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UPSC बोर्ड ने पूछा- 'धुरंधर' और 'इक्कीस' एक-दूसरे की एंटीडोट हैं? जानें 11वीं रैंक पाने वाले यशस्वी का जवाब

यशस्वी के पिता रजनीश कुमार सिंह खुद बिहार कैडर के IAS हैं. उन्होंने बताया कि वे हर एग्जाम से पहले यशस्वी को लेकर फिल्म दिखाने ले जाते थे. वे कहते हैं कि किसी भी परीक्षा की तैयारी के लिए साल भर का समय काफी है. इसके लिए आखिरी दिन का दबाव नहीं लेना चाहिए.

UPSC बोर्ड ने पूछा- 'धुरंधर' और 'इक्कीस' एक-दूसरे की एंटीडोट हैं? जानें 11वीं रैंक पाने वाले यशस्वी का जवाब
  • बिहार के पटना निवासी यशस्वी राज वर्धन ने सिविल सेवा परीक्षा में 11वीं रैंक हासिल की है.
  • यशस्वी के पिता रजनीश कुमार सिंह बिहार कैडर के आईएएस और सहकारिता विभाग के सचिव हैं.
  • यशस्वी ने पहले प्रयास में प्री परीक्षा पास नहीं की थी, दूसरे प्रयास में 11वीं रैंक प्राप्त की.
पटना:

बिहार की राजधानी पटना के रहने वाले यशस्वी राज वर्धन ने सिविल सेवा परीक्षा में 11वीं रैंक हासिल की. उनके पिता रजनीश कुमार सिंह भी बिहार कैडर के आईएएस हैं. सहकारिता विभाग में सचिव हैं. पटना से स्कूली पढ़ाई करने वाले यशस्वी ने दूसरे अटेम्प्ट में यह सफलता हासिल की. यशस्वी राज वर्धन ने बताया कि पहले अटेम्प्ट में वे प्री परीक्षा भी पास नहीं कर पाए थे. लेकिन दूसरे अटेम्प्ट में उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया और 11वीं रैंक हासिल की. उन्होंने बताया कि उनके ग्रुप में रिजल्ट का पीडीएफ आया, 11वें नंबर पर अपना नाम देख कर वे चौंके, उन्होंने विश्वास नहीं हुआ कि यह सही पीडीएफ है. तब उन्होंने वेबसाइट पर जाकर रिजल्ट चेक किया. फिर उन्होंने घर में सभी को अपने रैंक की जानकारी दी.

'इंटरव्यू का 70 फीसदी हिस्सा फिल्मों पर आधारित'

यशस्वी ने बताया कि उन्हें थ्रिलर फिल्में देखना बहुत पसंद है. वह हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं की थ्रिलर फिल्में देखते हैं. गॉडफादर, गैंग्स ऑफ़ वासेपुर और सत्या उनकी पसंदीदा फिल्मों में से हैं. उन्होंने बताया कि उनके इंटरव्यू का 70 फीसदी हिस्सा फिल्मों पर आधारित था. उनसे पूछा गया कि धुरंधर और इक्कीस क्या एक दूसरे की एंटीडोट हैं. इस पर यशस्वी ने जवाब दिया कि अभी माहौल की वजह से ऐसा माना जा रहा है लेकिन दोनों फिल्में क्राफ्ट के लेवल पर अलग हैं. इसलिए दोनों की एक दूसरे से तुलना नहीं हो सकती है.

NDTV से बात करते हुए यशस्वी राज वर्धन ने कहा, पहले रिजल्ट देखा तो विश्वास नहीं हुआ, दोबारा कन्फर्म किया, मेरे पिता को सर्विस करते हुए देखा तो UPSC करने का सोचा था. मेरी फिल्मों में बहुत रुचि है, थ्रिलर मूवी बहुत पसंद है. मेरे इंटरव्यू का बड़ा हिस्सा इसी आसपास था. गॉडफादर मुझे बहुत पसंद है, सत्या मुझे बहुत पसंद है. गैंग्स ऑफ वासेपुर बहुत पसंद है. ब्यूरोक्रेसी में चैलेंज है लेकिन ईमानदारी से काम हो तो सब हो सकता है.

परीक्षा से एक दिन पहले फिल्म दिखाने ले जाते थे IAS पिता

यशस्वी के पिता रजनीश कुमार सिंह खुद बिहार कैडर के IAS हैं. उन्होंने बताया कि वे हर एग्जाम से पहले यशस्वी को लेकर फिल्म दिखाने ले जाते थे. वे कहते हैं कि किसी भी परीक्षा की तैयारी के लिए साल भर का समय काफी है. इसके लिए आखिरी दिन का दबाव नहीं लेना चाहिए.

यशस्वी बताते हैं कि उन्होंने पहला अटेम्प्ट नौकरी करते हुए दिया और दूसरे अटेम्प्ट से पहले नौकरी छोड़ दी. उनका मानना है कि सिर्फ 8 से 10 घंटे की पढ़ाई कर के बेहतर रिजल्ट हासिल किया जा सकता है.  यशस्वी ने पटना के डीपीएस से 10वीं और फिर दिल्ली से 12वीं की पढ़ाई की. कम्प्यूटर साइंस से बीटेक करने के बाद उन्होंने बतौर डेटा एनालिस्ट करीब 3 साल नौकरी की और अब सिविल सेवा परीक्षा पास की है.

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Yashasvi Raj Vardhan, 11th Rank In Civil Services Examination, UPSC Interview
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