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एक योगी के तप की गाथा है उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला, कैसे सफल हुई 'ओडीओपी' योजना

नम्रता नारायण
  • ब्लॉग,
  • Updated:
    सितंबर 26, 2026 10:23 am IST
    • Published On सितंबर 26, 2026 09:26 am IST
    • Last Updated On सितंबर 26, 2026 10:23 am IST
एक योगी के तप की गाथा है उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला, कैसे सफल हुई 'ओडीओपी' योजना

मरहूम शायर बशीर बद्र साहब का एक शेर है,'ये फूल मुझे कोई विरासत में मिले हैं,तुम ने मिरा कांटों भरा बिस्तर नहीं देखा'. मेगा सिटी बनने की राह पर दौड़ते ग्रेटर नोएडा के विशालकाय एक्सपो सेंटर में उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला (यूपीआईटीएस) की चमक-दमक आपको भयावह अंधेरे से लड़ाई की कहानी नहीं बताएगी. वैश्विक प्रतिनिधियों से आंख मिलाते ओडीओपी स्टाल्स यहां तक पहुंचने का संघर्ष बयान नहीं करते. पूरे आत्मविश्वास के साथ एक्सपोर्ट ऑर्डर लेते हस्तशिल्पी और कारीगर आपको उन जख्मों के निशान नहीं दिखाएंगे, जो एक दशक पहले तक रिस रहे थे. लेकिन, हकीकत यही है. यूपी में मरणासन्न स्थिति में आ चुके एमएसएमई सेक्टर के पुनर्जीवित होकर करीब चार करोड़ लोगों की जीवन-रेखा बनने तक का सफर ऐसी तमाम अनकही कहानियों से भरा है. यह एक योगी के तप की गाथा है, जिसने हालात से समझौता करने के बजाय हालात बदलने का फैसला किया.

आर्थिक क्रांति का केंद्र बना एमएसएमई  

एक समय देश में आर्थिक सुस्ती और औद्योगिक पिछड़ेपन की पहचान माने जाने वाले उत्तर प्रदेश ने पिछले कुछ सालों में विकास की एक नई और अभूतपूर्व कहानी लिखी है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी दूरदर्शी सोच, नीतिगत स्पष्टता और कुशल नियोजन से राज्य की विशाल औद्योगिक क्षमता को एक तप की तरह धरातल पर उतारा है. इस आर्थिक क्रांति के केंद्र में रहा है प्रदेश का सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र, जिसे 'एक जिला एक उत्पाद' (ओडीओपी) योजना के जरिए न केवल नया जीवन मिला, बल्कि 'उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला' (यूपीआईटीएस) जैसे वैश्विक मंच के माध्यम से विश्व व्यापार के पटल पर प्रमुख 'ग्लोबल एक्सपोर्ट हब' के रूप में स्थापित भी किया गया. 

ओडीओपी ने खोले संभावनाओं के द्वार

उत्तर प्रदेश का प्रत्येक जिला अपनी किसी न किसी पारंपरिक कला, शिल्प या विशिष्ट उत्पाद के लिए ऐतिहासिक रूप से प्रसिद्ध रहा है. मुरादाबाद का पीतल उद्योग, भदोही की कालीन, वाराणसी की बनारसी साड़ी, फिरोजाबाद का कांच उद्योग, कन्नौज का इत्र और अलीगढ़ के ताले जैसे उद्योग राज्य की औद्योगिक रीढ़ हुआ करते थे. लेकिन, एक दशक पहले तक बदहाल कानून-व्यवस्था, मार्केटिंग और वित्तीय संसाधनों का अभाव, पुरानी तकनीक और सरकारी प्रोत्साहन की कमी के कारण ये पारंपरिक उद्योग लगभग दम तोड़ चुके थे. हस्तशिल्पी, कारीगर और बुनकर आजीविका की तलाश में राज्य से पलायन करने के लिए मजबूर थे.

उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में शुक्रवार से शुरू हुए यूपीआईटीएस को देखने आए लोग.

उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में शुक्रवार से शुरू हुए यूपीआईटीएस को देखने आए लोग.
Photo Credit: PTI

साल 2017 में सत्ता संभालने के बाद पीएम नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के इस पारंपरिक ज्ञान और कौशल को पहचानते हुए 'एक जिला, एक उत्पाद' (ओडीओपी) योजना की शुरुआत की. इस योजना का प्राथमिक उद्देश्य राज्य के सभी 75 जिलों के पारंपरिक उत्पादों को चिह्नित कर उनका संरक्षण करना, उन्हें आधुनिक तकनीकों से लैस करना और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा करना था. 

धरातल पर कैसे उतरा ओडीओपी

ओडीओपी योजना को केवल कागजों तक सीमित न रखकर इसे धरातल पर लागू करने के लिए राज्य सरकार ने एक बहुआयामी रणनीति बनाई. सबसे पहले वित्तीय सहायता और ऋण सुलभता पर ध्यान दिया गया. उद्यमियों और दस्तकारों को आसान शर्तों पर पूंजी उपलब्ध कराने के लिए 'मुद्रा योजना' और 'विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना' जैसी पहलों के साथ समन्वय स्थापित किया गया. इससे स्थानीय इकाइयों का विस्तार और आधुनिकीकरण संभव हुआ. अगले चरण में तकनीकी उन्नयन और गुणवत्ता सुधार पर फोकस रहा. पारंपरिक कारीगरों को आधुनिक डिजाइन, गुणवत्ता नियंत्रण और नई पैकेजिंग तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया. इसके साथ ही जीआई टैगिंग के जरिए उत्पादों की प्रामाणिकता और अंतरराष्ट्रीय साख को मजबूत किया गया. तीसरे चरण में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्मों के साथ रणनीतिक साझेदारी करके छोटे ग्रामीण उद्यमियों के उत्पादों को सीधे डिजिटल मार्केट-प्लेस से जोड़कर आर्थिक आत्मनिर्भरता दी गई.

ओडीओपी योजना के रणनीतिक क्रियान्वयन ने उत्तर प्रदेश के एमएसएमई क्षेत्र में नए प्राण फूंक दिए. राज्य में लाखों एमएसएमई इकाइयों को प्रोत्साहन मिलने से स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित हुए, इससे युवाओं का पलायन रुका. एमएसएमई सेक्टर के इस कायाकल्प का सीधा असर प्रदेश के निर्यात आंकड़ों पर दिखाई देने लगा, जो आज दो लाख करोड़ के पार जा चुका है. राज्य के पारंपरिक उत्पाद जो कभी स्थानीय बाजारों तक सीमित थे, वे अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतरते हुए विश्व के अलग-अलग देशों में निर्यात होने लगे. ओडीओपी ने उत्तर प्रदेश को 'वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी' की ओर ले जाने वाले सबसे प्रमुख इंजन का रूप ले लिया. 

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के साथ ग्रेटर नोएडा में चल रहे यूपीआईटीएस के स्टाल का निरीक्षण करते यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ.

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के साथ ग्रेटर नोएडा में चल रहे यूपीआईटीएस के स्टाल का निरीक्षण करते यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ.
Photo Credit: PTI

