उत्तर प्रदेश में अपराध और दबंगई करने वालों के खिलाफ योगी सरकार की पुलिस का 'एक्शन अवतार' एक बार फिर देखने को मिला है. कानपुर में गणेश विसर्जन यात्रा पर फिल्मी अंदाज में बमबाजी और फायरिंग कर दहशत फैलाने वाले दबंगों का पुलिस ने ऐसा इलाज किया कि उनका सारा खौफ हवा हो गया. कानपुर पुलिस ने गिरफ्तार किए गए चारों आरोपियों का बारिश के बीच जुलूस निकाला, जब पुलिस ने उनसे पूछा कि 'फिर कभी ऐसा करोगे', तो कल तक बम बरसाने वाले ये अपराधी गिड़गिड़ाते हुए बोले- 'कभी नहीं करेंगे साहब!'
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान शोभित सिंह, राहुल भदौरिया, धनराज सिंह भदौरिया और जुगराज सिंह भदौरिया के रूप में हुई है. डीसीपी साउथ दीपेंद्र नाथ चौधरी का कहना है कि इन आरोपियों की हिस्ट्रीशीट खोली जाएगी और इन पर गुंडा एक्ट के साथ-साथ गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
क्या है पूरा मामला?
कानपुर के गुजैनी थाना क्षेत्र के फत्तेपुर गांव के पास गुरुवार 24 सितंबर की शाम हनुमंत विहार निवासी अर्पित शुक्ला अपने दोस्तों और परिजनों के साथ भगवान गणेश की प्रतिमा लेकर विसर्जन के लिए जा रहे थे. यात्रा में डीजे बज रहा था और भक्त नाच-गा रहे थे. तभी पास घात लगाए बैठे दबंगों ने पुरानी रंजिश के चलते यात्रा को रोक लिया. इस दौरान बदमाशों ने बम फोड़े और 2-3 राउंड फायरिंग कर दी. बम के धमाकों और धुएं से वहां भगदड़ मच गई. दहशत इतनी थी कि महिलाओं और बच्चों ने जान बचाने के लिए कांटों भरे खेतों में छलांग लगा दी, जिससे कई बच्चे घायल हो गए. इसके बाद 15-20 हमलावरों ने लाठी-डंडों और कुल्हाड़ी से अर्पित, उनके दोस्त अंश, अविरल, मयंक और एक महिला बबली पर जानलेवा हमला कर दिया. बदमाशों ने बाइकों में भी जमकर तोड़फोड़ की थी.
पुरानी रंजिश और वर्चस्व की थी लड़ाई
पुलिस की जांच में सामने आया कि पीड़ित अर्पित शुक्ला का पिछले साल मुख्य आरोपी शोभित सिंह से विवाद हुआ था. शोभित ने अर्पित के घर में घुसकर मारपीट की थी, जिसका मुकदमा हनुमंत विहार थाने में दर्ज है. शोभित लगातार अर्पित पर केस वापस लेने का दबाव बना रहा था. अर्पित नहीं माना तो फत्तेपुर गांव में अपने मामा के घर छिपे शोभित ने राहुल भदौरिया और अन्य गुर्गों के साथ मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया था.
पुलिस के त्वरित एक्शन ने तोड़ी कमर
घटना की सूचना डायल 112 पर मिलते ही एसीपी नौबस्ता अभिषेक कुमार राहुल और गुजैनी पुलिस फोर्स तुरंत मौके पर पहुंची. पुलिस ने घायलों को अस्पताल भेजकर उनका इलाज करवाया. मामले की जांच और आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस की 3 विशेष टीमें गठित की गईं. इन टीमों ने 24 घंटे के भीतर ही मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया.
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