम करने वाले नेता की ज़रूरत है। 15 जुलाई के न्यू इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर है कि बीजेपी नेता बिजोया चक्रवर्ती का बयान है कि कांग्रेस के कई नेता बीजेपी में शामिल होने के लिए संदेशा भिजवा रहे हैं। उन्होंने किसी नेता का नाम नहीं लिया लेकिन अखबार लिखता है कि जब गुवाहाटी में राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह महासंपर्क अभियान में हिस्सा ले रहे थे तब मीडिया की नज़र हिमांता विश्व शर्मा पर भी थी। मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने कहा कि दो साल से ऐसी चर्चा सुन रहा हूं लेकिन जब कोई जाएगा तब देखा जाएगा। हिमांता विश्व शर्मा ने भी खंडन किया था। 14 जुलाई के सेंटिनल में खबर छपी है कि हिमांता शर्मा ने एजीपी और बीजेपी के नेताओं से संपर्क साधा है।
क्या बीजेपी ने जिस नेता के सहारे कांग्रेस को घेरा है, कभी उसे अपनी पार्टी में लेने का विचार किया था। दूसरा इज़ इक्वल टू हुआ उत्तराखंड को लेकर। बीजेपी ने पुरज़ोर तरीके से आरोप लगाया कि कांग्रेस ने जवाब देने के लिए उन्हें देहरादून से दिल्ली ही बुला लिया। केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बार मोर्चा संभाला और एक स्टिंग की सीडी के साथ आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री हरीश रावत के पर्सनल सेक्रेटरी आईएएस अधिकारी मोहम्मद शाहिद शराब के वितरण के लिए एक दलाल के साथ सौदेबाज़ी कर रहे थे। वितरण के अधिकार के एवज़ में करोड़ों रुपये रिश्वत में दिए जाने की बात चल रही थी।
आरोप लगते ही इज इक्लव टू करने आ गए हरीश रावत ने कहा उन्होंने नियम में कोई तब्दीली नहीं की है इसलिए जांच का सवाल ही नहीं उठता। लेकिन कुछ ही देर बाद ख़बर आई कि उन्होंने स्टिंग की फोरेंसिक जांच के आदेश दे दिए हैं और वे जांच के आधार पर कार्रवाई की बात करने लगे हैं।
दीवार फिल्म का डायलॉग याद आ रहा है, 'जाओ पहले उस आदमी का साइन लेकर आओ।' इतने लोग एक दूसरे की साइन लेने निकल पड़े हैं कि जावेद अख़्तर दोबारा से 'दीवार' लिख सकते हैं।
This Article is From Jul 22, 2015
सियासी खींचतान में फंसी संसद, विपक्ष संसद न चलने देने पर आमादा
Reported By Ravish Kumar
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Updated:जुलाई 22, 2015 23:28 pm IST
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Published On जुलाई 22, 2015 21:17 pm IST
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Last Updated On जुलाई 22, 2015 23:28 pm IST
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