यूपीआईटीएस बना अंतरराष्ट्रीय शोकेस

स्थानीय स्तर पर उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार के बाद, अगला बड़ा कदम इन उत्पादों को वैश्विक खरीदारों के सामने प्रस्तुत करना था. इसी सोच के साथ सीएम योगी ने 'उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला' की नींव रखी. ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो मार्ट में आयोजित यह व्यापार मेला महज एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि यूपी के आर्थिक रूपांतरण का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय मंच साबित हुआ है. यूपीआईटीएस ने दुनिया भर के आयातकों, निवेशकों और व्यापारिक प्रतिनिधियों को एक छत के नीचे ला खड़ा किया. इस मेले में विभिन्न देशों के सैकड़ों अंतरराष्ट्रीय खरीदारों का पंजीकरण राज्य के उत्पादों में विश्व के गहरे विश्वास को दर्शाता है. इस साल ऑस्ट्रिया, बेलारूस, जापान, रूस, सिंगापुर और वियतनाम जैसे अग्रणी राष्ट्रों की पार्टनर कंट्री के रूप में सहभागिता राज्य के कूटनीतिक और व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाएगी. यह मेला न केवल आम नागरिकों को स्थानीय उत्पादों से जोड़ेगा, बल्कि डेढ़ लाख से अधिक व्यापारिक प्रतिनिधियों की उपस्थिति स्थानीय उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार सौदे हासिल करने का सीधा अवसर प्रदान करेगी.

ज्ञान के आदान-प्रदान का भी मंच है मेला

यूपीआईटीएस केवल बिक्री का जरिया नहीं बनता, बल्कि यह स्थानीय उद्यमियों को वैश्विक व्यापार की बारीकियों से अवगत कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. मेले के दौरान आयोजित विशेष सत्रों में 'ई-कॉमर्स व डिजिटल मार्केट एक्सेस', 'ब्रांड निर्माण', 'फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स के लाभ' और 'न्यू टेक्नोलॉजी का उपयोग' जैसे विषयों पर विशेषज्ञ उद्यमियों का मार्गदर्शन करते हैं. इस बहुआयामी दृष्टिकोण से यह सुनिश्चित हुआ कि राज्य की एमएसएमई इकाइयां न केवल पारंपरिक विनिर्माण में आगे रहें, बल्कि आधुनिक तकनीक, सप्लाई चेन और ग्लोबल ट्रेड मानकों को अपना कर खुद को भविष्य के अनुकूल बना सकें.

ग्रेटर नोएडा में शुक्रवार को शुरू हुए यूपीआईटीएस के दौरान भारत में वियतनाम के राजदूत और वियतनाम के प्रतिनिधिमंडल के साथ यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ.

ग्रेटर नोएडा में शुक्रवार को शुरू हुए यूपीआईटीएस के दौरान भारत में वियतनाम के राजदूत और वियतनाम के प्रतिनिधिमंडल के साथ यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ.
Photo Credit: PTI

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नीतिगत दूरदर्शिता ने उत्तर प्रदेश के औद्योगिक परिदृश्य का पूरी तरह कायाकल्प कर दिया है. ओडीओपी योजना ने जहां राज्य के पारंपरिक उद्योगों और एमएसएमई सेक्टर को संजीवनी देकर पुनर्जीवित किया, वहीं यूपीआईटीएस जैसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले ने इसे दुनिया के नक्शे पर एक नए ब्रांड के रूप में स्थापित कर दिया. विभिन्न देशों की सहभागिता, हजारों एमएसएमई इकाइयों का समावेश और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर स्थानीय कला की यह गूंज साबित करती है कि उत्तर प्रदेश 'उत्पादन से लेकर निर्यात' तक के अपने सफर में सफलता की नई कहानियां लिख रहा है. आने वाले सालों में यही नीतियां और वैश्विक शोकेस उत्तर प्रदेश को न केवल भारत का सबसे मजबूत आर्थिक राज्य बनाएंगे, बल्कि 'ग्लोबल एक्सपोर्ट हब' के रूप में स्थापित करेंगे.

(डिस्क्लेमर: लेखिका एक उद्यमी और नोएडा स्थित मैत्रेयी माइक्रो प्रोडक्ट्स की प्रबंध निदेशक हैं.इस लेख में व्यक्त विचार उनके निजी हैं, उनसे एनडीटीवी का सहमत या असहमत होना जरूरी नहीं है.)

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