रोम का वो वीडियो तो याद ही होगा आपको. पीएम मोदी इटली की प्राइम मिनिस्टर जॉर्जिया मेलोनी को एक टॉफी का पैकेट बतौर उपहार देते हैं और मेलोनी खिलखिलाकर कहती हैं- "He gifted us a very, very good toffee." टॉफी थी मेलोडी! बस फिर क्या था, इंटरनेट ने मोदी और मेलोनी को मिलाकर नाम दे दिया 'Melodi', और इस दोस्ती की मिठास बन गई वही 'Melody'! एक छोटी सी पार्ले टॉफी ने पूरे इंटरनेट पर कब्जा कर लिया. लेकिन इसे महज इत्तेफाक मान रहे हैं, तो जरा रूकिए... भारत की विदेश नीति में कूटनीति तो अहम स्थान रखती ही है लेकिन हाल के वर्षों में खाना भी अहम भूमिका निभा रहा है. खाना अब सिर्फ खाना नहीं रहा- ये एक सोची-समझी सॉफ्ट पावर स्ट्रैटेजी बन चुका है.
और इसकी सबसे ताजा मिसाल है 12-13 सितंबर 2026 को दिल्ली के भारत मंडपम में हुआ 18वां ब्रिक्स समिट. जब दुनिया भर के नेता पीएम मोदी के गाला डिनर की टेबल पर बैठे, तो उनके सामने परोसी गई हर डिश एक कहानी कह रही थी. यही वो पैटर्न है जो मेलोडी टॉफी से लेकर अभी हाल ही में दिल्ली में हुए ब्रिक्स समिट के मखाने तक, हर बार दोहराता है.
यहां एक बात बतानी जरूरी है कि मई 2026 में पीएम मोदी के पांच देशों के दौरे का आखिरी पड़ाव था इटली. मेलोनी को मेलोडी टॉफी देना महज एक मजाकिया पल भर नहीं था, इसके पीछे टाइमिंग सोची-समझी थी. जैसे ही वीडियो वायरल हुआ, वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बयान दिया कि पिछले 12 सालों में भारत का टॉफी एक्सपोर्ट 166% बढ़ा है. यानी एक हल्के-फुल्के गिफ्ट को भी सरकार ने आसानी से एक इकोनॉमिक नैरेटिव में बदल दिया- "देखो, भारत की मिठास अब दुनिया में बिक रही है."
यही तो असली मास्टरस्ट्रोक है डिप्लोमेसी का, जो चीज सोशल मीडिया पर वायरल हो, उसी को आंकड़ों के सहारे इकोनॉमिक स्टोरी बना दो.
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बिहार का ठेकुआ, जो स्लोवाकिया तक पहुंच गया
इसी कड़ी में एक और वाकया है, जो बिहार के लिए गर्व की बात है. जून 2026 में स्लोवाकिया दौरे पर पीएम मोदी ने वहां के स्पीकर रिचर्ड राशी को तोहफे में दिया- बिहार का ठेकुआ. गेहूं के आटे, गुड़ और सौंफ से बनी यह पारंपरिक मिठाई, जो छठ पूजा के दौरान हर बिहारी घर में बनती है, अब यूरोप के एक संसद भवन तक पहुंच चुकी है.
ये सिर्फ एक गिफ्ट नहीं है, ये बिहार की सादगी भरी सांस्कृतिक पहचान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर सम्मान मिलने जैसा था. जिस मिठाई को कभी सिर्फ त्योहारी परंपरा माना जाता था, वो अब भारत की कूटनीतिक पहचान का हिस्सा बन गई. बिहार के लिए ये कोई छोटी उपलब्धि नहीं, राज्य की माटी से जुड़ी चीज़ें अब सीधे ग्लोबल स्टेज पर अपनी जगह बना रही. इन घटनाओं को ध्यान से देखे तो पता चलता है कि ये कोई अचानक शुरू हुआ ट्रेंड नहीं है.
साल 2023 में जब भारत ने G20 की मेजबानी की थी, तभी से इस स्ट्रैटेजी की झलक मिलनी शुरू हो गई थी. दिल्ली के भारत मंडपम में हुए गाला डिनर का पूरा मेन्यू 'वसुधैव कुटुंबकम' यानी 'एक धरती, एक परिवार, एक भविष्य' की थीम पर तैयार किया गया था. नल्ली निहारी, रागी डोसा, बाजरा खीर, कजू मटर मखाना से लेकर गोलगप्पे और समोसे तक... विदेशी मेहमानों को भारत के मिलेट्स और स्ट्रीट फूड, दोनों का स्वाद एक साथ चखाया गया था. यही वो मौका था, जब भारत ने पहली बार खाने को सिर्फ मेहमाननवाजी नहीं, बल्कि एक कूटनीतिक टूल की तरह इस्तेमाल करना शुरू किया.
ब्रिक्स 2026: अब मखाना और सत्तू की बारी
अब दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहे 18वें BRICS समिट में यही परंपरा एक कदम और आगे बढ़ी. पीएम मोदी के गाला डिनर में पनीर लबाबदार, गुच्छी मार्मिक, मिलेट पुलाव जैसी डिशेज ने देश की क्षेत्रीय विविधता दिखाई, लेकिन असली दिलचस्प कहानी मेन्यू के बाहर, वेलकम किट में छिपी थी.
विदेश मंत्रालय ने बिहार सरकार के साथ मिलकर करीब 1,500 खास हैंपर तैयार किए, जिसमें पूर्णिया का मखाना पेरी-पेरी, मिंट और क्रीम-ऑनियन जैसे फ्लेवर में पैक करके दिया गया और पटना के फतुहा का जलजीरा फ्लेवर वाला सत्तू, जिसे 'भारत का अपना प्रोटीन शेक' कहकर पेश किया गया.
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इसे हर बिहारी के लिए गर्व का पल बताया, और सही भी है, जो मखाना और सत्तू कभी सिर्फ बिहार के गांवों की रसोई तक सीमित थे, वो अब दुनिया के सबसे बड़े कूटनीतिक मंचों में से एक पर पहुंच रहे हैं. ये बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और परंपरा, दोनों के लिए एक बड़ी वैश्विक पहचान है.
मेलोडी टॉफी से लेकर मखाने तक... भारत की गिफ्ट और मेन्यू डिप्लोमेसी में एक साफ लॉजिक नजर आता है. हल्के-फुल्के पर्सनल गिफ्ट (टॉफी, ठेकुआ) रिश्तों में गर्माहट लाने के लिए और बड़े मंच के मेन्यू व वेलकम किट (G20, BRICS) पूरे देश की सांस्कृतिक और कृषि विविधता दिखाने के लिए इस्तेमाल होते हैं. और इस पूरी कहानी में बिहार बार-बार लौटकर आता है. कभी ठेकुए के रूप में, कभी मखाने और सत्तू के रूप में. एक राज्य जिसे अक्सर सिर्फ सियासी सुर्खियों के लिए जाना जाता है, वो अब अपने स्वाद और परंपरा के दम पर दुनिया के सबसे बड़े कूटनीतिक टेबल तक पहुंच चुका है.